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अर्जुन रामपाल का फिल्मी सफर: अर्जुन रामपाल की संघर्ष गाथा: 14 फ्लॉप फिल्में और तंगहाली के दौर से निकलकर कैसे बने नेशनल अवॉर्ड विनर एक्टर

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अर्जुन रामपाल ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 14 लगातार फ्लॉप फिल्मों और घर का किराया न दे पाने की स्थिति से लेकर नेशनल अवॉर्ड जीतने तक, उनकी कहानी प्रेरणादायक है।

HIGHLIGHTS

  • अर्जुन रामपाल ने करियर की शुरुआत में लगातार 14 फ्लॉप फिल्में दी थीं।
  • आर्थिक तंगी के कारण वे अपने मुंबई स्थित घर का किराया तक नहीं भर पा रहे थे।
  • 'डॉन' और 'ओम शांति ओम' में विलेन के किरदारों ने उनके डूबते करियर को नई पहचान दी।
  • फिल्म 'रॉक ऑन' के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा नेशनल फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
arjun rampal career struggle flops to national award success

मुंबई | अर्जुन रामपाल आज बॉलीवुड के एक प्रतिष्ठित नाम हैं, लेकिन उनकी सफलता की चमक के पीछे संघर्षों का एक लंबा और अंधेरा दौर रहा है। मॉडलिंग की चकाचौंध से फिल्मी दुनिया के ऊबड़-खाबड़ रास्तों तक का उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 17 साल की उम्र में जब उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह लड़का एक दिन भारतीय सिनेमा का एक गंभीर अभिनेता बनेगा। 20 साल की उम्र तक वे एक सुपरमॉडल बन चुके थे, लेकिन फिल्मों में अपनी जगह बनाना उनके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ।

जबलपुर की मिट्टी और सेना का अनुशासन

अर्जुन रामपाल का जन्म 26 नवंबर 1972 को मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। उनके पिता अमरजीत रामपाल भारतीय सेना में एक सम्मानित अधिकारी थे, जबकि उनकी मां ग्वेन रामपाल एक समर्पित स्कूल शिक्षिका थीं। सेना के कड़े अनुशासन और मां के दिए गए संस्कारों ने अर्जुन के व्यक्तित्व की नींव रखी। उनके बचपन का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली में बीता, जहाँ उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। सेना के माहौल में पले-बढ़े होने के कारण उनमें बचपन से ही समय की पाबंदी और जिम्मेदारी की भावना कूट-कूट कर भरी थी।

दिल्ली विश्वविद्यालय और मॉडलिंग की शुरुआत

अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अर्जुन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में दाखिला लिया। यहाँ उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। कॉलेज के दिनों में ही उनकी आकर्षक पर्सनालिटी और शानदार लुक्स की चर्चा होने लगी थी। हालांकि, शुरुआत में उनका झुकाव मॉडलिंग की तरफ नहीं था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात पूर्व मिस इंडिया और मशहूर मॉडल मेहर जेसिया से हुई। मेहर ने अर्जुन की क्षमता को पहचाना और उन्हें मॉडलिंग की दुनिया से रूबरू कराया। मेहर की प्रेरणा से ही अर्जुन ने फैशन की दुनिया में कदम रखा और जल्द ही वे भारत के सबसे सफल पुरुष मॉडल्स में से एक बन गए।

शादी और फिल्मी करियर की दहलीज

1998 में अर्जुन रामपाल ने मेहर जेसिया से शादी की। मॉडलिंग में अपार सफलता पाने के बाद बॉलीवुड के निर्देशकों की नजर उन पर पड़ने लगी। मशहूर सिनेमैटोग्राफर अशोक मेहता ने उन्हें अपनी फिल्म 'मोक्ष' के लिए चुना। इस फिल्म में उन्हें उस दौर की सुपरस्टार मनीषा कोइराला के साथ काम करने का मौका मिला। हालांकि 'मोक्ष' की शूटिंग 2001 में शुरू हुई थी, लेकिन इसे रिलीज होने में करीब छह साल लग गए। इस बीच निर्देशक राजीव राय ने उन्हें एक विज्ञापन में देखा और अपनी फिल्म 'प्यार इश्क और मोहब्बत' में कास्ट कर लिया। यह फिल्म 'मोक्ष' से पहले रिलीज हुई, जिसने अर्जुन को बड़े पर्दे पर पेश किया।

