जोधपुर | जोधपुर के कुड़ी इलाके में एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है जिसने सबको भावुक कर दिया है। यहाँ एक बुजुर्ग दंपत्ति ने 49 साल के साथ के बाद एक साथ दुनिया को अलविदा कह दिया।
जोधपुर के राधा-कृष्ण की अमर प्रेम कहानी: जोधपुर: 49 साल का साथ, 24 घंटे में राधा-कृष्ण का महामिलन
जोधपुर में 49 साल साथ रहने के बाद पति-पत्नी ने 24 घंटे के भीतर तोड़ा दम, मिसाल बनी प्रेम कहानी।
HIGHLIGHTS
- जोधपुर के कुड़ी में राधा कंवर और किशन सिंह का 24 घंटे के अंतराल में निधन।
- शादी के 49 साल बाद भी दोनों के बीच था अटूट और मिसाली प्रेम।
- पत्नी की हार्ट अटैक से मौत के अगले ही दिन पति ने भी त्यागे प्राण।
- परिवार ने हाल ही में मनाई थी शादी की 49वीं सालगिरह, 50वीं की थी तैयारी।
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राधा कंवर राठौड़ और किशन सिंह राठौड़ के बीच का प्रेम किसी मिसाल से कम नहीं था। उनकी बेटी के अनुसार, दोनों एक-दूसरे के बिना 10 मिनट भी नहीं रह पाते थे।
राधा कंवर का निधन 26 अप्रैल को दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। उनकी मौत के सदमे और वियोग में अगले ही दिन उनके पति किशन सिंह ने भी अपने प्राण त्याग दिए।
49 साल का अटूट रिश्ता और ठाकुरजी की भक्ति
किशन सिंह और राधा कंवर की शादी साल 1977 में बीकानेर में हुई थी। पिछले 49 सालों से वे साये की तरह एक-दूसरे के साथ रहे और हमेशा ठाकुरजी की सेवा में लीन रहते थे।
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परिवार के सदस्यों का कहना है कि दोनों के बीच का तालमेल अद्भुत था। अगर एक कमरे से बाहर जाता, तो दूसरा तुरंत उसे खोजने लगता और बेचैन हो जाता था।
बेटी ने सुनाई माता-पिता के प्रेम की दास्तां
उनकी बेटी ममता, जो एक स्कूल टीचर हैं, ने नम आंखों से बताया कि उनके पिता पिछले पांच साल से बीमार थे। लेकिन उनकी माँ पूरी तरह स्वस्थ होकर पिता की सेवा कर रही थीं।
पापा हर समय राधा-राधा नाम ही पुकारते रहते थे। माँ यदि दस मिनट भी कहीं चली जाती थी, तो वे उन्हें ही ढूंढते रहते थे। उनके बिना पापा का मन नहीं लगता था।
ममता ने बताया कि माँ को अचानक हार्ट अटैक आया और अस्पताल ले जाने के 15 मिनट के भीतर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। माँ के जाने के बाद पापा की हालत बिगड़ गई।
मरने के बाद भी नहीं छूटा एक-दूसरे का साथ
राधा की बहू रितिका ने बताया कि उनके ससुर को चलने में काफी तकलीफ होती थी। इसके बावजूद जब भी सासू माँ कहीं नजर नहीं आती थीं, वे उन्हें ढूंढते हुए पीछे-पीछे चले आते थे।
रितिका ने भावुक होते हुए कहा कि सासू माँ के जाने के बाद ससुर जी शायद यह वियोग सहन नहीं कर पाए। वे उन्हें ढूंढते हुए खुद भी उनके पास परलोक चले गए।
राधा की बहन गायत्री ने इस जोड़ी को असली 'राधा-कृष्ण' बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह राधा के बिना कृष्ण अधूरे थे, वैसे ही ये दोनों एक-दूसरे के पूरक थे।
अधूरी रह गई 50वीं सालगिरह की तैयारी
परिवार ने अभी 8 दिन पहले ही 21 अप्रैल को उनकी 49वीं मैरिज एनिवर्सिरी मनाई थी। पूरा घर खुशियों से भरा था और अगले साल गोल्डन जुबली मनाने की योजना बन रही थी।
किशन सिंह सेंट्रल वाटर डिपार्टमेंट से ड्राइवर के पद से रिटायर हुए थे। उनके जाने से परिवार में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा।
मोहल्ले के लोग भी इस प्रेम कहानी की चर्चा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज के दौर में ऐसा निस्वार्थ प्रेम और समर्पण देखने को मिलना बहुत ही दुर्लभ है।
समाज के लिए एक प्रेरणादायक प्रेम कहानी
यह घटना हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम केवल शरीर तक सीमित नहीं होता, बल्कि आत्माओं का मिलन होता है। जोधपुर का यह परिवार अब केवल उनकी यादों के सहारे जी रहा है।
उनके अंतिम संस्कार के समय भी पूरा माहौल गमगीन था। हर किसी की जुबान पर बस यही चर्चा थी कि भगवान ऐसी जोड़ी और ऐसा साथ हर किसी को प्रदान करे।
जोधपुर के इस दंपत्ति ने जाते-जाते दुनिया को यह संदेश दिया है कि प्रेम की शक्ति मृत्यु से भी बड़ी होती है। उनका साथ अब जन्मों-जन्मों के लिए अमर हो गया है।
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