चॉकलेट सिस्ट: पीरियड्स में दर्द? चॉकलेट सिस्ट हो सकता है कारण, जानें लक्षण
पीरियड्स में होने वाला तेज दर्द और प्रेग्नेंसी में आने वाली रुकावट चॉकलेट सिस्ट का इशारा हो सकता है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार जानें इसके लक्षण और इलाज।
HIGHLIGHTS
- क्या है चॉकलेट सिस्ट: यह अंडाशय में होने वाली एक गांठ है, जिसमें पुराना खून जमा होकर चॉकलेट जैसा दिखता है।
- मुख्य लक्षण: पीरियड्स में असहनीय दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द, और प्रेग्नेंसी में दिक्कत इसके प्रमुख लक्षण हैं।
- प्रजनन क्षमता पर असर: यह सिस्ट अंडों की क्वालिटी खराब कर सकती है और फैलोपियन ट्यूब को ब्लॉक कर सकती है, जिससे बांझपन होता है।
- इलाज के विकल्प: इसका इलाज दवाइयों, हार्मोन थेरेपी और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए किया जाता है, जो महिला की स्थिति पर निर्भर करता है।
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महिलाओं में पीरियड्स (मासिक धर्म) के दौरान थोड़ा-बहुत दर्द होना सामान्य माना जाता है। लेकिन अगर यह दर्द हर महीने बर्दाश्त से बाहर हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पीठ और पेट के निचले हिस्से में तेज ऐंठन या शादी के लंबे समय बाद भी गर्भधारण में लगातार दिक्कत आना एक गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इसे आम कमजोरी समझने की भूल बिल्कुल न करें।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी लक्षण महिलाओं के अंडाशय (Ovary) में होने वाली एक खास तरह की गांठ की वजह से हो सकते हैं, जिसे 'चॉकलेट सिस्ट' (Chocolate Cyst) या 'ओवेरियन एंडोमेट्रियोमा' (Ovarian Endometrioma) कहा जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह बीमारी क्या है और यह महिलाओं के लिए चिंता का विषय क्यों है।
आखिर क्या होती है चॉकलेट सिस्ट?
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इसका नाम सुनकर भले ही यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इसका चॉकलेट से कोई लेना-देना नहीं है। दरअसल, महिलाओं के गर्भाशय (uterus) के अंदर एक खास परत होती है जिसे एंडोमेट्रियम टिशू कहते हैं।
जब यही टिशू किसी कारण से गर्भाशय से बाहर निकलकर अंडाशय पर उगने लगते हैं, तो वहां धीरे-धीरे छोटी-छोटी थैलियां (cysts) बन जाती हैं।
एनसीबीआइ (NCBI) के अनुसार, पीरियड्स के दौरान जब गर्भाशय से ब्लीडिंग होती है, तो इन गांठों के अंदर भी खून जमा होने लगता है। समय के साथ यह पुराना खून गाढ़ा और गहरे भूरे रंग का हो जाता है, जो बिल्कुल पिघली हुई चॉकलेट जैसा दिखता है। इसी वजह से मेडिकल भाषा में इसे 'चॉकलेट सिस्ट' कहा जाता है।
चॉकलेट सिस्ट के मुख्य लक्षण
इस समस्या के कुछ सामान्य लक्षण हैं जिन्हें पहचानना जरूरी है:
- पीरियड्स के दौरान बहुत तेज और असहनीय दर्द होना।
- पेल्विक पेन (पेट के निचले हिस्से में लगातार दर्द)।
- संबंध बनाते समय दर्द महसूस होना।
- प्रेग्नेंसी में रुकावट आना (Infertility)।
- मासिक धर्म के दौरान हैवी ब्लीडिंग होना।
यह गांठ प्रेग्नेंसी पर कैसे डालती है असर?
क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, चॉकलेट सिस्ट महिलाओं की प्रजनन क्षमता (Fertility) पर सीधा और गंभीर असर डालती है।
यह अंडाशय के अंदर स्वस्थ अंडों (eggs) को बनने से रोक सकती है या उनकी गुणवत्ता को खराब कर सकती है। कई बार यह गांठ इतनी बड़ी हो जाती है कि यह फैलोपियन ट्यूब का रास्ता ही ब्लॉक कर देती है। इस वजह से अंडा और स्पर्म आपस में मिल नहीं पाते और महिला को मां बनने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
डॉक्टर कैसे करते हैं इसकी जांच और इलाज?
अगर आपको ऊपर बताए गए लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। डॉक्टर कुछ जांचों के जरिए इसकी पुष्टि करते हैं।
जांच के तरीके
- पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): इससे सिस्ट के आकार और स्थिति का पता चलता है।
- MRI स्कैन: यह अधिक विस्तृत जांच के लिए किया जा सकता है।
चॉकलेट सिस्ट के इलाज के विकल्प
चॉकलेट सिस्ट का इलाज कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि महिला की उम्र, उसके लक्षण कितने गंभीर हैं और क्या वह भविष्य में गर्भधारण करना चाहती है।
1. दवाइयां और हार्मोन थेरेपी
अगर सिस्ट छोटी है और लक्षण हल्के हैं, तो डॉक्टर दर्द कम करने और हार्मोन को नियंत्रित करने के लिए कुछ दवाइयां या गर्भनिरोधक गोलियां (Birth control pills) दे सकते हैं। इससे सिस्ट का बढ़ना रुक जाता है।
2. सर्जरी (Laparoscopy)
अगर सिस्ट का आकार बहुत बड़ा हो गया है, दर्द असहनीय है या प्रेग्नेंसी में लगातार दिक्कत आ रही है, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं। इसमें दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपी) के जरिए बिना किसी बड़े चीरे के सिर्फ सिस्ट को बाहर निकाल दिया जाता है, जिससे अंडाशय को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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