बाड़मेर | राजस्थान के बाड़मेर जिले में आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों ने रफ्तार पकड़ ली है। जिला परिषद के सभागार में बुधवार को तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई। यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से फील्ड ट्रेनर्स के लिए आयोजित किया जा रहा है।
जनगणना 2027: बाड़मेर में ट्रेनिंग शुरू: बाड़मेर में जनगणना 2027 की भव्य तैयारी: फील्ड ट्रेनर्स की तीन दिवसीय ट्रेनिंग शुरू, एडीएम ने दी लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी
बाड़मेर जिला परिषद में जनगणना 2027 के पहले चरण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत ने फील्ड ट्रेनर्स को पूरी निष्ठा के साथ काम करने और प्रगणकों को सटीक जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।
HIGHLIGHTS
- बाड़मेर जिला परिषद में जनगणना 2027 के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का सफल आगाज हुआ।
- एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत ने फील्ड ट्रेनर्स को जनगणना प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी करार दिया।
- प्रशिक्षण के पहले चरण में 25 फील्ड ट्रेनर्स को मकान सूचीकरण और गणना की तकनीक सिखाई जा रही है।
- 1 मई से 15 मई 2026 के बीच प्रगणकों और सुपरवाइजरों को जमीनी स्तर पर ट्रेनिंग दी जाएगी।
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प्रशिक्षण का उद्देश्य और मुख्य अतिथि
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला जनगणना अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) राजेंद्र सिंह चांदावत ने की। उनके साथ बाड़मेर के उपखंड अधिकारी (एसडीएम) यशार्थ शेखर भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनगणना के पहले चरण को त्रुटिहीन बनाना है। पहले चरण के अंतर्गत मकानों के सूचीकरण और मकान गणना का कार्य किया जाना है। इसमें कुल 25 फील्ड ट्रेनर्स को गहन तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
एडीएम की सख्त चेतावनी
एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि फील्ड ट्रेनर्स इस पूरी प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि मास्टर ट्रेनर से जानकारी लेने में कोई कमी रह गई, तो इसका असर पूरे डेटा पर पड़ेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि हर दिशा-निर्देश को बारीकी से समझें। फील्ड ट्रेनर्स की जिम्मेदारी है कि वे प्रगणकों और सुपरवाइजरों तक सटीक जानकारी पहुंचाएं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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एसडीएम यशार्थ शेखर का संबोधन
बाड़मेर एसडीएम यशार्थ शेखर ने भी प्रशिक्षण सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि फील्ड ट्रेनर को अपने पद की गरिमा को समझना चाहिए। उन्होंने अनुभव और विवेक के साथ जनगणना-2027 के दायित्वों को निभाने की सलाह दी। एसडीएम ने समयबद्धता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण निष्ठा के साथ पूरा करना अनिवार्य है। इसमें किसी भी प्रकार का विलंब पूरी प्रक्रिया को बाधित कर सकता है।
प्रशिक्षण में शामिल विभिन्न क्षेत्र
इस द्वितीय बैच के प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न हिस्सों से ट्रेनर्स आए हैं। इसमें तहसील बाड़मेर, बायतु, बाड़मेर ग्रामीण और बाटाडू के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके अलावा चौहटन तहसील, नगर परिषद बाड़मेर और नगर पालिका चौहटन के ट्रेनर्स भी भाग ले रहे हैं। यह विविध प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है कि जिले के हर कोने में जनगणना का कार्य सुचारू रूप से चलेगा। बाड़मेर जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले जिले के लिए यह प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है।
मास्टर ट्रेनर्स द्वारा तकनीकी जानकारी
प्रशिक्षण के पहले दिन मास्टर ट्रेनर भगवानदास बारूपाल ने सत्र की शुरुआत की। उनके साथ कान सिंह खारा ने जनगणना के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि जनगणना अधिनियम के तहत कौन-कौन से अधिकार और कर्तव्य तय किए गए हैं। प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण देने की सही विधि के बारे में भी जानकारी दी गई। यह सुनिश्चित किया गया कि ट्रेनर्स को फील्ड में आने वाली समस्याओं का समाधान पता हो।
डिजिटल जनगणना और जीओ टैगिंग
इस बार की जनगणना में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान एचएलबी (Enumeration Block) सीमाओं की जीओ टैगिंग पर विशेष सत्र हुआ। ट्रेनर्स को सिखाया गया कि मानचित्र कैसे तैयार किए जाते हैं। नजरी नक्शा तैयार करने की विस्तृत जानकारी भी उपलब्ध करवाई गई। डिजिटल मानचित्रों के माध्यम से गणना कार्य में पारदर्शिता और सटीकता आने की उम्मीद है। यह आधुनिक तकनीक भविष्य की योजनाएं बनाने में सरकार की मदद करेगी।
आगामी कार्ययोजना और समय सारणी
आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के उप निदेशक डॉ. के.बी. खंडेलवाल ने भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि ये फील्ड ट्रेनर्स यहां से प्रशिक्षित होकर अपने-अपने क्षेत्रों में जाएंगे। इसके बाद 1 मई से 15 मई 2026 तक समस्त चार्ज स्तरों पर ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान प्रगणकों (Enumerators) और सुपरवाइजर्स को जमीनी काम के लिए तैयार किया जाएगा। यह चरणबद्ध प्रक्रिया डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन की गई है।
निगरानी और फीडबैक तंत्र
जिला समन्वयक दीपक सिराधना ने बताया कि पूरी ट्रेनिंग की निगरानी डिजिटल माध्यम से हो रही है। इसके लिए सीएमएमएस पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। पोर्टल पर उपलब्ध प्रशिक्षण डैशबोर्ड के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। केवल डिजिटल ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी बैचों की निगरानी की जा रही है। प्रशिक्षण ले रहे प्रतिभागियों से फीडबैक भी लिया जा रहा है ताकि सुधार की गुंजाइश बनी रहे।
उपस्थित अधिकारी और कर्मचारी
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला जनगणना सेल की पूरी टीम सक्रिय रही। सहायक सांख्यिकी अधिकारी कैलाश ओझा और जयप्रकाश कुमावत ने व्यवस्थाएं संभालीं। अविनाश वर्मा, महेश सोनवाल और संगणक विक्रम पन्नू ने भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया। मयंक जोशी सहित अन्य कर्मचारी भी इस दौरान उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में जनगणना कार्य को सफल बनाने का संकल्प लिया।
जनगणना का महत्व
जनगणना केवल सिरों की गिनती नहीं है, बल्कि यह विकास का आधार है। इसी डेटा के आधार पर आगामी दशकों की सरकारी योजनाएं तैयार होती हैं। स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों का निर्माण इसी जनसंख्या डेटा पर निर्भर करता है। बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिले के लिए सटीक जनगणना सामरिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। प्रशासनिक अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि यह ट्रेनिंग सत्र जिले में एक आदर्श व्यवस्था स्थापित करेगा।
निष्कर्ष
बाड़मेर प्रशासन इस बार जनगणना को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहा है। तकनीक और अनुशासन के संगम से इस कार्य को पूरा करने की योजना है। फील्ड ट्रेनर्स को दी जा रही यह शिक्षा आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगी। अब देखना यह है कि 2026 में जब प्रगणक घर-घर पहुंचेंगे, तो यह प्रशिक्षण कितना प्रभावी साबित होता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि उनका लक्ष्य 'शून्य त्रुटि' (Zero Error) जनगणना है।
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