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जालोर

जालोर: नगर परिषद सभापति सीट सामान्य, मुकाबला होगा रोचक

महावीर सिंह बारड़

जालोर नगर परिषद में सभापति की सीट सामान्य होने से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। पिछले बोर्ड पर भ्रष्टाचार और विकास की कमी के गंभीर आरोप लगे थे, जिससे जनता परेशान थी।

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HIGHLIGHTS

  • जालोर नगर परिषद सभापति की सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित।
  • जिला प्रमुख का पद ओबीसी ओपन श्रेणी के लिए निर्धारित हुआ।
  • पिछले भाजपा बोर्ड पर भ्रष्टाचार और विकास न करने के आरोप।
  • शहरवासी सड़कों, नालियों और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित।
jalore municipal council chairman seat becomes general contest to be interesting

जालोर |राजस्थान में पंचायती राज एवं निकाय चुनाव को लेकर गुरूवार को हुई लॉटरी में जालोर नगर परिषद के सभापति की सीट सामान्य ओपन हो गई है। वहीं, जिला प्रमुख के लिए ओबीसी ओपन की सीट आई है। इस बदलाव के बाद अब राजनीतिक समीकरणों में हलचल तेज हो गई है।

सामान्य सीट से मुकाबला होगा रोचक

आपको बता दें कि जालोर नगर परिषद में कई सालों के बाद सामान्य सीट आई है। इससे पहले गत बार यह सीट एससी के लिए आरक्षित थी, वहीं उससे पहले ओबीसी और उससे भी पहले एससी के लिए आरक्षित थी।

लंबे समय बाद सामान्य सीट आने से अब कई नए दावेदार सामने आएंगे, जिससे इस बार का मुकाबला काफी रोचक होने की उम्मीद है।

पिछले बोर्ड पर भ्रष्टाचार के आरोप

जालोर नगर परिषद में गत बोर्ड भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बनाया था और गोविंद टांक को सभापति बनाया गया था। जनता को एक युवा सभापति से जालोर के विकास की काफी उम्मीदें थीं।

हालांकि, आरोप है कि सभापति गोविंद टांक कुछ विशेष लोगों से घिरे रहे और केवल कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के अलावा पांच साल तक कोई महत्वपूर्ण विकास कार्य नहीं करवाए।

फर्जी पट्टों के भी लगे आरोप

इतना ही नहीं, सभापति गोविंद टांक पर फर्जी पट्टे जारी करने और पट्टों के बदले में जमकर पैसा लेने के भी गंभीर आरोप लगे। इन आरोपों ने पिछले बोर्ड की छवि को काफी धूमिल किया।

मूलभूत सुविधाओं से त्रस्त जनता

जालोर नगर परिषद क्षेत्र में विकास तो दूर, जनता को मूलभूत सुविधाएं भी ठीक से नहीं मिल पा रही हैं। शहर की अधिकांश सड़कों की हालत दयनीय बनी हुई है।

लगभग हर वार्ड में नालियां और गंदगी पसरी हुई है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। रोड लाइट की समस्या से भी जनता परेशान है और शाम होते ही कई इलाकों में अंधेरा छा जाता है।

सफाई व्यवस्था भी चरमराई

शहर में साफ-सफाई भी नियमित रूप से नहीं हो रही है। इस वजह से लोगों को एक बार फिर नगर परिषद के बोर्ड से निराशा ही हाथ लगी है।

नियमित बैठकें तक नहीं होती थीं

आरोप है कि जालोर नगर परिषद के भाजपा बोर्ड में भ्रष्टाचार इस कदर हावी था कि नियमित बैठकें तक आयोजित नहीं की जाती थीं। विपक्ष लगातार इन मुद्दों को उठाता रहा और धरने-प्रदर्शन करता रहा, लेकिन बैठकों का आयोजन नहीं हुआ।

जालोर का विकास तो दूर, मूलभूत समस्याओं का समाधान भी नहीं हो पाया। नगर परिषद में चल रहे भ्रष्टाचार से आम जनता त्रस्त है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।

*Edit with Google AI Studio

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