जयपुर | राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में कृषि क्षेत्र के एक नए स्वर्णिम युग का सूत्रपात हुआ है। यहाँ आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन ने किसानों की समृद्धि के लिए एक मजबूत नींव रख दी है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए स्पष्ट किया कि कृषि भारत की असली रीढ़ है। उन्होंने किसानों को देश की आत्मा बताया।
केंद्र सरकार अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए धरातल पर काम कर रही है। लक्ष्य अब कृषि में आत्मनिर्भरता है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान ने कृषि का जो आधुनिक रोडमैप तैयार किया है, उसकी चर्चा अब पूरे देश में होने लगी है। शिवराज सिंह चौहान ने इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की।
उन्होंने कहा कि राजस्थान द्वारा तैयार किया गया यह कृषि मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बनेगा। अन्य राज्यों को भी इस नवाचार का अनुसरण करने का संदेश दिया गया है।
खेती का नया रोडमैप: जयपुर सम्मेलन: खेती बनेगी मुनाफे का सौदा: जयपुर में कृषि महाकुंभ, शिवराज सिंह चौहान और भजनलाल शर्मा ने फूंका नया जोश
जयपुर में आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को आधुनिक बनाने का संकल्प लिया। राजस्थान में कृषि बजट में 34% की वृद्धि और आगामी 'ग्राम' सम्मेलन के जरिए खेती को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की योजना साझा की गई।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान के कृषि बजट में 34% की ऐतिहासिक वृद्धि कर 1.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
- मई 2026 में जयपुर में 'ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट' (GRAM) का भव्य आयोजन किया जाएगा।
- किसानों की आय बढ़ाने के लिए राजस्थान में पीएम किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 9,000 रुपये किया गया।
- सभी राज्यों को मिशन मोड पर 100% किसानों का 'फार्मर आईडी' पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
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क्षेत्रीय सम्मेलनों की नई परंपरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश की भौगोलिक विविधताओं को समझते हुए क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों के आयोजन का निर्णय लिया गया है। इसी कड़ी में पहला सम्मेलन राजस्थान में हुआ।
इस सम्मेलन में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गोवा और राजस्थान जैसे महत्वपूर्ण राज्य शामिल हुए। यह मंच राज्यों के बीच आपसी समन्वय और नवाचारों को साझा करने का एक बड़ा जरिया बना है।
मंत्री चौहान ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान खोजने में मदद मिलेगी। यह सम्मेलन कृषि को एक नई और आधुनिक दिशा देने का काम करेगा।
कृषि विकास के तीन प्रमुख लक्ष्य
केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र के उत्थान के लिए तीन मुख्य लक्ष्य निर्धारित किए हैं। पहला लक्ष्य देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि आत्मनिर्भर भारत का संकल्प पूरा हो सके।
दूसरे लक्ष्य के तहत किसानों की आय में निरंतर वृद्धि और उनके जीवन स्तर में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि किसान संपन्न होगा तो देश संपन्न होगा।
तीसरे लक्ष्य के रूप में पोषण सुरक्षा पर जोर दिया गया है। अब केवल उत्पादन बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि जनता को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है।
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फार्मर आईडी और डिजिटल कृषि
शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों से अपील की है कि वे मिशन मोड पर कार्य करते हुए 100 प्रतिशत किसानों का 'फार्मर आईडी' के तहत पंजीकरण सुनिश्चित करें। इससे योजनाओं का लाभ सीधे मिलेगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को जोखिम से बचाना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे प्रभावी ढंग से निभाया जा रहा है।
फसलों को होने वाले नुकसान का त्वरित आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे किसानों को बीमा राशि का भुगतान बिना किसी देरी के संभव हो सकेगा और उन्हें आर्थिक संबल मिलेगा।
राज्यों को वित्तीय लचीलापन
केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए कृषि योजनाओं के तहत राज्यों को दी जाने वाली राशि में लचीलापन देने की बात कही है। अब राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार धन का उपयोग कर सकेंगे।
इसके साथ ही, फसलों की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर समय से खरीद सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। इससे किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और सही दाम प्राप्त होंगे।
