जनपक्ष फेलोशिप 2026: सहदेव चौधरी फाउंडेशन द्वारा जनपक्ष फेलोशिप प्रोग्राम 2026 का सफल आयोजन: नागरिक पत्रकारिता को मिली नई दिशा

राजस्थान में नागरिक पत्रकारिता को सशक्त बनाने के लिए जनपक्ष फेलोशिप 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें 25 युवाओं को आधुनिक पत्रकारिता, एआई और जमीनी रिपोर्टिंग के गुर सिखाए गए।

राजस्थान में नागरिक पत्रकारिता का नया अध्याय

जयपुर | राजस्थान में नागरिक पत्रकारिता को एक संगठित, नैतिक और जनहित आधारित दिशा देने के उद्देश्य से डॉ. सहदेव चौधरी फाउंडेशन द्वारा 'जनपक्ष फेलोशिप प्रोग्राम 2026' का शानदार आयोजन किया गया।

यह दो दिवसीय कार्यक्रम पत्रकारिता को केवल एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि लोकतंत्र और समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखने की वैचारिक पहल के रूप में सामने आया है। इस फेलोशिप के माध्यम से राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए युवाओं को आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों और तकनीकी बारीकियों से रूबरू कराया गया।

समापन सत्र में फर्स्ट इंडिया के सीईओ पवन अरोड़ा ने ai के खतरे और उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। अरोड़ा ने युवाओं को कहा कि समाज के वास्तविक और जीवंत मसलों को उठाएं और उनके समाधान तक पीछा करें. आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में आपको शानदार अवसर मिलेंगे. उन अवसरों को टूल की तरह काम लें. अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता को धारण करें. 

जनपक्ष की अवधारणा और कार्यक्रम का उद्देश्य

कार्यक्रम की शुरुआत में जनपक्ष की मूल अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि 'जनपक्ष' का विचार पत्रकारिता को सत्ता या विपक्ष के पारंपरिक खांचों से बाहर निकालकर सीधे जनता के पक्ष में खड़ा करना है।

फेलोशिप का मुख्य उद्देश्य ऐसे नागरिक पत्रकार तैयार करना है जो जमीनी सच्चाइयों को समझें, तथ्यों की जांच करें और नैतिक मूल्यों के साथ रिपोर्टिंग करें। इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पत्रकारिता का असली धर्म जनहित की रक्षा करना है।

पारदर्शी चयन प्रक्रिया और युवाओं का उत्साह

जनपक्ष फेलोशिप 2026 के लिए पूरे राजस्थान से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। एक गंभीर, पारदर्शी और बहु-स्तरीय साक्षात्कार प्रक्रिया के बाद केवल 25 फेलोज़ का चयन किया गया। चयन का मुख्य आधार प्रतिभागियों की सामाजिक समझ, संवेदनशीलता, नैतिक दृष्टिकोण और उनका जमीनी जुड़ाव रहा। इन चयनित फेलोज़ में पत्रकारिता के विद्यार्थियों के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय युवा भी शामिल थे।

तकनीकी सत्र: एआई और आधुनिक पत्रकारिता के गुर

कार्यक्रम के पहले दिन आईशिवएक्स (iShivX) कंपनी के संस्थापक शिव कुमार डीगवाल ने तकनीकी सत्र का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) मॉडल का उपयोग पत्रकारिता में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आप जो भी सोचें, उसे आईओटी मॉडल्स के साथ बना सकते हैं। उन्होंने एआई को प्रशिक्षित करने के तरीकों पर जोर देते हुए कहा कि यदि एआई को सही डेटा के साथ ट्रेन किया जाए, तो वह सटीक प्रतिक्रिया देता है।

डीगवाल ने डेटा वेरिफिकेशन टूल्स के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि इमेज, वीडियो और डेटा का उपयोग करते हुए कैसे सूचनाओं को सत्यापित किया जाना चाहिए। उन्होंने रिवर्स इमेज सर्च, वीडियो सर्च, फैक्ट चेक टूल्स और जनरेटिव एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जो आज की फेक न्यूज के दौर में पत्रकारों के लिए अनिवार्य हैं।

कॉरपोरेट मीडिया और संचार तंत्र पर चर्चा

मीडिया जगत के अनुभवी दिग्गज अनुराग भारद्वाज ने युवाओं को संबोधित करते हुए संचार तंत्र के महत्व और उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे एक प्रभावी संचार तंत्र समाज में बदलाव ला सकता है। इसके साथ ही, अन्य सत्रों में न्यूज रूम की कार्यप्रणाली, खबर के विचार से लेकर संपादकीय प्रक्रिया तक की व्यावहारिक समझ, और ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान स्रोतों से संवाद करने के कौशल सिखाए गए।

