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राजनीति

डोटासरा का नीट पेपर लीक पर बड़ा हमला: नीट पेपर लीक पर डोटासरा का बड़ा खुलासा, बीजेपी पर लगाए आरोप

प्रदीप बीदावत

गोविन्द सिंह डोटासरा ने नीट पेपर लीक मामले में भाजपा नेताओं की संलिप्तता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

HIGHLIGHTS

  • नीट-2026 और 2025 के पेपर लीक में राजस्थान के भाजपा नेताओं की संलिप्तता का आरोप।
  • डोटासरा ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में अब तक 89 पेपर लीक हो चुके हैं।
  • एसओजी ने पेपर लीक की जानकारी होने के बावजूद 9 दिनों तक एफआईआर दर्ज नहीं की।
  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जेपीसी जांच की मांग की गई है।
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जयपुर | राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने आज जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता को संबोधित किया। उन्होंने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले पर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया।

नीट पेपर लीक और भाजपा की वादाखिलाफी

डोटासरा ने कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पेपर लीक को बड़ा मुद्दा बनाया था। उन्होंने वादा किया था कि पेपर लीक माफिया को पाताल से भी खोज निकाला जाएगा।

हालांकि, हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि नीट-2026 का पेपर राजस्थान से ही लीक हुआ है। इसमें भाजपा के स्थानीय नेता सीधे तौर पर शामिल पाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि देश के गृहमंत्री ने भी पेपर लीक रोकने का बड़ा वादा किया था। लेकिन आज भाजपा के अपने ही नेता इस भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे हुए दिखाई दे रहे हैं।

डोटासरा ने राज्य के शिक्षा मंत्री के बयानों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मंत्री का यह कहना कि 'पेपर लीक हो गया तो क्या हुआ', बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।

मदन राठौड़ के बयान पर तीखा पलटवार

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के बयानों पर भी डोटासरा ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि राठौड़ नीट पेपर लीक की शुरुआत केरल से होने की बात ऐसे कर रहे हैं जैसे कोई शुभ काम हुआ हो।

डोटासरा ने बताया कि गिरफ्तार भाजपा नेता खुद आरोप लगा रहे हैं कि जांच में बड़े नेताओं को बचाया जा रहा है। यह मामला केवल 2026 तक सीमित नहीं है।

प्रेसवार्ता में यह खुलासा किया गया कि नीट-2025 का पेपर भी राजस्थान में लीक हुआ था। डोटासरा ने सवाल उठाया कि जानकारी होने के बावजूद एसओजी ने एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की?

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने नेताओं को बचाने के लिए जांच एजेंसियों पर दबाव बना रही है। युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ असहनीय है।

नीट-2026 परीक्षा और अभ्यर्थियों का संघर्ष

डोटासरा ने बताया कि 3 मई, 2026 को आयोजित नीट परीक्षा में 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए थे। ये युवा वर्षों से कड़ी मेहनत कर रहे थे।

इन अभ्यर्थियों के परिवारों ने अपनी गाढ़ी कमाई कोचिंग और पढ़ाई पर खर्च की थी। लेकिन पेपर लीक ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया और एनटीए ने परीक्षा रद्द कर दी।

कांग्रेस अध्यक्ष ने याद दिलाया कि 2024 में भी पेपर लीक के कारण दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ी थीं। तब सरकार ने सुधार के बड़े-बड़े दावे किए थे जो अब खोखले साबित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि 2025 में भी नीट-यूजी का पेपर आउट हुआ था। लेकिन सरकार ने तानाशाही दिखाते हुए इसे मानने से इनकार कर दिया ताकि माफियाओं को बचाया जा सके।

जमवारामगढ़ कनेक्शन और पेपर लीक गैंग

जांच का हवाला देते हुए डोटासरा ने बताया कि राजस्थान के जमवारामगढ़ के दो व्यक्ति इस गैंग के मुख्य सदस्य हैं। ये लोग हर वर्ष नीट का पेपर लाते थे।

मांगीलाल और दिनेश बिवाल नामक ये व्यक्ति अपने परिवार के बच्चों को पेपर उपलब्ध करवाते थे। इसके बाद वे अन्य अभ्यर्थियों को पेपर बेचकर करोड़ों रुपये कमाते थे।

डोटासरा ने चौंकाने वाला तथ्य साझा किया कि इन परिवारों के पांच बच्चे 2024 में असफल रहे थे। लेकिन 2025 में बिना किसी कोचिंग के वे सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज पहुंच गए।

यह स्पष्ट प्रमाण है कि 2025 का पेपर भी लीक हुआ था। इसका खुलासा 2026 की जांच के दौरान हुआ क्योंकि इन अपराधियों ने इस बार भी वही खेल खेला।

एनटीए की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल

डोटासरा ने केंद्र सरकार से पूछा कि नीट जैसी बड़ी परीक्षा की जिम्मेदारी एनटीए जैसी संस्था को क्यों दी गई? उन्होंने इसे एक एनजीओ जैसी संस्था करार दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए दरअसल आरएसएस और भाजपा के लोगों का एक संगठन है। पहले सीबीएसई यह परीक्षा कराती थी, जिसमें घपले करना मुश्किल था।

