बेंगलुरु |
कर्नाटक: शराब की नई टैक्स नीति: कर्नाटक में शराब की नई टैक्स नीति का प्रस्ताव: अब अल्कोहल की मात्रा से तय होंगे दाम, प्रीमियम ब्रांड्स होंगे महंगे
कर्नाटक सरकार ने शराब की टैक्स प्रणाली में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसमें अब अल्कोहल की मात्रा के आधार पर कर निर्धारित किया जाएगा। इससे प्रीमियम ब्रांड्स और स्ट्रॉन्ग बीयर की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है।
HIGHLIGHTS
- कर्नाटक सरकार ने 1968 के एक्साइज नियमों में संशोधन के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है।
- अब शराब पर टैक्स केवल कीमत पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर लगेगा।
- प्रीमियम शराब पर टैक्स 3700 रुपये प्रति लीटर तक जा सकता है, जिससे इनकी कीमतें बढ़ेंगी।
- डिफेंस और पैरामिलिट्री कैंटीन के लिए टैक्स दरों में रियायत बरकरार रखी गई है।
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कर्नाटक सरकार ने राज्य की शराब टैक्स व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी कर ली है। हाल ही में जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार, अब शराब की कीमतों का निर्धारण पूरी तरह बदल जाएगा।
सरकार ने 1968 के कर्नाटक एक्साइज नियमों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रणाली को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। अब टैक्स सिर्फ एमआरपी पर नहीं लगेगा।
अल्कोहल की मात्रा से तय होंगे दाम
नई नीति में 'अल्कोहल-इन-बेवरेज' की अवधारणा पेश की गई है। इसके तहत प्रति लीटर पेय में मौजूद शुद्ध अल्कोहल की मात्रा के आधार पर टैक्स स्लैब तय किए जाएंगे।
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यह नियम व्हिस्की, रम, बीयर और वाइन सभी पर लागू होगा। सरकार का मानना है कि इस वैज्ञानिक पद्धति से राजस्व में वृद्धि होगी और टैक्सेशन में एकरूपता आएगी।
प्रीमियम ब्रांड्स पर बढ़ेगा बोझ
प्रस्तावित नियमों के तहत इंडियन मेड लिकर (IML) के लिए अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं। सबसे निचले ब्रैकेट में टैक्स 50 रुपये प्रति लीटर से शुरू होगा।
महंगे और प्रीमियम प्रोडक्ट्स के लिए यह टैक्स 3700 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकता है। इससे लग्जरी शराब पीने वालों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। यह बदलाव प्रीमियम सेगमेंट को सीधे प्रभावित करेगा।
बीयर और डिफेंस सप्लाई
बीयर के शौकीनों के लिए भी खबर मिली-जुली है। 5% तक अल्कोहल वाली हल्की बीयर पर टैक्स कम होगा, जबकि स्ट्रॉन्ग बीयर पर अधिक टैक्स देना होगा।
अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी (AED) और अतिरिक्त काउंटरवेलिंग ड्यूटी (ACD) को भी प्राइस स्लैब के आधार पर तय किया गया है। इससे टैक्स गणना में सटीकता आएगी और विसंगतियां दूर होंगी।
हालांकि, सेना और अर्धसैनिक बलों की कैंटीन के लिए टैक्स दरें कम रखी गई हैं। इसके अलावा, निर्यात और अंतर-राज्यीय परिवहन पर भी राहत जारी रहेगी ताकि व्यापार प्रभावित न हो।
इस नए ढांचे से राज्य के राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। यह बदलाव बाजार में अलग-अलग श्रेणियों के बीच प्रतिस्पर्धा को भी संतुलित करेगा।
फिलहाल यह एक प्रस्ताव है जिस पर आम जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शराब की तस्करी पर भी लगाम लगेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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