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भारत

कच्चे तेल में आग!: ईरान-अमेरिका तनाव से तेल महंगा, 100 डॉलर के पार जाएगा भाव?

बलजीत सिंह शेखावत

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते समुद्री हमलों ने कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे कीमतों के 100 डॉलर तक जाने की आशंका है।

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HIGHLIGHTS

  • मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।
  • ब्रेंट क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के पार, जल्द 100 डॉलर पहुंचने की आशंका है।
  • होरमुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हमलों से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
  • OPEC+ ने अक्टूबर के लिए अपनी तेल उत्पादन नीति में कोई बदलाव नहीं किया है।
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मिडिल ईस्ट में तनाव से कच्चे तेल में उबाल

मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ने के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों ने रफ्तार पकड़ ली है। अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री रास्तों पर बढ़ते हमलों ने तेल की सप्लाई को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

बाजार की नजरें विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी हुई हैं, क्योंकि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

बाजार में कीमतों का हाल

सोमवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.77 फीसदी या 0.74 डॉलर की बढ़त के साथ 97.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

वहीं, WTI क्रूड 0.85 फीसदी या 0.78 डॉलर की बढ़त के साथ 92.26 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था। अगर कच्चे तेल में यह तेजी जारी रही, तो दाम जल्द ही 100 डॉलर के पार जा सकते हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका तेज हो गई है।

पिछले हफ्ते भी रही जोरदार तेजी

पिछले सप्ताह भी कच्चे तेल में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। ब्रेंट क्रूड करीब 7.8 फीसदी महंगा हुआ, जबकि WTI की कीमत में लगभग 10 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा हमले शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही पर सीधा असर पड़ा है। इस रास्ते से सामान्य तौर पर दुनिया की करीब पांचवीं तेल आपूर्ति गुजरती है।

समुद्र में तेल टैंकर बन रहे निशाना

तनाव बढ़ने की एक बड़ी वजह समुद्र में तेल टैंकरों को निशाना बनाया जाना है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने शनिवार को ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया।

  • इनमें से एक टैंकर ईरान के खार्ग द्वीप के पास था, जो देश का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है।
  • इसके जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने भी तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाने की बात कही।
  • ईरान के मुताबिक, ये टैंकर होर्मुज स्ट्रेट में अनधिकृत रास्तों से गुजर रहे थे।
  • इसके अलावा तीन अमेरिकी जहाजों को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया।

बदल रही है संघर्ष की प्रकृति

समुद्री खुफिया कंपनी Marisks के अनुसार, शनिवार की घटनाएं समुद्री संघर्ष में एक बड़ा बदलाव दर्शाती हैं। कंपनी का कहना है कि अब व्यावसायिक तेल टैंकर भी दोनों देशों के बीच आर्थिक दबाव बनाने का जरिया बन रहे हैं।

इससे सैन्य संघर्ष और सामान्य व्यापारिक जहाजों के बीच की स्पष्ट सीमा धुंधली हो गई है।

आंकड़ों में गिरावट

एनालिटिक्स कंपनी Kpler के मुताबिक, पिछले 10 दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रोजाना औसतन केवल 10 कमोडिटी जहाज गुजरे हैं, जो मई के बाद का सबसे निचला स्तर है।

ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया जा सकता है।

OPEC+ ने नहीं बदली उत्पादन नीति

इस बीच, तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC+ ने अक्टूबर के लिए अपनी तेल उत्पादन नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। रविवार को हुई बैठक के बाद संगठन ने कहा कि आगे का फैसला नए उत्पादन कोटे पर सहमति के बाद लिया जाएगा।

ANZ के विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द खत्म होने की संभावना कम है और सीमित सैन्य कार्रवाई के बीच लंबे समय तक टकराव जारी रह सकता है।

कब सामान्य होगी सप्लाई?

विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के बाकी हिस्से में तेल का निर्यात दबाव में रह सकता है। सप्लाई के धीरे-धीरे सामान्य होने की शुरुआत 2026 की चौथी तिमाही के आखिर में हो सकती है।

युद्ध से पहले के स्तर पर तेल की आवाजाही को पूरी तरह से लौटने में 2027 की पहली तिमाही के आखिर या दूसरी तिमाही की शुरुआत तक का समय लग सकता है।

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