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राज्य

8वें वेतन आयोग के नाम पर महाठगी: 8वें वेतन आयोग के नाम पर साइबर ठगी: कर्मचारियों को बड़ी चेतावनी

गणपत सिंह मांडोली

राजस्थान साइबर पुलिस ने वेतन आयोग के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर एडवाइजरी जारी की है।

HIGHLIGHTS

  • साइबर ठग 8वें वेतन आयोग के नाम पर सरकारी कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं।
  • व्हाट्सएप पर सैलरी कैलकुलेटर का लिंक भेजकर मोबाइल का कंट्रोल ले लेते हैं ठग।
  • डीजीपी संजय अग्रवाल ने अनवेरिफाइड एपीके फाइल डाउनलोड न करने की सलाह दी है।
  • सरकारी विभाग वेतन गणना के लिए कभी भी व्हाट्सएप पर सॉफ्टवेयर नहीं भेजते हैं।
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जयपुर | राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बेहद जरूरी और गंभीर चेतावनी जारी की गई है, जो सीधे आपके बैंक खाते से जुड़ी है।

राज्य में इन दिनों साइबर अपराधी 8वें वेतन आयोग के नाम पर एक नया और खतरनाक जाल बुन रहे हैं, जिससे कर्मचारी परेशान हैं।

महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में राज्य साइबर पुलिस ने एक विशेष एडवाइजरी जारी कर सबको सतर्क किया है।

8वें वेतन आयोग का खतरनाक फर्जीवाड़ा

साइबर ठगों ने अब सरकारी कर्मचारियों की भावनाओं और उनकी उत्सुकता का फायदा उठाना शुरू कर दिया है, जो काफी चिंताजनक है।

वे जानते हैं कि कर्मचारी लंबे समय से 8वें वेतन आयोग और अपनी सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

इसी का लाभ उठाते हुए ठग व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर दावा करते हैं कि नए वेतन आयोग के तहत सैलरी में भारी वृद्धि होगी।

मैसेज के साथ एक लुभावना 'सैलरी कैलकुलेटर' का लिंक भी दिया जाता है, जिसे क्लिक करने के लिए कर्मचारियों को उकसाया जाता है।

जैसे ही कोई इस लिंक पर क्लिक करता है, उसे एक एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करने के लिए मजबूर किया जाता है जो वायरस है।

कैसे काम करता है ठगों का यह जाल

डीजीपी संजय अग्रवाल ने विस्तार से बताया कि यह ठगी पूरी तरह से तकनीकी और मनोवैज्ञानिक स्तर पर काम करती है, जिससे बचना जरूरी है।

जब कोई कर्मचारी उस संदिग्ध फाइल को अपने फोन में इंस्टॉल करता है, तो वह फोन का पूरा एक्सेस ठगों को दे देता है।

यह फाइल असल में एक मैलवेयर होती है जो आपके मोबाइल के बैकग्राउंड में छुपकर काम करना शुरू कर देती है और डाटा चुराती है।

इसके जरिए ठग आपके मैसेज, कॉल रिकॉर्ड, गैलरी और सबसे महत्वपूर्ण आपके बैंकिंग ओटीपी (OTP) को आसानी से पढ़ सकते हैं।

एक बार मोबाइल का कंट्रोल मिलने के बाद, ठग आपके नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर बैंक खाते से सारा पैसा निकाल लेते हैं।

डीजीपी की सरकारी कर्मचारियों को सलाह

डीजीपी अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि सरकार कभी भी व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वेतन संबंधी कोई सॉफ्टवेयर या फाइल नहीं भेजती।

अनवेरिफाइड सोर्स से ऐप डाउनलोड करना अपने बैंक की चाबी चोरों को देने जैसा है, इसलिए हमेशा सतर्क रहें और सुरक्षित रहें।

वेतन या पेंशन से जुड़ी किसी भी प्रकार की आधिकारिक गणना केवल सरकार के अधिकृत पोर्टल पर ही की जाती है, व्हाट्सएप पर नहीं।

कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी सर्विस डिटेल्स केवल 'पे-मैनेजर' या संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही चेक करें।

किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर भरोसा करना आपकी जीवन भर की जमापूंजी को खतरे में डाल सकता है, सावधान रहें।

