अजित पवार का विमान हादसे में निधन: देश स्तब्ध: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान हादसे में निधन: इन दिग्गज नेताओं ने भी हादसों में गंवाई थी अपनी जान

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान हादसे में दुखद निधन हो गया है। इस घटना ने देश को उन अन्य दिग्गज नेताओं की याद दिला दी है जिन्होंने हादसों में अपनी जान गंवाई।

मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति के लिए आज का दिन एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक समाचार लेकर आया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी राजनीति के प्रमुख स्तंभ अजित पवार का एक भीषण विमान हादसे में निधन हो गया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, हादसे के समय विमान में अजित पवार सहित कुल पांच लोग सवार थे। विमान ने जैसे ही अपनी उड़ान भरी, कुछ ही समय बाद उसका संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया और बाद में उसके दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि हुई। इस हादसे में विमान में सवार सभी पांचों व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है। अजित पवार के इस असामयिक निधन से राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर है और हर कोई इस खबर से स्तब्ध है। अजित पवार एक ऐसे नेता थे जिन्होंने धरातल पर काम किया और राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जाने से जो रिक्तता पैदा हुई है, उसे भरना असंभव है। भारतीय राजनीति का इतिहास गवाह है कि समय-समय पर कई दिग्गज नेताओं ने इसी तरह के हादसों में अपनी जान गंवाई है। अजित पवार से पहले भी कई ऐसे बड़े नाम रहे हैं जिनका सफर इन अनचाहे हादसों ने बीच में ही रोक दिया। आइए विस्तार से जानते हैं उन नेताओं के बारे में जिन्होंने विमान या सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई।

विजय रूपाणी: अहमदाबाद में भीषण विमान हादसा
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का नाम भी इस सूची में शामिल है। 12 जून, 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में एक भीषण विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया था। एयर इंडिया के विमान ने अहमदाबाद से लंदन के लिए अपनी उड़ान शुरू की थी, लेकिन टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद विमान तकनीकी खराबी का शिकार हो गया और क्रैश हो गया। इस भीषण दुर्घटना में विजय रूपाणी सहित 241 लोगों की जान चली गई थी। यह विमान हादसा भारतीय विमानन इतिहास के सबसे बड़े हादसों में से एक माना जाता है, जिसने एक कुशल राजनेता को हमसे छीन लिया।

गोपीनाथ मुंडे: दिल्ली में सड़क दुर्घटना
महाराष्ट्र के ही एक और बड़े नेता और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहे गोपीनाथ मुंडे का निधन 17 नवंबर 2021 को एक सड़क हादसे में हुआ था। मुंडे अपनी सरकारी गाड़ी से दिल्ली एयरपोर्ट की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तभी एक अनियंत्रित कार ने उनकी गाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी पूरी तरह चकनाचूर हो गई और अस्पताल ले जाते समय मुंडे ने दम तोड़ दिया। उनकी मृत्यु ने महाराष्ट्र में भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी।

वाईएस राजशेखर रेड्डी: लापता हेलीकॉप्टर और दुखद अंत
आंध्र प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का निधन 2 सितंबर 2009 को हुआ था। उनका हेलीकॉप्टर रुद्रकोंडा की दुर्गम पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। यह हादसा इतना जटिल था कि उनके हेलीकॉप्टर का पता लगाने में 24 घंटे से भी अधिक का समय लगा। एक व्यापक खोज और बचाव अभियान के बाद उनके निधन की पुष्टि हुई, जिससे पूरे देश में शोक व्याप्त हो गया था।

साहिब सिंह वर्मा और जीएमसी बालयोगी
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा का निधन 30 जून 2007 को राजस्थान के शाहजहांपुर के पास एक सड़क दुर्घटना में हुआ था। वे राजस्थान के सीकर से दिल्ली लौट रहे थे जब एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी। इसी तरह, लोकसभा के 12वें अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी की मृत्यु 3 मार्च 2002 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में एक हेलीकॉप्टर हादसे में हुई थी। बालयोगी अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे।

माधवराव सिंधिया और राजेश पायलट: कांग्रेस के दो स्तंभ
कांग्रेस पार्टी ने अपने दो सबसे होनहार नेताओं को भी हादसों में खोया। माधवराव सिंधिया का निधन 30 सितंबर 2001 को मैनपुरी में एक विमान दुर्घटना में हुआ था, जब वे एक रैली के लिए जा रहे थे। वहीं, राजेश पायलट का निधन 11 जून 2000 को राजस्थान के दौसा में एक भीषण सड़क हादसे में हुआ था। पायलट वायुसेना से राजनीति में आए थे और उनकी लोकप्रियता बहुत अधिक थी।

संजय गांधी और ज्ञानी जैल सिंह
देश के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का निधन 25 दिसंबर 1994 को चंडीगढ़ में हुआ था, जो एक कार हादसे में लगी चोटों का परिणाम था। इससे पहले, 23 जून 1980 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी का दिल्ली में एक विमान क्रैश में निधन हो गया था। इन तमाम हादसों ने समय-समय पर देश को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। अजित पवार का जाना भी उसी कड़ी में एक और दुखद अध्याय है जिसने देश की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है। उनकी प्रशासनिक क्षमता और जनता के बीच उनकी पकड़ उन्हें एक विशिष्ट पहचान देती थी, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।