पूर्व आयुक्त शिवपाल सिंह निलंबित: सिरोही: राम झरोखा मंदिर पट्टा प्रकरण में पूर्व आयुक्त शिवपाल सिंह राजपुरोहित निलंबित, राज्य सरकार की बड़ी कार्रवाई
सिरोही के राम झरोखा मंदिर मामले में अनियमित पट्टे जारी करने के आरोप में पूर्व आयुक्त शिवपाल सिंह राजपुरोहित को निलंबित कर दिया गया है। स्वायत्त शासन विभाग ने अनुशासनहीनता के चलते यह आदेश जारी किया है।
सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले से एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने सिरोही नगर परिषद के पूर्व आयुक्त शिवपाल सिंह राजपुरोहित को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राम झरोखा मंदिर मामले में अनियमित रूप से पट्टे जारी करने के गंभीर आरोपों के बाद की गई है। इस आदेश के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
निलंबन की मुख्य वजह और आरोप
उल्लेखनीय है कि शिवपाल सिंह राजपुरोहित, जो माउंट आबू नगर पालिका और सिरोही नगर परिषद में आयुक्त के पद पर कार्यरत रह चुके हैं, पिछले कुछ समय से 'एपीओ' (पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा) चल रहे थे। राम झरोखा मंदिर की भूमि से संबंधित पट्टों के वितरण में पाई गई गंभीर खामियों और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी। प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं सही पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत निलंबन का निर्णय लिया गया।
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने शनिवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राजपुरोहित के खिलाफ चल रही जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उन्हें निलंबित करना आवश्यक था। सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यालय अब जयपुर रहेगा
निलंबन की अवधि के दौरान, शिवपाल सिंह राजपुरोहित का मुख्यालय स्वायत्त शासन विभाग निदेशालय, जयपुर तय किया गया है। नियमानुसार, उन्हें बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। यह कदम राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें सरकारी संपत्तियों और धार्मिक ट्रस्टों की भूमि के दुरुपयोग को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है।
विवादों से रहा है पुराना नाता
सिरोही नगर परिषद में कार्यकाल के दौरान राजपुरोहित कई बार चर्चाओं में रहे हैं। विशेषकर राम झरोखा मंदिर के पट्टों का मामला स्थानीय स्तर पर काफी गरमाया हुआ था। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। अब निलंबन के बाद विभाग इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच करेगा ताकि अन्य दोषियों की भी पहचान की जा सके और सरकारी नियमों की अवहेलना करने वालों पर नकेल कसी जा सके।