डोटासरा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने चुनाव जीतने के लिए पेपर माफिया के खात्मे की बात कही थी। लेकिन आज उनकी सरकार के शासन में 89 पेपर लीक हो चुके हैं।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी संसद में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने युवाओं के भविष्य पर चर्चा की मांग की थी जिसे सरकार ने ठुकरा दिया।

एसओजी की निष्क्रियता और सरकारी दबाव

सीकर के जागरूक नागरिकों ने पुलिस को पेपर लीक की सूचना दी थी। डोटासरा ने बताया कि पुलिस ने शुरुआत में शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया था।

जब लोगों ने एनटीए को ईमेल के जरिए प्रमाण भेजे, तब जाकर एसओजी हरकत में आई। डोटासरा ने आरोप लगाया कि उच्च स्तर के दबाव के कारण मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।

भाजपा नेताओं को भरोसा था कि जैसे 2024 और 2025 में वे बच निकले, इस बार भी बच जाएंगे। लेकिन जन आक्रोश के कारण उन्हें परीक्षा निरस्त करनी पड़ी।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयानों को भी डोटासरा ने आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मंत्री अब इसे राष्ट्रव्यापी समस्या बता रहे हैं, जो उनकी विफलता का स्वीकारोक्ति है।

भाजपा को केवल दूसरों पर आरोप लगाने के लिए पेपर लीक का मुद्दा याद आता है। खुद के शासन में हो रहे भ्रष्टाचार पर वे मौन साधे हुए हैं।

राजस्थान सरकार की विफलता का कच्चा चिट्ठा

डोटासरा ने मुख्यमंत्री के उन दावों को खारिज किया जिसमें वे कहते हैं कि उनके शासन में पेपर लीक नहीं हुआ। उन्होंने कई परीक्षाओं की सूची पेश की।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में अलवर में एनसीसी सी ग्रेड, चूरू में कक्षा 10 और भरतपुर-बाड़मेर में नीट के पेपर लीक हुए हैं।

इसके अलावा नेशनल सीड कॉरपोरेशन, आरयूएचएस और राजस्थान विश्वविद्यालय के पेपर भी लीक हुए। नवलगढ़ में आरएएस का पेपर परीक्षा से पहले ही खुला मिला था।

डोटासरा ने कहा कि सरकार इन घटनाओं को स्वीकार नहीं कर रही है। यह देश के नौनिहालों के भविष्य के साथ किया जा रहा सबसे बड़ा विश्वासघात है।

भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि 2024 में जो एनटीए का डीजी था, उसे दंडित करने के बजाय पदोन्नत किया गया। उसे छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव बनाया गया है।

इसी प्रकार एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी के कार्यकाल में लगातार पेपर लीक हुए हैं। वे पहले मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले के समय भी चर्चा में रहे थे।

डोटासरा ने सवाल किया कि ऐसे दागी व्यक्तियों को महत्वपूर्ण पदों पर क्यों बनाए रखा गया है? उन्होंने इसे भाजपा का सुनियोजित भ्रष्टाचार बताया।

संसदीय स्थाई समिति ने भी एनटीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि एनटीए संसद को रिपोर्ट देने में भी विफल रहा है।

कांग्रेस की मांग और भविष्य की रणनीति

डोटासरा ने मांग की कि नीट सहित समस्त पेपर लीक प्रकरणों की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जाए। या फिर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज इसकी जांच करें।

उन्होंने कहा कि सीबीआई पर केंद्र का अंकुश है, इसलिए निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

नीट परीक्षा के तनाव के कारण दो अभ्यर्थियों द्वारा आत्महत्या की खबरों पर डोटासरा ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि इन मौतों के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है।

कांग्रेस पार्टी युवाओं के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक बड़े मगरमच्छ नहीं पकड़े जाते, आंदोलन जारी रहेगा।

टीकाराम जूली का भाजपा सरकार पर हमला

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी प्रेसवार्ता में भाजपा को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पेपर लीक रोकने का सपना दिखाकर सरकार बनाई थी।

जूली ने सवाल किया कि पेपर लीक की जानकारी होने के 9 दिन बाद तक एफआईआर क्यों नहीं हुई? उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि राजस्थान का पेपर लीक कानून केंद्र से दस गुना ज्यादा मजबूत है। इसमें आजीवन कारावास और 10 करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

शायद इसीलिए भाजपा नेताओं को बचाने के लिए राजस्थान में मामला दर्ज नहीं किया गया। जूली ने कहा कि माफियाओं के 'बड़े आकाओं' का नाम सार्वजनिक होना चाहिए।

निष्कर्ष: युवाओं के भविष्य पर संकट

डोटासरा और जूली ने संयुक्त रूप से कहा कि भाजपा सत्ता के मद में चूर होकर युवाओं को लूट रही है। 22 लाख परिवारों की उम्मीदें आज दांव पर लगी हुई हैं। सरकार की जवाबदेही शून्य है और वे केवल अपराधों को दबाने में जुटे हैं। कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी और दोषियों को सजा दिलाने तक संघर्ष करेगी।

*Edit with Google AI Studio

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