चेन्नई | आजकल स्कूल जाने वाले बच्चों में किडनी स्टोन यानी पथरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। पहले इसे केवल बड़ों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।
बच्चों में किडनी स्टोन का बढ़ा खतरा: बच्चों में क्यों बढ़ रहे किडनी स्टोन? जानें लक्षण और बचाव
खराब लाइफस्टाइल और कम पानी पीने से स्कूल जाने वाले बच्चे हो रहे पथरी के शिकार।
HIGHLIGHTS
- बच्चों में पथरी का मुख्य कारण कम पानी पीना और जंक फूड का अधिक सेवन है।
- कोल्ड ड्रिंक और पैकेट वाले जूस शरीर में नमक और चीनी की मात्रा बढ़ाते हैं।
- पेट या कमर में बार-बार दर्द होना किडनी स्टोन का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
- कैल्शियम की कमी से भी बच्चों में पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है।
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हाल ही में चेन्नई में एक 9 साल की बच्ची पेट और कमर के तेज दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची। जांच में पता चला कि उसकी किडनी में 7 मिलीमीटर की पथरी है।
डॉक्टरों का कहना है कि अब बच्चों में ऐसे मामले दुर्लभ नहीं रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की खराब जीवनशैली और गलत खानपान इस गंभीर समस्या की सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं।
बच्चों में क्यों बढ़ रहे हैं किडनी स्टोन के मामले?
प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. रवि गुप्ता बताते हैं कि सबसे बड़ी वजह बच्चों का कम पानी पीना है। गर्म इलाकों में रहने वाले बच्चे पसीने के जरिए ज्यादा पानी खो देते हैं।
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पानी की कमी होने पर पेशाब गाढ़ा हो जाता है। इससे किडनी में छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं। यही क्रिस्टल आगे चलकर बड़ी पथरी का रूप ले लेते हैं और दर्द बढ़ाते हैं।
आजकल बच्चे सादे पानी की जगह कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले जूस और स्पोर्ट्स ड्रिंक ज्यादा लेने लगे हैं। इनमें चीनी और नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो काफी हानिकारक है।
खानपान और जंक फूड का बुरा असर
चिप्स, पैकेट स्नैक्स और फास्ट फूड खाने की आदत बच्चों में बढ़ रही है। इन खाद्य पदार्थों में सोडियम यानी नमक बहुत ज्यादा होता है, जो सीधा किडनी पर असर डालता है।
ज्यादा नमक के सेवन से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है। यही कैल्शियम आगे चलकर पथरी बनने का कारण बनता है। जंक फूड शरीर में ऑक्सालेट का स्तर भी बढ़ाता है।
"पानी की कमी और अधिक नमक वाला आहार बच्चों की नाजुक किडनी के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो रहा है।" - डॉ. रवि गुप्ता
क्या बच्चों को दूध देना बंद कर देना चाहिए?
कई माता-पिता यह सोचकर बच्चों को दूध देना कम कर देते हैं कि इससे पथरी बढ़ेगी। डॉक्टरों का कहना है कि यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है जिसे दूर करना जरूरी है।
शरीर में सही मात्रा में कैल्शियम होना बच्चों के विकास के लिए जरूरी है। कैल्शियम की कमी होने से शरीर में ऑक्सालेट बढ़ सकता है, जिससे पथरी का खतरा और अधिक हो जाता है।
इसलिए बच्चों को संतुलित मात्रा में डेयरी उत्पाद देना बंद न करें। बस इस बात का ध्यान रखें कि उनके आहार में नमक और कृत्रिम चीनी की मात्रा कम से कम हो।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
अगर आपके बच्चे को पेट या कमर में बार-बार दर्द होता है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। पेशाब करते समय जलन या दर्द होना भी पथरी का संकेत हो सकता है।
पेशाब में खून आना या बार-बार यूरिन इन्फेक्शन होना काफी गंभीर लक्षण हैं। कुछ बच्चों को इस दौरान उल्टी, बेचैनी या तेज बुखार की समस्या भी महसूस हो सकती है।
बचाव के लिए अपनाएं ये आसान तरीके
बच्चों को दिनभर में पर्याप्त पानी पीने के लिए प्रेरित करें। उन्हें समझाएं कि शरीर को हाइड्रेटेड रखना कितना जरूरी है। स्कूल की बोतल में हमेशा साफ पानी ही दें।
उनके आहार से कोल्ड ड्रिंक और पैकेट फूड को धीरे-धीरे कम करें। घर का बना ताजा और संतुलित भोजन ही सबसे बेहतर विकल्प है। ताजे फलों का सेवन भी लाभदायक है।
बच्चों को रोजाना खेलने और शारीरिक गतिविधि के लिए प्रोत्साहित करें। सक्रिय जीवनशैली किडनी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है। समय पर जांच और सही आदतें ही एकमात्र बचाव हैं।
बच्चों में एक बार किडनी स्टोन होने पर भविष्य में इसके दोबारा होने की संभावना बनी रहती है। इसलिए बचपन से ही सही आदतों को अपनाना माता-पिता की बड़ी जिम्मेदारी है।
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