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राजनीति

वित्तीय कुप्रबंधन पर जताई गहरी चिंता: गहलोत का CM शर्मा को पत्र: भुगतान ठप, वित्तीय संकट

Pradeep Beedawat

पूर्व CM गहलोत ने CM भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर सरकारी भुगतान ठप होने और गंभीर वित्तीय संकट पर गहरी चिंता जताई है।

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HIGHLIGHTS

  • पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राजस्थान में भुगतान प्रणाली ठप होने पर सीएम भजनलाल शर्मा को 'अति आवश्यक' पत्र लिखा।
  • आरजीएचएस, चिरंजीवी दुर्घटना बीमा, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं के भुगतान महीनों से अटके हुए हैं।
  • राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्थिति का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकार का उल्लंघन माना है।
  • निर्माण कार्य रुक गए हैं, और छोटे ठेकेदारों को भुगतान के लिए अखबारों में विज्ञापन देने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
ashok gehlot writes to cm bhajanlal sharma on rajasthan financial crisis

जयपुर | राजस्थान में सरकारी भुगतान प्रणाली के ठप होने से उत्पन्न गंभीर स्थिति पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक 'अति आवश्यक' पत्र लिखकर राज्य में व्याप्त वित्तीय संकट और प्रशासनिक उदासीनता की ओर तत्काल ध्यान आकर्षित किया है।

गंभीर वित्तीय संकट पर गहलोत की चिंता

 गहलोत ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह समस्या किसी एक विभाग या योजना तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी, पेंशनभोगी, अस्पताल, दवा विक्रेता और छोटे ठेकेदार सहित समाज का हर वर्ग आज अपने जायज भुगतान के लिए भटक रहा है।

उन्होंने इस स्थिति को राज्य के इतिहास में वित्तीय कुप्रबंधन का एक अभूतपूर्व और चिंताजनक मामला बताया है। गहलोत ने मुख्यमंत्री से इस अनावश्यक संकट से प्रदेशवासियों को राहत दिलाने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाने का आग्रह किया है।

"प्रदेश के इतिहास में वित्तीय कुप्रबंधन का ऐसा स्वरूप पहले कभी नहीं देखा गया।"

स्वास्थ्य योजनाओं पर सबसे बड़ा असर

पत्र में राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) की गंभीर स्थिति पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना के तहत निजी अस्पतालों, डायग्नोस्टिक सेंटरों और दवा विक्रेताओं का करोड़ों रुपये का भुगतान कई महीनों से अटका हुआ है।

इस विकट स्थिति का संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। आयोग ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया।

भुगतान न होने के कारण कई बड़े अस्पतालों ने योजना के तहत सेवाएं सीमित करने या सरकार के साथ हुए एमओयू को समाप्त करने तक की चेतावनी दे डाली है।

इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। कैशलेस इलाज का दावा करने वाली इस योजना में भी कर्मचारियों और पेंशनरों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से पैसे जमा करवाने पड़ रहे हैं।

बीमा और पेंशन योजनाओं का बुरा हाल

मुख्यमंत्री चिरंजीवी/आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना की स्थिति भी उतनी ही चिंताजनक है। इस योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता राशि मिलती है।

जानकारी के अनुसार, सैकड़ों प्रकरणों में दावे स्वीकृत होने के बावजूद पीड़ित परिवारों को महीनों से भुगतान नहीं मिल पाया है। गहलोत ने इसे सरकार की घोर असंवेदनहीनता करार दिया।

राज्य के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। जीपीएफ, समूह बीमा, ग्रेच्युटी और अर्जित अवकाश (पीएल) जैसी उनकी अपनी जमा पूंजी का भुगतान भी रिटायरमेंट के कई महीनों बाद तक नहीं हो रहा है।

इसके अतिरिक्त, प्रदेश के कई जिलों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी महीनों से लंबित चल रही है, जिससे वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशनभोगियों का जीवनयापन मुश्किल हो गया है।

निर्माण कार्य ठप, ठेकेदार परेशान

ट्रेजरी से पास हो चुके बिलों का भुगतान न होने का सीधा असर राज्य के विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है। सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े काम ठप हो गए हैं।

भुगतान संकट इतना गहरा गया है कि छोटे-छोटे ठेकेदारों को अपने वाजिब भुगतान के लिए अखबारों में विज्ञापन देकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना पड़ रहा है।

इस संकट के कारण हजारों श्रमिकों और छोटे उद्यमियों की आजीविका सीधे तौर पर खतरे में आ गई है, जिससे आर्थिक चक्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

गहलोत ने पत्र के अंत में कहा कि यह संकट केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि यह लाखों परिवारों की आजीविका, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस विषय की गंभीरता को समझते हुए प्रदेशवासियों को राहत देने के लिए तत्काल आवश्यक निर्णय लेंगे।

*Edit with Google AI Studio

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