बीकानेर | क्षत्रिय सभा बीकानेर द्वारा आयोजित निःशुल्क आत्मरक्षा एवं साफा प्रशिक्षण शिविर का समापन समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आत्मरक्षा में निपुण बनाने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत, विशेषकर साफा बांधने की कला को जीवित रखना था।
संस्कृति और सुरक्षा का संगम: बीकानेर: साफा और आत्मरक्षा शिविर में युवाओं ने दिखाया हुनर
बीकानेर में क्षत्रिय सभा के शिविर में युवाओं ने आत्मरक्षा के गुर और पारंपरिक साफा बांधने की कला सीखी।
HIGHLIGHTS
- क्षत्रिय सभा द्वारा बीकानेर में निःशुल्क आत्मरक्षा एवं साफा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
- कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
- लगभग 70 प्रतिभागियों ने शिविर में सीखे गए आत्मरक्षा कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
- शिविर का उद्देश्य युवाओं में संस्कृति संरक्षण और आत्मरक्षा को बढ़ावा देना है।
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संस्कृति और सुरक्षा का संगम
कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सीखी हुई विद्या जीवन में हमेशा काम आती है।
सीखने की कोई उम्र नहीं होती। यदि हम आत्मरक्षा के गुर सीखें और विलुप्त होती साफा बांधने की कला को आत्मसात करें, तो यह समय का सर्वोत्तम सदुपयोग होगा।
उन्होंने इस पहल के लिए क्षत्रिय सभा की सराहना की, जो विगत आठ वर्षों से लगातार ऐसे शिविरों का आयोजन कर रही है।
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विशिष्ट अतिथि संत रामेश्वरानंद महाराज ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को सनातन संस्कृति के आदर्शों पर चलने और शिक्षा के साथ संस्कार ग्रहण करने का संदेश दिया।
युवाओं ने दिखाया कौशल का प्रदर्शन
यह निःशुल्क ग्रीष्मकालीन शिविर 24 जून से श्री आशापुरा कलेक्शन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा था।
समापन समारोह में, लगभग 70 आत्मरक्षा प्रशिक्षणार्थियों ने अपने सीखे हुए कौशल का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
वहीं, साफा प्रशिक्षण के प्रतिभागियों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने मंच पर अतिथियों के सामने एक-दूसरे के सिर पर विभिन्न पारंपरिक शैलियों में साफा बांधकर अपनी दक्षता दिखाई।
उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम के अंत में, क्षत्रिय सभा के अध्यक्ष करण प्रताप सिंह सिसोदिया ने मुख्य अतिथियों के साथ मिलकर सभी प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों को प्रतीक चिन्ह एवं सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया। यह शिविर युवाओं के लिए शारीरिक, मानसिक और सांस्कृतिक रूप से खुद को सशक्त बनाने का एक बेहतरीन अवसर साबित हुआ।
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