मुनाफे के चक्कर में सफेदपोश बेच रहे जमीर: युवा पीढ़ी के लिए घातक बन रहा है नशा, आसानी से उपलब्धता बन रही नुकसान में मददगार ,रानीवाड़ा भी बन रहा है बड़ा नशा केंद्र

युवा पीढ़ी के लिए घातक बन रहा है नशा, आसानी से उपलब्धता बन रही नुकसान में मददगार ,रानीवाड़ा भी बन रहा है बड़ा नशा केंद्र
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सफेदपोश मौत के सौदागरों का जमीर इतना मर चुका है कि इन्हें इस नशे से होने वाले नुकसान का पता होने के बावजूद धड़ल्ले से इस धंधे में  जुड़े हुए हैं । कहने को लोगो के सेवा का पर्याय माने जाने वाले इन दवा विक्रेताओं द्वारा महज रुपयों के चंद सिक्को की खनक सारे कायदों से किनारा किये हुए हैं। 

रानीवाड़ा |  दशकों से नशा मुक्त समाज की बाट जोह रहे समाजसेवियों के सकारात्मक प्रयास धूमिल होते नजर आ रहे हैं ।  

सरकार व सेवा संस्थाओं द्वारा तमाम तरह से जागरूक कार्यक्रमों ,व अभियानों के चलाने के बावजूद इस पर अंकुश लगाना तो दूर हर रोज नए युवा इसकी गिरफ्त में आकर अपना जीवन नरक बनाने पर आमादा है ।

हैरानी की बात यह है कि इस  घिनोने कार्य में समाज के भीतर ही मौजूद तथाकथित सफेदपोश तबका ही इसे बढ़ाने में शामिल हैं ।

अपनी औलादों के भविष्य को बनाने के लिए दूसरों के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर नशीली दवाएं बेच कर मोटा मुनाफा कमा कर बंगलो में ऐश फरमा रहे हैं ।

इन सफेदपोश मौत के सौदागरों का जमीर इतना मर चुका है कि इन्हें इस नशे से होने वाले नुकसान का पता होने के बावजूद धड़ल्ले से इस धंधे में  जुड़े हुए हैं ।

कहने को लोगो के सेवा का पर्याय माने जाने वाले इन दवा विक्रेताओं द्वारा महज रुपयों के चंद सिक्को की खनक सारे कायदों से किनारा किये हुए हैं। 

विभाग के आला अधिकारियों को इसकी तमाम जानकारी होने के बावजूद महज लाइजनिंग व रुतबे के आगे बौने साबित हो रहे हैं । जिससे कि उनके प्रयास  महज खानापूर्ति साबित हो कर रह गए हैं ।

आमजन में मामूली से समझे जाने वाले इस मामले की गम्भीरता भयावह साबित हो रही है । व आने वाली पीढ़ियों के नसों में जहर की जड़े गहरी होती जा रही है । 

दवाई की दुकानों पर खुले आम बिक रहा जहर

ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1945 के तहत सरकार द्वारा प्रदत्त दवा विक्रय एवं भंडारण लाइसेंस में केवल नियमानुसार दवाओं की बिक्री हेतु अनुमति प्रदान की जाती है ।

विभिन्न शेड्यूल की दवाइयों के पृथक नियमावली मौजूद है पर मोटे मुनाफे के व काली कमाई के लिए इन दवा विक्रेताओं ने जीवनउपयोगी दवाइयों की आड़ में नशीले कारोबार में अपनी जड़ें जमा ली है ।

खास तौर पर इन दवाओं का सेवन युवा पीढ़ी के लिए घातक सिद्ध हो रहा है । कम समय मे लाखो की कमाई करने की मंशा पाले ये सफेदपोश व्यापारी समाज सेवा का ढोंग रचा खुले आम मौत का व्यापार करने में लगे हुए हैं।

इन दवाओं का सेवन घातक

सूत्रों के अनुसार मेडिकल की दुकानों पर दवाईयों की आड़ में कायदे को धता बता कर कई प्रतिबंध दवाइयों का बेचान धड़ल्ले से किया जा रहा है ।  इन दवाओं में टरमाडोल एसआर,  अल्प्राजोलम ,क्लोनाजापाम , कोडीन सिरप का आसानी से बेचान होने के साथ साथ मानसिक रोगों में उपयोगी एडनोक एन , एडिटैक्स एन जैसी उच्च प्रतिबंधित दवाइयों का उपयोग थकान दूर करने के नाम पर आसानी से नशे के रूप में बेची जा रही है ।

नारकोटिक्स के तहत आने वाली इन दवाइयों का उपयोग विशेषज्ञ द्वारा विशेष परिस्थितियों में किया जाना होता है । लेकिन नशा गिरोह के द्वारा अपने खास मेडिकल पर नशे के आदि हो चुके खास ग्राहकों के लिए यह आसानी से उपलब्ध हो रही है। 

बड़ा गिरोह, चुनींदा मेडिकल पर मिलने की मोनोपोली

ऐसा नही है कि हर दवाई की दुकान पर ये दवाइया मिल रही है ।इसके लिए भी विशेष  लोगो का ही दबदबा है  नशा गिरोह के होलसेलर तमाम बंदिशों के बावजूद अपने चहेते व भरोसेमंद गिने जाने वाले खास दवा विक्रेताओं को ही माल देते हैं ।

जिससे कि मुनाफे की रकम कायम रहे । व मार्किट में गोपनीयता व कम्पीटिशन का लेवल मेंटेन किया जा सके । विशेष दवा दुकानों पर माल की सप्लाई व उन्ही दुकानों से  ग्राहकों को आसानी से नशा उपलब्ध होने के कारण विभाग इन्हें रंगे हाथों पकड़ने में असमर्थ  है ऐसे में कार्यवाही के अभाव में यह कारोबार फलफूल रहा है ।

सांचोर में  कार्यवाही ,यहाँ विभाग ने आंखे मूंदी

जिला स्तरीय ओषधी विभाग की ढुलमुल कार्यप्रणाली से जिले में नशा खोरी का धंधा फल फूल रहा है । सांचोर कस्बे में केंद्रीय नोरकोटिक्स विभाग की टीम द्वारा की गई कार्यवाही में यह साबित हुआ कि जिला ओषधी विभाग के जिम्मेदार अपने कर्त्तव्य के प्रति कितने गम्भीर है ।

सांचोर के बाद वर्तमान में रानीवाड़ा भी इस अवैध नशे का बड़ा केंद्र बना हुआ है । समय समय पर जाँच की खानापूर्ति करने आने वाले अधिकारियों की नाक के नीचे यह नशा बिक रहा है पर रसूखदार मेडिकल संचालको व भृस्टाचार के दम पर कोई कार्यवाही नही हो पा रही ऐसे में युवा पीढ़ी नशे के दलदल में आकंठ डूब रही है ।

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