जयपुर में 78वां सेना दिवस समारोह: जयपुर में 78वें सेना दिवस पर भव्य परेड: पहली बार दुनिया के सामने आई भैरव बटालियन और रोबोटिक योद्धा
जयपुर के महल रोड पर आयोजित 78वें सेना दिवस समारोह में भारतीय सेना ने अपनी अत्याधुनिक शक्ति का प्रदर्शन किया। पहली बार भैरव बटालियन और रोबोटिक कुत्तों ने जनता का ध्यान खींचा।
जयपुर | गुलाबी नगरी जयपुर की सुबह आज भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई है। जगतपुरा स्थित महल रोड पर आयोजित 78वें सेना दिवस की परेड ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है।
यह आयोजन न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है। पहली बार सेना ने अपनी वार्षिक परेड को सैन्य छावनी के बंद घेरे से निकालकर आम जनता के बीच लाने का निर्णय लिया है।
सेना दिवस का ऐतिहासिक महत्व
हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है जो भारतीय सैन्य शक्ति का प्रतीक है। इसी दिन साल 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी।
जयपुर में होने वाला यह आयोजन उसी गौरवशाली विरासत और आधुनिक भविष्य का एक अद्भुत संगम है। इस भव्य परेड के माध्यम से भारतीय सेना ने अपनी अजेय शक्ति का परिचय दिया है।
भैरव बटालियन का सार्वजनिक पदार्पण
आज की परेड में पूरी दुनिया की नजरें भैरव बटालियन पर टिकी रहीं। यह बटालियन पहली बार सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने पेश की गई है।
आधुनिक हाइब्रिड युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए इस विशेष यूनिट का गठन किया गया है। यह बटालियन पैरा स्पेशल फोर्सेस और नियमित इंफेंट्री के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करती है।
भैरव बटालियन विशेष रूप से ड्रोन आधारित युद्ध और मल्टी डोमेन ऑपरेशंस के लिए प्रशिक्षित है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों ने इस बटालियन की नींव रखने में बेहद अहम भूमिका निभाई है।
कठिन और दुर्गम इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की इसकी क्षमता इसे सबसे अलग बनाती है। यह यूनिट आधुनिक नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर के लिए पूरी तरह तैयार की गई है।
मिसाइल और रॉकेट प्रणालियों का प्रदर्शन
परेड के दौरान सेना ने अपनी अत्याधुनिक युद्धक प्रणालियों का प्रदर्शन कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली सबसे प्रमुख आकर्षण रही।
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे घातक क्रूज मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता 800 किलोमीटर तक है। इसके साथ ही पिनाका गाइडेड रॉकेट सिस्टम ने भी अपनी धमक दिखाई।
पिनाका सिस्टम 120 किलोमीटर तक सटीक हमला करने में सक्षम है। परेड में स्मर्च और बीएम-21 ग्राड जैसे मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर भी शामिल किए गए थे।
ये हथियार प्रणाली दुश्मन के खेमे में तबाही मचाने के लिए जानी जाती है। इनके प्रदर्शन ने भारतीय सेना की मारक क्षमता और तकनीकी श्रेष्ठता को उजागर किया है।
वायु रक्षा और ड्रोन तकनीक
आज की परेड में आकाशतीर स्वदेशी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को भी दिखाया गया। इस प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विदेशी ड्रोन्स को मार गिराकर वैश्विक ध्यान खींचा था।
कामिकाजे ड्रोन्स जिन्हें सुसाइड ड्रोन्स भी कहा जाता है आज की परेड के मुख्य आकर्षण रहे। इसमें मिनी हार्पी और स्काई स्ट्राइकर जैसे ड्रोन शामिल थे।
पहली बार एमयूएम-टी तकनीक का प्रदर्शन किया गया जिसमें सैनिक और मानवरहित वाहन एक साथ तालमेल बिठाते दिखे। यह तकनीक भविष्य के युद्धों में भारतीय सेना को बढ़त दिलाएगी।
सेना ने दिखाया कि कैसे तकनीक का उपयोग जवानों को और अधिक सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है। यह आधुनिक भारत की बदलती सैन्य रणनीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
बख्तरबंद शक्ति और हवाई कलाबाजी
परेड में भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक टी-90 भीष्म अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरा। इसके साथ ही अर्जुन टैंक और के-9 वज्र तोपों ने भी अपनी गर्जना की।
