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खेल

IPL फिक्सिंग का खतरा?: IPL अनधिकृत लोगों की एंट्री पर BCCI सख्त

बलजीत सिंह शेखावत

बीसीसीआई ने टीम होटल और डगआउट में बाहरी लोगों की मौजूदगी पर कड़ी चेतावनी जारी की है।

HIGHLIGHTS

  • बीसीसीआई सचिव ने टीम बस और डगआउट में बाहरी लोगों के प्रवेश पर कड़ी चेतावनी दी है।
  • आईपीएल के मौजूदा सीजन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर बोर्ड ने नाराजगी जताई।
  • साल 2000 के हर्शेल गिब्स और हैंसी क्रोनिए के फिक्सिंग कांड की यादें फिर ताजा हुईं।
  • 2013 के स्पॉट फिक्सिंग मामले की तरह ही अनधिकृत लोगों का होटल पहुंचना चिंताजनक है।
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नई दिल्ली | आईपीएल के मौजूदा सीजन में सुरक्षा और फिक्सिंग को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीसीसीआई ने टीम होटल, बस और डगआउट में अनधिकृत लोगों के प्रवेश पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। यह मामला खेल की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा है।

सुरक्षा नियमों का उल्लंघन और बीसीसीआई की चेतावनी

आईपीएल अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और प्लेऑफ की दौड़ रोमांचक हो गई है। ऐसे समय में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया का बयान चौंकाने वाला है। उन्होंने सुरक्षा में बड़ी लापरवाही की बात कही है।

सैकिया ने स्पष्ट किया कि टीम बस और डगआउट जैसी सुरक्षित जगहों पर अनधिकृत लोग देखे जा रहे हैं। यह 2008 से लागू सुरक्षा प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन है। बोर्ड ने अब इस पर कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है।

उन्होंने टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ियों को चेतावनी दी है। सैकिया ने कहा कि अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो लोग इन नियमों को तोड़ेंगे, उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बोर्ड का आधिकारिक बयान और चिंता

"टीम बस में अनधिकृत लोग सवार हो रहे हैं, होटल में घुस रहे हैं और डगआउट में भी ऐसे लोग दिख रहे हैं, जहां उन्हें होना नहीं चाहिए। अब किसी भी उल्लंघन पर सख्ती से निपटा जाएगा।"

यह बयान दर्शाता है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में बाहरी लोगों का खिलाड़ियों के इतने करीब पहुंचना खतरनाक है। यह न केवल सुरक्षा बल्कि खेल की शुचिता के लिए भी चुनौती है।

इतिहास के काले पन्ने: साल 2000 का फिक्सिंग कांड

सुरक्षा में यह सेंध साल 2000 के उस काले दौर की याद दिलाती है। तब दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोनिए ने मैच फिक्सिंग की बात कबूली थी। उस समय दिल्ली पुलिस ने उनके फोन टैप किए थे।

उस सीरीज के एक मैच में हर्शेल गिब्स को 20 रन से कम बनाने का सौदा हुआ था। लेकिन मैच के दौरान भारतीय फील्डरों ने उनका एक बेहद आसान कैच छोड़ दिया था। इसके बाद गिब्स ने ताबड़तोड़ रन बनाए थे।

क्रोनिए ने बाद में बुकमेकर्स से कहा था कि भारतीय फील्डरों की गलती से सौदा बिगड़ गया। उन्होंने तर्क दिया था कि अगर कैच पकड़ लिया जाता, तो मैच फिक्सिंग के स्क्रिप्ट के अनुसार ही खत्म होता।

स्पॉट फिक्सिंग और बाहरी लोगों का हस्तक्षेप

आज भी जब कोई प्रोफेशनल फील्डर आसान कैच छोड़ता है, तो फैंस के मन में संदेह पैदा होता है। खासकर तब, जब बीसीसीआई खुद स्वीकार करे कि सुरक्षा के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में भी ऐसा ही हुआ था। पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, बुकमेकर खिलाड़ियों के होटल कमरों तक पहुंच गए थे। वे खिलाड़ियों के साथ पार्टियों में भी शामिल होते थे।

जिम्बाब्वे के पूर्व क्रिकेटर ब्रेंडन टेलर ने भी कुछ साल पहले आईसीसी को बताया था। उन्होंने कहा था कि एक भारतीय बिजनेसमैन ने उन्हें होटल में शराब और पार्टियों के जरिए ब्लैमेल करने की कोशिश की थी।

आईपीएल की साख पर मंडराता खतरा

आईपीएल को भारतीय क्रिकेट का ताज माना जाता है। इसकी सफलता का मुख्य आधार प्रशंसकों का अटूट विश्वास है। अगर यह विश्वास डगमगाता है, तो टूर्नामेंट के बिजनेस और भविष्य पर बुरा असर पड़ेगा।

टी20 क्रिकेट में हार-जीत का अंतर बहुत कम होता है। एक वाइड गेंद या एक नो-बॉल भी मैच का पासा पलट सकती है। ऐसे में अनधिकृत लोगों की डगआउट तक पहुंच किसी बड़ी साजिश का संकेत हो सकती है।

बीसीसीआई को अब केवल चेतावनी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और अभेद्य बनाने की जरूरत है। खिलाड़ियों को भी बाहरी लोगों से दूरी बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए जाने चाहिए।

निष्कर्ष के तौर पर, आईपीएल की गरिमा बनाए रखना बीसीसीआई की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि आगामी मैचों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे। क्रिकेट प्रेमियों को केवल खेल के रोमांच का आनंद मिलना चाहिए, न कि संदेह का।

*Edit with Google AI Studio

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