एपीके फाइल का बढ़ता हुआ खतरा

आजकल साइबर अपराधी सीधे लिंक के बजाय एपीके फाइल का उपयोग कर रहे हैं क्योंकि इन्हें एंटी-वायरस आसानी से नहीं पकड़ पाते हैं।

ये फाइलें आपके फोन में इंस्टॉल होते ही कैमरा और माइक्रोफोन तक की परमिशन मांग लेती हैं, जिससे आपकी प्राइवेसी खत्म हो जाती है।

साइबर पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इस तरह के मामलों में तेजी आई है जहां सरकारी योजनाओं के नाम पर ठगी हुई है।

8वें वेतन आयोग का नाम इस्तेमाल करना ठगों के लिए एक नया हथियार बन गया है क्योंकि इससे कर्मचारियों का भरोसा जीतना आसान है।

पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान नंबर से आए मैसेज में दी गई फाइल को कभी भी ओपन न करें, चाहे वह कितनी ही सही क्यों न लगे।

साइबर सुरक्षा के कुछ गोल्डन रूल्स

साइबर पुलिस ने आमजन और कर्मचारियों के लिए कुछ सुरक्षा नियम जारी किए हैं जिनका पालन करना आज के समय में अनिवार्य हो गया है।

पहला नियम यह है कि अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर 'अननोन सोर्सेज से इंस्टॉलेशन' के विकल्प को हमेशा बंद करके रखें।

दूसरा, केवल गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर जैसे आधिकारिक प्लेटफार्मों से ही कोई भी मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करें।

तीसरा, अगर आपको कोई संदिग्ध मैसेज मिलता है, तो उस नंबर को तुरंत ब्लॉक करें और व्हाट्सएप पर उसे रिपोर्ट भी जरूर करें।

चौथा, अपने बैंक खातों के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का उपयोग करें ताकि पासवर्ड पता होने पर भी कोई लॉगिन न कर सके।

ठगी होने पर क्या करें?

यदि अनजाने में आपने ऐसी किसी फाइल को डाउनलोड कर लिया है, तो सबसे पहले अपने फोन का इंटरनेट तुरंत बंद कर दें।

इसके बाद अपने फोन को फैक्ट्री रिसेट करें और अपने बैंक को सूचित कर अपने सभी खातों और कार्ड्स को ब्लॉक करवाएं।

साइबर अपराध की शिकायत के लिए तुरंत भारत सरकार की हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें।

जितनी जल्दी आप शिकायत दर्ज करेंगे, आपके पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी, इसलिए देरी बिल्कुल न करें।

राजस्थान साइबर पुलिस सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भी लगातार लोगों को इस नए खतरे के प्रति जागरूक करने में जुटी हुई है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार

साइबर अपराध के इस दौर में तकनीकी ज्ञान से ज्यादा आपकी सतर्कता मायने रखती है, जो आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।

ठग हमेशा आपकी भावनाओं जैसे डर, लालच या उत्सुकता पर हमला करते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में शांत रहकर सोचना जरूरी है।

8वें वेतन आयोग की आधिकारिक घोषणा होने पर इसकी जानकारी समाचार पत्रों और सरकारी आदेशों के माध्यम से सार्वजनिक की जाएगी।

किसी भी व्हाट्सएप मैसेज को सच मान लेना आपके डिजिटल सुरक्षा कवच को तोड़ सकता है, इसलिए हमेशा आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

अपने साथी कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों को भी इस घोटाले के बारे में बताएं ताकि वे भी इस जाल में फंसने से बच सकें।

निष्कर्ष और भविष्य की सावधानी

राजस्थान पुलिस की यह पहल सराहनीय है, लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी अंततः स्वयं उपयोगकर्ता की होती है जो उसे सुरक्षित रखती है।

डिजिटल इंडिया के इस युग में हमें अपनी डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा के प्रति उतना ही गंभीर होना चाहिए जितना हम भौतिक संपत्ति के लिए होते हैं।

8वें वेतन आयोग के नाम पर होने वाला यह फ्रॉड एक चेतावनी है कि अपराधी हमेशा नए तरीकों की तलाश में रहते हैं, हमें उनसे आगे रहना होगा।

*Edit with Google AI Studio

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