सोशल मीडिया के दौर में मोबाइल जर्नलिज्म (MOJO) की भूमिका पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इसमें इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब के एल्गोरिदम को समझने, वीडियो शूटिंग, एडिटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और कंटेंट के मोनेटाइजेशन (ब्रांडिंग और विज्ञापन) के बारे में विशेषज्ञों ने जानकारी दी।

मैदानी रिपोर्टिंग और फेलोज़ की प्रस्तुतियां

फेलोशिप के दूसरे दिन सभी फेलोज़ को वास्तविक जनहित के मुद्दों को कवर करने के लिए फील्ड में भेजा गया। फेलोज़ ने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर वीडियो रिपोर्ट तैयार कीं, जिनका बाद में विशेषज्ञों के पैनल द्वारा मूल्यांकन किया गया।

  • सुभाष सैनी (चौमूं): उन्होंने चौमूं क्षेत्र में ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हुए पुरानी और नई पीढ़ी के बीच के अंतर पर एक प्रभावी वीडियो प्रस्तुत किया।
  • नरेश कुमार (बाड़मेर-जैसलमेर): उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने, शिक्षा की कमी, आवागमन के साधनों के अभाव और पेयजल संकट जैसे मुद्दों को उठाया।
  • कृष्णपाल (सवाई माधोपुर): उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान की जमीनी हकीकत पर जनसंवाद का वीडियो प्रस्तुत किया।
  • विनम्र कूलवाल: उन्होंने प्रभावी ढंग से दिखाया कि कैसे प्रशासन द्वारा समस्याओं पर पर्दा डालने का प्रयास किया जाता है।
  • कमलेश सैन: उन्होंने सीमावर्ती इलाकों की स्थानीय जन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
  • बाबूलाल नागा (अजमेर): उन्होंने घुमंतू परिवारों के जीवन और उनकी चुनौतियों पर रिपोर्ट पेश की।
  • कार्तिक चौधरी (जयपुर): उन्होंने रोड टैक्स और अतिक्रमण के मामले को 'राइजिंग राजस्थान' के परिप्रेक्ष्य में जोड़ा।
  • कृतिका जेठवानी (हरिदेव जोशी पत्रकारिता विवि): उन्होंने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों और उनके द्वारा किए गए अपराधों के आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।
  • मधु मांझी: उन्होंने शहीद स्मारक, जयपुर से गणतंत्र दिवस की लाइव रिपोर्टिंग का प्रदर्शन किया।
  • पुरुषोत्तम शर्मा (बस्सी): उन्होंने ध्वजारोहण और ध्वज फहराने के तकनीकी अंतर पर एक ज्ञानवर्धक स्टोरी पेश की।
  • अश्विन देरंगा (उदयपुर): उन्होंने टीएसपी और आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को स्वर दिया।
  • अक्षिता शर्मा (हरिदेव जोशी विवि): उन्होंने मोबाइल जर्नलिज्म की बारीकियों पर एक ट्यूटोरियल वीडियो साझा किया।
  • लक्ष्यराज सिंह: उन्होंने युवा मन की स्थिति और वर्तमान हालातों पर रील के माध्यम से अपनी बात रखी।
  • मानसी राजपुरोहित (जालौर): उन्होंने देश के संविधान और उसके मूल्यों पर अपनी रील प्रस्तुत की।
  • भव्या सैनी (अपेक्स यूनिवर्सिटी): उन्होंने सांगानेर और शिप्रा पथ इलाके में कचरा प्रबंधन की खामियों को उजागर किया।
  • विष्णु जांगिड़: उन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर कश्मीर मुद्दे और आतंकवाद पर केंद्रित वीडियो बनाया।

विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन और निष्कर्ष

इन सभी रिपोर्ट्स का गहन मूल्यांकन वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप बीदावत, अनुराग भारद्वाज और शिव कुमार डीगवाल द्वारा किया गया। मूल्यांकन के दौरान कंटेंट की गुणवत्ता, मुद्दे की गहराई, प्रस्तुति की स्पष्टता और पत्रकार के बौद्धिक दृष्टिकोण पर विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों ने फेलोज़ को सुधार के सुझाव दिए और उनके साहस की सराहना की।

दो दिवसीय जनपक्ष फेलोशिप प्रोग्राम का निष्कर्ष यह रहा कि यह केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक वैचारिक यात्रा थी। जहाँ युवाओं को न केवल आधुनिक तकनीकी टूल्स से लैस किया गया, बल्कि उन्हें समाज के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह बनने की प्रेरणा भी दी गई। सहदेव चौधरी फाउंडेशन की यह पहल राजस्थान में भविष्य की पत्रकारिता के लिए एक मजबूत नींव रखने का काम करेगी।