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राजस्थान

माउंट आबू: पूर्व BSF DG ने नक्की झील पर की सफाई, लोग देखते रहे

गणपत सिंह मांडोली

माउंट आबू में, पूर्व BSF DG एम एल कुमावत ने नक्की झील पर गंदगी देख खुद सफाई की। लोग देखते रहे पर किसी ने मदद नहीं की, जिससे प्रशासन की विफलता उजागर हुई।

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HIGHLIGHTS

  • पूर्व BSF डायरेक्टर जनरल एम एल कुमावत ने माउंट आबू की नक्की झील पर गंदगी देखी।
  • उन्होंने खुद ही कचरा उठाकर सफाई शुरू कर दी, जिसमें पानी की बोतलें भी शामिल थीं।
  • आसपास के लोग सिर्फ तमाशबीन बनकर देखते रहे और किसी ने उनकी मदद नहीं की।
  • यह घटना करोड़ों के सफाई टेंडर वाले माउंट आबू नगरपालिका प्रशासन पर सवाल उठाती है।

माउंट आबू |

बुधवार को माउंट आबू की प्रसिद्ध नक्की झील पर एक असाधारण दृश्य देखने को मिला। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के पूर्व डायरेक्टर जनरल एम एल कुमावत ने झील के किनारे फैली गंदगी को देखकर खुद ही सफाई का बीड़ा उठा लिया। यह घटना स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

कौन हैं एम एल कुमावत?

एम एल कुमावत एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं, जिनका करियर बेहद शानदार रहा है।

वह बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के पूर्व डायरेक्टर जनरल के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

इसके अलावा, उन्होंने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के डायरेक्टर जनरल और भारत सरकार के गृह मंत्रालय में स्पेशल सेक्रेटरी (इंटरनल सिक्योरिटी) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया है।

वह राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

नक्की झील पर शर्मनाक दृश्य

बुधवार को जब कुमावत साहब नक्की झील पर घूमने निकले, तो वहां की गंदगी देखकर वे काफी आहत हुए।

उन्होंने बिना किसी की प्रतीक्षा किए, खुद ही सफाई शुरू कर दी।

उन्होंने लोगों द्वारा फेंके गए कचरे, जैसे पानी की बोतलें आदि को उठाना शुरू किया और उन्हें डस्टबिन में डाला।

हैरानी की बात यह थी कि उन्होंने कई लोगों से मदद भी मांगी, लेकिन कोई भी आगे नहीं आया।

लोग केवल तमाशबीन बनकर उन्हें देखते रहे, लेकिन किसी ने भी इस नेक काम में उनका हाथ बंटाने की जहमत नहीं उठाई।

प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

यह घटना माउंट आबू की नगरपालिका पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है, जिसे सबसे धनी नगरपालिकाओं में से एक माना जाता है।

यह नगरपालिका हर साल सफाई के लिए करोड़ों रुपए के टेंडर जारी करती है और उसके पास साफ-सफाई के लिए कई कर्मचारी भी हैं।

इसके बावजूद, अगर नक्की झील जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल पर ऐसे दृश्य नजर आते हैं, तो यह बेहद शर्मनाक है।

एक सेवानिवृत्त उच्च अधिकारी को खुद सफाई करनी पड़े, यह स्थानीय प्रशासन और शासन की मुखिया की कर्तव्यनिष्ठा पर सवाल उठाता है।

व्यवस्था पर एक तमाचा

यह दृश्य शहर के नेतृत्व करने वालों के लिए एक आईना है। उन्हें अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के प्रति आत्म-मंथन करना चाहिए।

कुमावत साहब की यह पहल एक संदेश है कि शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है।

लेकिन यह भी सच है कि लाखों यत्न और प्रचार के बावजूद, व्यवस्था शहर को साफ रखने में नाकाम रही है।

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