जयपुर | राजस्थान के निवासियों का लंबा और éprouvant इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। भीषण गर्मी और असहनीय उमस से राहत की फुहारें लेकर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने प्रदेश में दस्तक दे दी है। अपनी सामान्य आगमन तिथि से करीब 7 दिन की देरी से पहुंचे मानसून के साथ ही राज्य के कई हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया है, जिससे लोगों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है।
मानसून की एंट्री: राजस्थान में मानसून की दस्तक, इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
राजस्थान में मानसून ने 7 दिन की देरी से दस्तक दी। मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
HIGHLIGHTS
- 7 दिन की देरी से राजस्थान पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून।
- मानसून की उत्तरी सीमा टोंक, जयपुर और अलवर से गुजर रही है।
- IMD ने जयपुर, कोटा, उदयपुर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया।
- अगले एक हफ्ते तक राज्य में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय रहेंगी।
संबंधित खबरें
मानसून का आगमन और वर्तमान स्थिति
जयपुर मौसम केंद्र ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि मानसून ने 2 जुलाई को राज्य के पूर्वी भागों से प्रवेश किया। यह सामान्य आगमन तिथि से लगभग एक सप्ताह की देरी है।
अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह पैटर्न दिलचस्प है। इससे पहले 2019 में भी मानसून ने 2 जुलाई को ही राज्य में प्रवेश किया था।
हालांकि, 2017 में मानसून ने रिकॉर्ड समय से पहले 15 जून को ही दस्तक दे दी थी, जो मानसून की परिवर्तनशील प्रकृति को दर्शाता है।
संबंधित खबरें
जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने मानसून की वर्तमान स्थिति पर जानकारी दी।
वर्तमान में मानसून की उत्तरी सीमा (एनएलएम) टोंक, जयपुर और अलवर से होकर गुजर रही है। परिस्थितियां इसके आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह से अनुकूल हैं।
यह सीमा गुजरात के पोरबंदर से लेकर मध्य प्रदेश के नीमच और राजस्थान के टोंक होते हुए हरियाणा के भिवानी तक फैली हुई है।
आगामी 2-3 दिनों में तेजी से बढ़ेगा मानसून
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून राज्य के अधिकांश अन्य भागों को भी कवर कर लेगा।
इसके तेजी से आगे बढ़ने के लिए मौसम संबंधी सभी परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं, जिससे उम्मीद है कि जल्द ही पूरा प्रदेश मानसूनी बारिश से सराबोर होगा।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि उत्तर अरब सागर और गुजरात के शेष भागों से मिल रही नमी मानसून को आगे बढ़ाने में मदद कर रही है।
इसका असर न केवल राजस्थान बल्कि पड़ोसी राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब और मध्य प्रदेश के शेष हिस्सों पर भी देखने को मिलेगा।
आईएमडी की भारी बारिश की चेतावनी
मानसून के प्रवेश के साथ ही भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने प्रदेश के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।
गुरुवार को जारी चेतावनी के अनुसार, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर और जयपुर संभाग के कई हिस्सों में मेघगर्जन के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है।
प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और निचले इलाकों तथा जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान पर विशेष फोकस
मौसम विभाग का विशेष ध्यान पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान पर है, जहां मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहने की उम्मीद है।
कोटा संभाग के कुछ जिलों, जैसे बारां और झालावाड़ में कुछ स्थानों पर अतिभारी बारिश (Very Heavy Rainfall) भी दर्ज की जा सकती है।
विभाग के अनुसार, आगामी एक सप्ताह तक राज्य में मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह से सक्रिय रहेंगी, जिससे बांधों और जलाशयों के जल स्तर में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।
इस दौरान जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग के अधिकांश इलाकों में लगातार अच्छी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
पश्चिमी राजस्थान को भी जल्द मिलेगी राहत
पूर्वी राजस्थान के बाद अब मरुस्थलीय क्षेत्र यानी पश्चिमी राजस्थान के लोगों को भी जल्द ही गर्मी से बड़ी राहत मिलने वाली है।
मौसम विभाग के अनुसार, जोधपुर और बीकानेर संभाग के क्षेत्रों में भी आगामी 3-4 दिनों में मानसून के सक्रिय होने की पूरी संभावना है।
इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ अंधड़ और बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे तापमान में 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है।
लंबे समय से भीषण गर्मी और लू की मार झेल रहे लोगों के लिए यह मानसून की बारिश किसी वरदान से कम नहीं है।
मानसून की यह बारिश न केवल आम जनजीवन को राहत देगी, बल्कि खरीफ की फसलों की बुवाई के लिए भी यह 'अमृत' के समान है, जिससे किसानों में खुशी का माहौल है।
संक्षेप में, मानसून का आगमन राजस्थान के लिए एक नई ऊर्जा और उम्मीद लेकर आया है। अगले कुछ दिन राज्य के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश का दौर देखने को मिलेगा, जिससे सूखे की मार झेल रहे कई इलाकों को राहत मिलेगी और कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
*Edit with Google AI Studio