आसमान में अपाचे और स्वदेशी प्रचंड हेलीकॉप्टरों ने अपनी अद्भुत कलाबाजी दिखाई। इन हेलीकॉप्टरों के शामिल होने से सेना की हवाई मारक क्षमता कई गुना बढ़ गई है।
सेना के तीन चेतक हेलीकॉप्टरों ने परेड ग्राउंड पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाकर उत्सव का माहौल बना दिया। यह दृश्य जयपुर के नागरिकों के लिए अत्यंत रोमांचक और गर्व से भरा था।
धनुष तोप और अन्य बख्तरबंद वाहनों ने परेड की भव्यता में चार चांद लगा दिए। इन हथियारों का प्रदर्शन आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती से दर्शाता है।
रोबोटिक योद्धाओं की एंट्री
भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखते हुए परेड में रोबोटिक डॉग्स और मानवरहित जमीनी वाहनों का प्रदर्शन किया गया। सैपर स्काउट और ऐरावत-1000 जैसे मशीनी योद्धा आकर्षण का केंद्र रहे।
रोबोटिक डॉग जिन्हें म्यूल कहा जाता है कठिन रास्तों और मलबे के बीच जासूसी करने में सक्षम हैं। ये मशीनें बिना जान जोखिम में डाले दुश्मन के बंकरों का डेटा भेज सकती हैं।
ये रोबोटिक योद्धा कठिन परिस्थितियों में सैनिकों के लिए रसद पहुंचाने का काम भी करते हैं। इनके शामिल होने से भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सेना को बड़ी मदद मिलेगी।
सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि हम भविष्य की लड़ाई के लिए खुद को हर दिन बदल रहे हैं। इन संसाधनों का उपयोग मिलिट्री और सिविल दोनों ऑपरेशंस में किया जा सकता है।
वीरता पुरस्कार और सम्मान समारोह
परेड से पहले थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने वीरता पुरस्कार प्रदान कर जांबाजों का सम्मान किया। उन्होंने पांच शहीद सैनिकों को मरणोपरांत सेना मेडल वीरता पुरस्कार दिए।
सम्मानित होने वालों में सूबेदार मेजर पवन कुमार और हवलदार सुनील कुमार जैसे वीर शामिल थे। लांस नायक दिनेश कुमार और लांस नायक सुभाष कुमार को भी मरणोपरांत सम्मानित किया गया।
ऑपरेशन सिंदूर में अदम्य साहस दिखाने वाली 26 सैन्य यूनिट्स को विशेष साइटेशन प्रदान किए गए। परेड कमांडर के साथ परमवीर चक्र विजेताओं ने सलामी मंच का अभिवादन किया।
यह क्षण अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक था जब शहीदों के परिजनों ने पुरस्कार ग्रहण किए। पूरा महल रोड भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।
राजस्थान का शौर्य और योगदान
सेना प्रमुख ने अपने संबोधन में राजस्थान की वीर धरा को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना में राजस्थान का योगदान अतुलनीय और प्रेरणादायक है।
उन्होंने शैतान सिंह भाटी और अब्दुल हमीद जैसे वीरों का उल्लेख किया जो इसी मिट्टी की देन हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान की माटी में ही शौर्य और वीरता रची बसी है।
परेड के दौरान राजस्थान की सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिली। प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्य ने सैन्य शक्ति के साथ संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत किया।
नेपाल आर्मी बैंड की प्रस्तुति ने दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ संबंधों को और मजबूती दी। जयपुर के नागरिकों ने इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनकर सेना का उत्साह बढ़ाया।
भविष्य की सेना का संदेश
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना हर तरह की चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है। हम भविष्य की जरूरतों के अनुसार नई संरचनाएं और रेजिमेंट तैयार कर रहे हैं।
शक्ति रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसे उदाहरण सेना के आधुनिकीकरण को दर्शाते हैं। सेना अब कम्युनिकेशन और तकनीक को बेहतर करने पर विशेष जोर दे रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि जवानों के परिवारों का ख्याल रखना सेना की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। सरहद पर तैनात जवान तभी निश्चिंत रह सकता है जब उसका परिवार सुरक्षित हो।
आज की परेड ने यह संदेश दिया कि भारतीय सेना समय के साथ खुद को निरंतर बदल रही है। यह परेड भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भरता का एक जीवंत दस्तावेज है।