बोधगया | बिहार के पर्यटन मानचित्र पर जल्द ही एक नया और बेहद आकर्षक अध्याय जुड़ने वाला है। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बोधगया में अब पर्यटकों को सिर्फ आध्यात्मिक शांति ही नहीं, बल्कि दुनिया के सात अजूबों के दीदार का मौका भी मिलेगा।
बिहार सरकार बोधगया में '7 वंडर्स ऑफ द वर्ल्ड' पार्क का निर्माण करा रही है। यह पार्क न केवल बिहार, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक बड़ा केंद्र बनने वाला है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए बोधगया के सिलौजा गांव को चुना गया है। यहां लगभग 40 एकड़ की विशाल भूमि पर इस पार्क का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
बोधगया में दुनिया के 7 अजूबे: बिहार के बोधगया में बनेगा '7 वंडर्स ऑफ द वर्ल्ड' पार्क, 14 करोड़ की लागत से दिखेंगे दुनिया के सात अजूबे
बिहार के बोधगया में 14 करोड़ की लागत से 7 वंडर्स ऑफ द वर्ल्ड पार्क का निर्माण हो रहा है, जहां पर्यटक एक ही जगह पर दुनिया के सातों अजूबों का दीदार कर सकेंगे।
HIGHLIGHTS
- बोधगया के सिलौजा गांव में 40 एकड़ जमीन पर बन रहा है भव्य 7 वंडर्स पार्क।
- इस प्रोजेक्ट पर बिहार सरकार और संबंधित विभाग 14 करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं।
- मई 2026 तक पार्क का निर्माण पूरा होने की उम्मीद, पर्यटकों को मिलेगी नई सौगात।
- ताजमहल, चीन की दीवार और गीजा के पिरामिड जैसे अजूबे एक ही जगह दिखेंगे।
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14 करोड़ की लागत और भव्यता
इस भव्य पार्क के निर्माण में कुल 14 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य है कि बोधगया आने वाले विदेशी पर्यटकों को एक ही स्थान पर वैश्विक धरोहरों की झलक मिल सके।
पार्क के निर्माण के लिए आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। ताकि ये अजूबे बिल्कुल असली और प्रभावशाली दिखाई दें।
मई 2026 तक इस पार्क का निर्माण कार्य पूरी तरह से संपन्न होने की उम्मीद जताई गई है। इसके बाद इसे आम जनता और पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
एक साथ दिखेंगे दुनिया के सात अजूबे
इस पार्क की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां दुनिया के सात सबसे प्रसिद्ध स्मारकों की प्रतिकृतियां (Replica) तैयार की जा रही हैं। इसमें भारत का गौरव 'ताजमहल' सबसे प्रमुख होगा।
इसके अलावा, चीन की विशाल दीवार (Great Wall of China) का अनुभव भी पर्यटक यहीं ले सकेंगे। मिस्र के रहस्यमयी 'गीजा के पिरामिड' भी यहां आकर्षण का केंद्र होंगे।
रोम का कोलोसियम, पेरू का माचू पिच्चू और जॉर्डन का ऐतिहासिक शहर 'पेट्रा' भी इस पार्क की शोभा बढ़ाएंगे। साथ ही ब्राजील के 'क्राइस्ट द रिडीमर' की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
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पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
बोधगया पहले से ही भगवान बुद्ध की ज्ञान स्थली के रूप में दुनिया भर में मशहूर है। हर साल यहां लाखों की संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी और पर्यटक आते हैं।
नए 7 वंडर्स पार्क के बनने से यहां आने वाले पर्यटकों के रुकने की अवधि बढ़ेगी। इससे स्थानीय होटलों, गाइडों और परिवहन सेवाओं को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचेगा।
इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। पार्क के रखरखाव, सुरक्षा और टिकट काउंटर जैसे कार्यों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सिलौजा गांव की बदलेगी तस्वीर
बोधगया के पास स्थित सिलौजा गांव अब विकास की नई राह पर है। 40 एकड़ में फैले इस पार्क की वजह से गांव के आसपास के बुनियादी ढांचे में भी सुधार होगा।
पार्क तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़कों और रोशनी की व्यवस्था की जा रही है। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा बल्कि गांव की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी।
प्रशासन का मानना है कि यह पार्क बिहार में 'इको-टूरिज्म' और 'मनोरंजन पर्यटन' को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। पर्यटकों के लिए यहां खान-पान और विश्राम की भी विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी।
मई 2026 का इंतजार
पार्क का निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। मई 2026 का महीना बिहार के पर्यटन इतिहास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
इस पार्क के शुरू होते ही बोधगया जाने वाले लोगों की सूची में एक और शानदार डेस्टिनेशन जुड़ जाएगा। अब लोगों को दुनिया के अजूबे देखने के लिए सात अलग-अलग देशों की यात्रा नहीं करनी होगी।
बिहार सरकार की यह पहल राज्य की छवि को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करेगी। यह पार्क शिक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होगा, जहां बच्चे दुनिया की महान विरासतों को करीब से देख पाएंगे।
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