डिमेंशिया: WHO ने बताया 3 आदतों से बढ़ता है खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई गाइडलाइन के अनुसार, स्मोकिंग, हाई ब्लड प्रेशर और अकेलापन भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) का खतरा बढ़ाते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि जीवनशैली में सुधार करके लगभग 45% मामलों को रोका जा सकता है।
HIGHLIGHTS
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डिमेंशिया को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है।
- स्मोकिंग, हाई ब्लड प्रेशर और अकेलापन इसके प्रमुख जोखिम कारक माने गए हैं।
- जीवनशैली में सही बदलाव करके डिमेंशिया के 45% मामलों को टाला जा सकता है।
- शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहना डिमेंशिया से बचाव का एक महत्वपूर्ण उपाय है।
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उम्र बढ़ने के साथ चीजों को भूलना एक आम समस्या मानी जाती है, लेकिन यह हमेशा सिर्फ बुढ़ापे का संकेत नहीं होता। यह डिमेंशिया नामक एक गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में एक नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें इस बीमारी के कारणों और बचाव के उपायों पर प्रकाश डाला गया है।
डिमेंशिया क्या है?
डिमेंशिया दिमाग से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इससे उसकी सोचने-समझने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।
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मरीज अपने रोजमर्रा के काम, जैसे करीबियों के नाम याद रखना या रास्ता पहचानना, भी ठीक से नहीं कर पाता। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का ही सबसे आम रूप है। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति किसी करीबी दोस्त का नाम भी भूल सकता है।
WHO की गाइडलाइन: इन 3 आदतों से सबसे ज्यादा खतरा
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें डिमेंशिया के खतरे को काफी बढ़ा सकती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 45% मामलों को जीवनशैली में सुधार करके रोका या टाला जा सकता है।
1. स्मोकिंग (धूम्रपान)
बीड़ी, सिगरेट या किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन फेफड़ों के साथ-साथ दिमाग के लिए भी बेहद हानिकारक है। यह दिमाग की नसों को सिकोड़ देता है, जिससे मस्तिष्क तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित होता है। यह स्थिति आगे चलकर डिमेंशिया का कारण बन सकती है।
2. हाई ब्लड प्रेशर (High BP)
लगातार हाई ब्लड प्रेशर रहने से दिमाग की नाजुक रक्त वाहिकाओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। अगर इसे समय पर नियंत्रित न किया जाए, तो यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे कम कर सकता है, जिससे याददाश्त कमजोर होने लगती है।
3. अकेलापन और सामाजिक दूरी
WHO ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि जो लोग सामाजिक रूप से अलग-थलग रहते हैं या अकेलेपन और डिप्रेशन से जूझ रहे हैं, उनमें डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है। सामाजिक संपर्क की कमी से दिमाग की सक्रियता कम हो जाती है, जो उसे अंदर से कमजोर बना देती है।
डिमेंशिया से बचने के लिए WHO के 4 उपाय
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डिमेंशिया के खतरे को कम करने के लिए कुछ सरल उपाय भी सुझाए हैं, जिन्हें अपनाकर दिमाग को स्वस्थ रखा जा सकता है।
- शारीरिक रूप से सक्रिय रहें: रोजाना कम से कम 20-30 मिनट टहलना, योग या कोई भी व्यायाम करना दिमाग में रक्त संचार को बेहतर बनाता है।
- मानसिक रूप से सक्रिय रहें: किताबें पढ़ना, पहेलियां सुलझाना या कोई नई भाषा या कौशल सीखना दिमाग की कोशिकाओं को सक्रिय रखता है।
- सामाजिक जुड़ाव बनाए रखें: दोस्तों और परिवार के साथ नियमित रूप से समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है।
- स्वस्थ आहार लें: संतुलित और पौष्टिक आहार दिमाग को जरूरी पोषण प्रदान करता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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