नई दिल्ली | दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से तकनीकी क्षेत्र में मची उथल-पुथल के बीच भारत एक 'सुरक्षित द्वीप' की तरह उभरा है। 2026 की पहली तिमाही में जहाँ वैश्विक स्तर पर 60,000 से अधिक टेक वर्कर अपनी नौकरी गंवा चुके हैं, वहीं दिग्गज टेक कंपनियाँ भारत में अपनी टीम का विस्तार कर रही हैं।
भारत में एआई से बढ़ी हायरिंग: एआई की 'सुनामी' पर सवार भारत: वैश्विक छंटनी के बीच देश में बढ़ी टेक हायरिंग, लागत में 5 गुना बचत
वैश्विक स्तर पर एआई के चलते हो रही छंटनी के बीच भारत एक सुरक्षित टेक हब बनकर उभरा है। यहाँ कम लागत और उच्च कौशल के कारण बड़ी कंपनियाँ अपनी टीम बढ़ा रही हैं।
HIGHLIGHTS
- 2026 की पहली तिमाही में वैश्विक स्तर पर 60,000 टेक वर्कर की नौकरी गई, लेकिन भारत में भर्ती बढ़ी।
- भारत में एआई टूल्स के साथ एक इंजीनियर की लागत अमेरिकी इंजीनियर के मुकाबले 5 गुना कम है।
- डिजिटल इंडिया और एआई मिशन के कारण टियर-2 शहरों से भी नया टेक टैलेंट उभर रहा है।
- अमेरिकी कंपनियाँ H-1B वीज़ा की बढ़ती लागत के कारण अपना आरएंडडी बेस भारत शिफ्ट कर रही हैं।
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एआई बना भारतीय इंजीनियरों का सुरक्षा कवच
जहाँ अमेरिका और यूरोप में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को अपनी नौकरियों के लिए एआई से जूझना पड़ रहा है, वहीं भारत में इंजीनियर एआई को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। वे अपनी प्रासंगिकता और मांग बढ़ाने के लिए नए एआई टूल्स को तेजी से अपना रहे हैं।H-1B वीज़ा की बढ़ती लागत और अमेरिका में जारी रिस्ट्रक्चरिंग के कारण वैश्विक कंपनियाँ अब अपना पूरा आरएंडडी और इंजीनियरिंग बेस भारत शिफ्ट कर रही हैं। इससे न केवल रोजगार बढ़ रहा है बल्कि भारत की तकनीकी साख भी मजबूत हो रही है।
लागत और कौशल का बेहतरीन तालमेल
वर्तमान में टेक कंपनियाँ अपने वर्कफोर्स को लो-कास्ट और हाई-स्किल मार्केट की ओर शिफ्ट कर रही हैं, जिसमें भारत सबसे आगे है। भारत के पक्ष में यह आर्थिक गणित काफी मजबूत नजर आता है।एक अमेरिकी सीनियर इंजीनियर की सालाना लागत करीब 2.3 करोड़ रुपए बैठती है। इसके विपरीत, भारत में एआई टूल्स में दक्ष एक इंजीनियर मात्र 43 लाख रुपए के सालाना पैकेज पर उपलब्ध है। यह कंपनियों को लगभग 5 गुना सीधी बचत प्रदान करता है।
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डिजिटल इंडिया और एआई मिशन का प्रभाव
भारत सरकार के डिजिटल इंडिया और एआई मिशन से देश के तकनीकी इकोसिस्टम को जबरदस्त मजबूती मिल रही है। वर्ष 2025-26 के दौरान भारतीय एआई स्टार्टअप्स में वैश्विक निवेश का प्रवाह लगातार बढ़ा है।अब केवल महानगर ही नहीं, बल्कि टियर-2 शहरों से भी विश्वस्तरीय टेक टैलेंट उभरकर सामने आ रहा है। इसी कारण भारत, फिलीपींस और ब्राज़ील जैसे देश अब दुनिया के नए और सबसे भरोसेमंद टेक हब के रूप में स्थापित हो रहे हैं।
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