सांवरिया सेठ मंदिर में दान का महा-रिकॉर्ड: मेवाड़ के श्रीसांवरिया सेठ मंदिर में आस्था का सैलाब, 6 दिनों की गिनती में निकले 35.40 करोड़ रुपये
चित्तौड़गढ़ के श्रीसांवरिया सेठ मंदिर में इस माह रिकॉर्ड तोड़ 35.40 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ है, जिसमें भारी मात्रा में सोना और चांदी भी शामिल है।
चित्तौड़गढ़ | मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कृष्णधाम श्रीसांवरिया सेठ मंदिर में एक बार फिर आस्था का सैलाब उमड़ा है। इस बार श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा ने मासिक दान भंडार के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। चित्तौड़गढ़ स्थित इस पावन धाम में पिछले 6 दिनों से चल रही दानपात्र की गिनती अब पूर्ण हो चुकी है और जो आंकड़े सामने आए हैं वे न केवल हैरान करने वाले हैं बल्कि मंदिर के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ रहे हैं। मंदिर मंडल के अनुसार भंडार और ऑनलाइन माध्यमों को मिलाकर इस बार कुल 35 करोड़ 40 लाख 93 हजार 313 रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ है।
6 चरणों में पूरी हुई दान की गिनती
श्रीसांवरिया सेठ के भंडार से निकली इस विशाल धनराशि को गिनने के लिए 150 से अधिक बैंक कर्मियों और मंदिर कर्मचारियों को लगाया गया था। मंदिर परिसर के सत्संग हॉल में कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में यह गिनती 6 दिनों तक चली। गिनती की शुरुआत 17 जनवरी को मंदिर मंडल के सीईओ और अध्यक्ष की मौजूदगी में हुई थी।
- पहले चरण में 10 करोड़ 25 लाख रुपये की गिनती हुई।
- दूसरे चरण में 5 करोड़ 54 लाख 25 हजार रुपये निकले।
- तीसरे चरण में 6 करोड़ 43 लाख 25 हजार रुपये की प्राप्ति हुई।
- चौथे और पांचवें चरण में क्रमशः 4.59 करोड़ और 1.78 करोड़ रुपये गिने गए।
- अंतिम छठे चरण में शेष राशि और भेंटकक्ष का हिसाब मिलाकर कुल आंकड़ा 35.40 करोड़ के पार पहुंच गया।
सोने और चांदी का भी लगा अंबार
नकदी के अलावा भक्तों ने दिल खोलकर सोना और चांदी भी अर्पित किया है। भंडार और भेंटकक्ष से कुल 592 ग्राम 780 मिलीग्राम सोना और 112 किलो 723 ग्राम चांदी प्राप्त हुई है। बाजार मूल्य के अनुसार इस सोने की कीमत लगभग 90 लाख रुपये और चांदी की कीमत करीब 2 करोड़ 80 लाख रुपये आंकी गई है।
भगवान को मानते हैं व्यापारिक साझेदार
श्रीसांवरिया सेठ मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा यह है कि यहां के भक्त भगवान को अपने व्यापार में पार्टनर यानी हिस्सेदार मानते हैं। जब भी भक्तों को अपने व्यापार या कृषि में लाभ होता है तो वे मन्नत के अनुसार लाभ का एक निश्चित हिस्सा सांवरिया सेठ के भंडार में समर्पित कर देते हैं। यही कारण है कि यहां दान का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस राशि का उपयोग जनहित के कार्यों और मंदिर के विकास हेतु किया जाएगा। आस्था और व्यापार के इस अनूठे संगम ने एक बार फिर मेवाड़ की पावन धरा को विश्व स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया है।