माउंट आबू | राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में निर्माण सामग्री लाने के लिए लागू ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों ने इस व्यवस्था का पुरजोर विरोध करते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की है।
माउंट आबू में टोकन राज का विरोध: माउंट आबू: निर्माण टोकन व्यवस्था पर बवाल, खत्म करने की मांग
माउंट आबू में निर्माण सामग्री के लिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के खिलाफ जन आक्रोश। इसे खत्म करने की मांग तेज हो गई है।
HIGHLIGHTS
- माउंट आबू में निर्माण सामग्री के लिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था का भारी विरोध हो रहा है।
- विभिन्न संगठनों ने बैठक कर व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है।
- प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि मास्टर प्लान लागू होने के बाद टोकन व्यवस्था अनावश्यक है।
- प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था को और सरल व पारदर्शी बनाया जा रहा है।
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24 जून को हुई एक अहम बैठक में इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में इस व्यवस्था को खत्म करने का संकल्प लिया।
क्यों हो रहा है टोकन व्यवस्था का विरोध?
विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि यह टोकन व्यवस्था तब लागू की गई थी जब माउंट आबू का मास्टर प्लान स्वीकृत नहीं हुआ था। उनका तर्क है कि अब मास्टर प्लान स्वीकृत हो चुका है, इसलिए इस व्यवस्था की कोई आवश्यकता नहीं है।
आबू संघर्ष समिति, 16 गांव राजपूत समाज, नक्की व्यापार संस्थान और आबू व्यापार संघ जैसे कई संगठनों ने प्रशासन को इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा है।
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लोगों का कहना है कि पिछले दस वर्षों से उन्हें निर्माण सामग्री प्राप्त करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनका मानना है कि प्रशासन निर्माण कार्यों की निगरानी कर सकता है, लेकिन सामग्री लाने पर टोकन जैसी बाध्यता लगाना अनुचित है।
सरकार तक पहुंचा मामला
यह मामला अब राजस्थान सरकार के संज्ञान में भी है। पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने मुख्यमंत्री के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था और टोकन व्यवस्था को समाप्त करने की बात कही थी।
बैठक में सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में टोकन व्यवस्था को समाप्त कर पूर्व की व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
वहीं, नगर पालिका प्रशासन का पक्ष है कि निर्माण कार्यों को व्यवस्थित, पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को और सरल व आधुनिक बनाया जा रहा है।
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या स्थानीय लोगों की मांग पूरी होती है या यह व्यवस्था किसी नए रूप में जारी रहती है।
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