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भारत

सरकार का बड़ा प्रहार: सोना-चांदी खरीदना हुआ महंगा, सरकार ने बढ़ाई ड्यूटी

बलजीत सिंह शेखावत

मोदी सरकार ने सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% किया, जानें क्या होगा असर।

HIGHLIGHTS

  • सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है।
  • इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एआईडीसी शुल्क शामिल है।
  • पीएम मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी।
  • इस कदम का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार बचाना और व्यापार घाटा कम करना है।
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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है। सरकार ने गोल्ड और सिल्वर पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर अब 15 फीसदी कर दिया है।

इस बड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य देश के कीमती विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करना है। इसके साथ ही बढ़ते व्यापार घाटे पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है। रॉयटर्स के अनुसार, सरकार आयात कम करके रुपये को मजबूती देना चाहती है।

आयात शुल्क में 15% की भारी वृद्धि

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नए आदेश के तहत अब सोने पर 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी लगेगी। इसके साथ ही 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) भी वसूला जाएगा।

इस प्रकार कुल प्रभावी आयात शुल्क अब 15 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत में सोने की मांग में बड़ी गिरावट आने की संभावना है।

भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश माना जाता है। आयात शुल्क बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बड़ी हलचल मचने की संभावना जताई जा रही है। इससे घरेलू बाजार में गहनों की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी।

विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की कवायद

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के अनुसार, भारत का गोल्ड बार आयात बहुत तेजी से बढ़ा है। साल 2022 में यह 36.5 अरब डॉलर था, जो 2025 तक 58.9 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।

विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होने वाले आयात में निरंतर वृद्धि देखी गई है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर हो रहा आयात देश की बाहरी आर्थिक स्थिति पर अनावश्यक दबाव बना रहा है।

अश्विनी वैष्णव ने दोहराई पीएम की अपील

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई (CII) एनुअल बिजनेस समिट के दौरान लोगों से अपील की। उन्होंने नागरिकों से आयात आधारित खर्च कम करने का विशेष आग्रह किया है।

वैष्णव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी अस्थिरता के बीच भारत को सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है। उन्होंने मध्य पूर्व में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं का भी जिक्र किया।

"विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए हमें आयात आधारित खर्चों में कटौती करनी होगी। प्रधानमंत्री की अपील का उद्देश्य राष्ट्र की आर्थिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत करना है।"

मंत्री ने जोर देकर कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में भारत को अपने वित्तीय संसाधनों का संचय करना चाहिए ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना मजबूती से किया जा सके।

बाजार और व्यापार पर संभावित असर

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इससे चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने में सरकार को बड़ी मदद मिलेगी।

हालांकि, मेहता ने बाजार में मांग कमजोर पड़ने की चिंता भी जाहिर की है। उनका मानना है कि कीमतों में अचानक वृद्धि होने से आम खरीदार फिलहाल बाजार से दूरी बना सकते हैं।

व्यापार घाटा कम होने से भारतीय रुपये को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले संभलने का मौका मिलेगा। हाल के महीनों में रुपये में देखी गई कमजोरी को इस फैसले से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार का यह साहसिक कदम देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, आम मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं के लिए अब सोना और चांदी खरीदना पहले के मुकाबले काफी महंगा और चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

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