बर्लिन |
सुबह फैक्ट्री, शाम को फुटबॉल, अब जर्मनी का विश्व कप हीरो
कभी फैक्ट्री में काम करने वाले डेनिज उन्दाव की कहानी, जो अब फीफा विश्व कप में जर्मनी के लिए गोल दाग रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- कभी फैक्ट्री में लेजर मशीन चलाते थे डेनिज उन्दाव।
- आइवरी कोस्ट के खिलाफ दो गोल कर जर्मनी को नॉकआउट में पहुंचाया।
- 2025-26 बुंदेसलीगा में 19 गोल के साथ दूसरे टॉप स्कोरर रहे।
- जर्मनी के कोच नागेल्समान उन्हें 'सुपर सब' के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
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विश्व फुटबॉल में अक्सर सितारे बड़ी अकादमियों की चमक-दमक से निकलते हैं, लेकिन जर्मनी के स्ट्राइकर डेनिज उन्दाव की कहानी मेहनत और लगन की एक अलग ही मिसाल पेश करती है। उनकी कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
कुछ साल पहले तक जो खिलाड़ी एक फैक्ट्री में लेजर मशीन चलाता था, आज वही फीफा विश्व कप 2026 में जर्मनी के लिए मैच जिताने वाला हीरो बन चुका है। आइवरी कोस्ट के खिलाफ उनके दो गोलों ने न सिर्फ टीम को जीत दिलाई, बल्कि नॉकआउट दौर में भी पहुंचा दिया।
फैक्ट्री की मशीनों से फुटबॉल के मैदान तक
डेनिज उन्दाव का सफर आसान नहीं था। जर्मनी के मशहूर क्लब वर्डर ब्रेमेन ने उन्हें सिर्फ 14 साल की उम्र में यह कहकर रिजेक्ट कर दिया था कि उनमें प्रतिभा की कमी है। यह किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता था, लेकिन उन्दाव ने हार नहीं मानी।
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17 साल की उम्र में वे जर्मनी की चौथी डिवीजन की टीम हावेल्स से जुड़े। उस समय फुटबॉल से होने वाली कमाई इतनी नहीं थी कि वे अपना गुजारा कर सकें।
सुबह 4 बजे की शिफ्ट और फुटबॉल का जुनून
अपने सपने को जिंदा रखने के लिए उन्होंने एक फैक्ट्री में नौकरी शुरू कर दी। उनका रूटीन बेहद कठिन था। वे रोज सुबह चार बजे उठते थे, फैक्ट्री में आठ घंटे लेजर मशीन पर काम करते और फिर शाम को फुटबॉल की ट्रेनिंग के लिए जाते थे।
यह सिलसिला लंबे समय तक चला। इस दौरान उन्होंने कभी अपने जुनून को कम नहीं होने दिया। वे जानते थे कि एक दिन उनकी मेहनत जरूर रंग लाएगी।
करियर का टर्निंग पॉइंट: बेल्जियम से इंग्लैंड तक
लगातार संघर्ष के बाद साल 2020 में उनके करियर में एक बड़ा मोड़ आया। उन्हें बेल्जियम के क्लब यूनियन सेंट-गिलॉइस से खेलने का मौका मिला। यहां उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्लब को प्रमोशन दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद बेल्जियम की टॉप लीग में उन्होंने एक सीजन में 25 गोल दागकर सबको हैरान कर दिया।
उनके इस प्रदर्शन ने इंग्लैंड के प्रतिष्ठित क्लब ब्राइटन का ध्यान खींचा और उन्होंने उन्दाव को अपनी टीम में शामिल कर लिया।
बुंदेसलीगा में गोल्डन बूट की दौड़
जर्मनी की टॉप फुटबॉल लीग, बुंदेसलीगा में 2025-26 का सीजन उनके लिए यादगार रहा। उन्होंने इस सीजन में कुल 19 गोल किए और गोल्डन बूट की दौड़ में इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन के बाद दूसरे स्थान पर रहे। इसी दमदार प्रदर्शन ने उनके लिए विश्व कप टीम के दरवाजे खोल दिए।
विश्व कप 2026: जर्मनी के 'सुपर सब'
विश्व कप में कोच जूलियन नागेल्समान ने उन्हें 'सुपर सब' की भूमिका दी है। इसका मतलब है कि वे मैच के बीच में बेंच से उतरकर टीम की रणनीति को नई धार देते हैं।
आइवरी कोस्ट के खिलाफ 2-1 की जीत में उनके दोनों गोल निर्णायक साबित हुए। उन्होंने अब तक सिर्फ दो विश्व कप मैचों में तीन गोल और दो असिस्ट किए हैं, जो उनकी काबिलियत को दर्शाता है।
कोच से नोकझोंक और प्रदर्शन से जवाब
कुछ महीने पहले कोच नागेल्समान से उनकी थोड़ी नोकझोंक भी हुई थी। जब उन्दाव ने शुरुआती टीम में जगह पाने की इच्छा जताई तो कोच ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऐसी बातें खिलाड़ी पर अनावश्यक दबाव डालती हैं।
बाद में कोच ने अपनी टिप्पणी के लिए माफी भी मांगी, लेकिन उन्दाव ने इसका सबसे अच्छा जवाब मैदान पर अपने प्रदर्शन से दिया।
डेनिज उन्दाव की यह कहानी दिखाती है कि अगर जुनून, धैर्य और कड़ी मेहनत हो तो कोई भी सपना असंभव नहीं है। फैक्ट्री के फर्श से लेकर विश्व कप के मैदान तक का उनका सफर दुनिया भर के लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है।
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