आर्थिक तंगी और किराए के लिए संघर्ष

अर्जुन रामपाल ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वे 'मोक्ष' की शूटिंग कर रहे थे, तब उन्हें अपने अभिनय पर संदेह होने लगा था। उन्होंने खुद को स्क्रीन पर देखा और उन्हें लगा कि वे बहुत खराब अभिनय कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग छोड़ने का फैसला कर लिया, लेकिन फिल्मों की सफलता दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी। उस दौरान वे मुंबई के अंधेरी स्थित सेवन बंगलों में एक किराए के मकान में रहते थे। उनके पास आय का कोई जरिया नहीं था और वे अपने घर का किराया तक नहीं दे पाते थे। अर्जुन बताते हैं कि उनके मकान मालिक एक बहुत ही दयालु सरदारजी थे, जो हर महीने की पहली तारीख को आते और अर्जुन की स्थिति समझकर बिना पैसे लिए वापस चले जाते थे।

14 फ्लॉप फिल्मों का पहाड़

अर्जुन रामपाल के करियर में एक ऐसा समय आया जब उनकी एक के बाद एक 14 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। इनमें 'दीवानापन', 'तहजीब', 'दिल है तुम्हारा', 'दिल का रिश्ता', 'असंभव', 'वादा', 'आंखें', 'हमको तुमसे प्यार है', 'यकीन', 'डरना जरूरी है', 'ऐलान' और 'एक अजनबी' जैसी फिल्में शामिल थीं। फिल्म 'दिल है तुम्हारा' के संगीत को काफी पसंद किया गया, लेकिन व्यावसायिक रूप से यह फिल्म सफल नहीं रही। आलोचकों ने उन्हें केवल एक 'स्टाइलिश चेहरा' करार दे दिया था और उन्हें एक गंभीर अभिनेता के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा था। लगातार मिल रही असफलताओं ने उनके मनोबल को तोड़ दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

विलेन बनकर मिली नई पहचान

जब हीरो के तौर पर अर्जुन का जादू नहीं चल रहा था, तब उन्होंने अपनी छवि बदलने का फैसला किया। शाहरुख खान की फिल्म 'डॉन' (2006) में उन्होंने जसजीत का किरदार निभाया। इस निगेटिव शेड वाले रोल में दर्शकों ने उन्हें खूब पसंद किया। इसके बाद 2007 में आई 'ओम शांति ओम' में उनके द्वारा निभाए गए खलनायक मुकेश 'मिकी' मेहरा के किरदार ने तहलका मचा दिया। उनकी डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेजेंस ने यह साबित कर दिया कि वे केवल एक मॉडल नहीं बल्कि एक मंझे हुए अभिनेता हैं। इन दो फिल्मों ने उनके करियर को पुनर्जीवित कर दिया और उन्हें बॉलीवुड का एक स्टाइलिश विलेन बना दिया।

'रॉक ऑन' और नेशनल अवॉर्ड का गौरव

अर्जुन रामपाल के करियर का सबसे सुनहरा अध्याय 2008 में आई फिल्म 'रॉक ऑन' के साथ शुरू हुआ। इस फिल्म में उन्होंने जोसेफ मस्कारेन्हास का किरदार निभाया, जो एक गिटारवादक की भूमिका थी। इस फिल्म में उनके अभिनय की गहराई ने सबको हैरान कर दिया। फिल्म न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफल रही, बल्कि अर्जुन को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award) भी मिला। यह पुरस्कार उनके संघर्षों का सबसे बड़ा इनाम था। इसके बाद उन्होंने 'राजनीति' और 'हाउसफुल' जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया और अपनी जगह पक्की की।

OTT की दुनिया और 'धुरंधर' की सफलता

बदलते समय के साथ अर्जुन ने ओटीटी प्लेटफॉर्म की ओर रुख किया। 'द फाइनल कॉल' और 'लंदन फाइल्स' जैसी वेब सीरीज में उनके काम को काफी सराहा गया। हाल ही में फिल्म 'धुरंधर' में उनके मेजर इकबाल के किरदार ने एक बार फिर दर्शकों का दिल जीत लिया है। इस फिल्म में उन्होंने उस दर्द और गुस्से को पर्दे पर उतारा है, जिसे वे सालों से अपने अंदर दबाए हुए थे। 26/11 के मुंबई हमलों के दौरान अर्जुन खुद मुंबई के एक होटल में मौजूद थे और उन्होंने उस भयावहता को अपनी आंखों से देखा था। वह दिन उनका 36वां जन्मदिन था, जो एक डरावने सपने में बदल गया था। अर्जुन कहते हैं कि 'धुरंधर' के जरिए उन्हें उस दिन के अपने गुस्से को व्यक्त करने का मौका मिला। आज अर्जुन रामपाल एक ऐसे मुकाम पर हैं जहाँ वे अपनी शर्तों पर काम करते हैं और हर किरदार में अपनी छाप छोड़ते हैं।

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