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों को कृषि बजट का प्रभावी उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने 'विकसित कृषि संकल्प अभियान' आयोजित करने का भी आह्वान किया, जिसमें केंद्र हर संभव सहयोग प्रदान करेगा।
ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (GRAM)
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की कि मई 2026 में राजस्थान 'ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट' (GRAM) का आयोजन करेगा। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा, जिसमें दुनिया भर के विशेषज्ञ आएंगे।
इस मीट का मुख्य उद्देश्य राजस्थान को कृषि निर्यात के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। इसमें कृषि वैज्ञानिकों, तकनीकी जानकारों और निवेशकों को एक ही मंच पर लाने की तैयारी की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री ने इस पहल का स्वागत करते हुए आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम इस आयोजन के लिए राजस्थान भेजेगी, ताकि इसे सफल बनाया जा सके।
बजट में ऐतिहासिक 34% की वृद्धि
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ बताया कि राजस्थान सरकार ने कृषि बजट में 34 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि की है। वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 19 हजार 408 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है।
यह बजट राजस्थान के किसानों की किस्मत बदलने वाला साबित होगा। राजस्थान आज बाजरा, सरसों और ईसबगोल के उत्पादन में देश में नंबर एक पर है, और अब यहाँ प्रोसेसिंग यूनिट्स पर जोर दिया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि किसानों को उनके कच्चे माल का बेहतर मूल्य मिले। इसके लिए वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग की रणनीतियों पर तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे रोजगार भी बढ़ेंगे।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आधुनिक तकनीक
मुख्यमंत्री ने किसानों से पारंपरिक खेती के स्थान पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि को अब नौकरी और व्यापार से भी अधिक लाभकारी बनाने का समय आ गया है।
सिंचाई के लिए फव्वारा सिस्टम और आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग बढ़ाना होगा। इसके साथ ही, पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बाजार की मांग के अनुसार नई फसलों को भी शामिल करना जरूरी है।
रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड' के अनुसार ही खाद प्रयोग करने की सलाह दी। भूमि की उर्वरता बनाए रखना भविष्य की पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।
पशुपालन और प्राकृतिक खेती का संगम
कृषि के साथ पशुपालन को जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। भजनलाल शर्मा ने कहा कि पशुपालन से न केवल अतिरिक्त आय होती है, बल्कि प्राकृतिक खाद की उपलब्धता भी बढ़ती है, जिससे खेती की लागत कम होती है।
राजस्थान सरकार सिंचाई के लिए बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है। राम जल सेतु लिंक परियोजना, यमुना समझौता और आईएनजीपी जैसी योजनाएं किसानों के खेतों तक पानी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
पिछली सरकार बनाम वर्तमान सरकार
मुख्यमंत्री ने तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि उनकी सरकार ने मात्र 25 महीनों में पिछली सरकार के पांच साल से अधिक काम किया है। फार्म पौंड निर्माण में भारी वृद्धि हुई है।
जहाँ पिछली सरकार ने अपने शुरुआती 25 महीनों में केवल 8,152 फार्म पौंड बनाए थे, वहीं वर्तमान सरकार ने 35,368 फार्म पौंड का निर्माण कर किसानों को बड़ी राहत दी है।
अनुदान के मामले में भी वर्तमान सरकार बहुत आगे है। फार्म पौंड पर 303 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है, जबकि पिछली सरकार के समय यह आंकड़ा मात्र 48 करोड़ रुपये के आसपास था।
किसानों के लिए समर्पण का भाव
खेतों की तारबंदी, शेडनेट हाउस का निर्माण और स्वामित्व कार्ड वितरण जैसे कार्यों में भी राजस्थान सरकार ने रिकॉर्ड कायम किया है। सरकार का हर कदम किसानों के सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा है।
सम्मेलन में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा और विभिन्न राज्यों के मंत्रियों ने भी अपने विचार साझा किए। सभी ने एक स्वर में किसानों के उत्थान की बात कही।
अंत में, इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की कृषि नीति अब अधिक समावेशी और किसान-केंद्रित हो गई है। जयपुर से शुरू हुआ यह वैचारिक मंथन पूरे देश की खेती को नई ऊर्जा देगा।
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