जयपुर | भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक प्रशासनिक फैसला लेते हुए 'स्टेशन मास्टर' और 'स्टेशन सुपरिटेंडेंट' जैसे दशकों पुराने पदनामों को बदल दिया है। अब रेलवे स्टेशनों पर तैनात ये अधिकारी 'स्टेशन प्रबंधक' (Station Manager) के नाम से जाने जाएंगे। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश 22 अप्रैल 2026 को जारी किया गया, जिसने पूरे देश के रेलकर्मियों के बीच खुशी की लहर दौड़ा दी है।
स्टेशन मास्टर अब 'स्टेशन प्रबंधक': भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला: स्टेशन मास्टर अब कहलाएंगे मैनेजर
रेलवे बोर्ड ने बदला दशकों पुराना पदनाम, राजस्थान समेत देशभर में आदेश लागू।
HIGHLIGHTS
- रेलवे बोर्ड ने स्टेशन मास्टर का पदनाम बदलकर 'स्टेशन प्रबंधक' कर दिया है।
- ग्रेड पे 4600 वाले अधिकारी अब सहायक स्टेशन प्रबंधक कहलाएंगे।
- अधिकारियों के वेतनमान और कार्य जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं होगा।
- ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत किया है।
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आधुनिक पहचान और मनोबल
ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रहा था ताकि उन्हें एक पेशेवर पहचान मिल सके। एसोसिएशन का मानना है कि 'मैनेजर' शब्द 'मास्टर' की तुलना में अधिक आधुनिक, प्रभावशाली और उत्तरदायित्वपूर्ण प्रतीत होता है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों के मनोबल को बढ़ाना और उन्हें एक कॉर्पोरेट पहचान देना है, जो आज की जरूरत है। शरद चंद्र पुरोहित ने कहा, यह निर्णय ऐतिहासिक है और इससे रेलकर्मियों के बीच आत्म-सम्मान की भावना जागृत हुई है।
ग्रेड के अनुसार नया पदनाम
रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नई व्यवस्था के तहत ग्रेड पे के आधार पर अधिकारियों को नई पहचान दी गई है। ग्रेड पे 4600 (लेवल-7) वाले अधिकारियों को अब 'सहायक स्टेशन प्रबंधक' के नाम से पुकारा जाएगा। वहीं, ग्रेड पे 4800 (लेवल-8) वाले वरिष्ठ अधिकारियों को 'स्टेशन प्रबंधक' की नई और गरिमामयी पहचान मिली है। राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर जैसे सभी प्रमुख रेल मंडलों में इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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जिम्मेदारियों और वेतन पर प्रभाव
रेलवे बोर्ड ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि केवल नाम बदला गया है, उनके कार्य या वेतनमान में कोई बदलाव नहीं होगा। अधिकारी पहले की तरह ही स्टेशन के सुरक्षित संचालन, अनुशासन और यात्री सुविधाओं की देखभाल के लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेंगे। यह कदम रेलवे के प्रशासनिक ढांचे को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्यालय में अब नेमप्लेट्स और मुहरों को बदलने की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं।
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