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भारत

न्यू मैंगलोर पोर्ट का कायाकल्प: न्यू मैंगलोर पोर्ट पर बर्थ संख्या 9 के पुनर्विकास को मंजूरी: 438 करोड़ रुपये से बढ़ेगी समुद्री क्षमता

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

केंद्र सरकार ने न्यू मैंगलोर पोर्ट पर बर्थ संख्या 9 के आधुनिकीकरण को हरी झंडी दे दी है। यह परियोजना पीपीपी मॉडल के तहत 438.29 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी, जिससे बंदरगाह की लिक्विड कार्गो हैंडलिंग क्षमता में भारी इजाफा होगा।

HIGHLIGHTS

  • 438.29 करोड़ रुपये की लागत से बर्थ संख्या 9 का होगा पूर्ण पुनर्विकास।
  • कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़कर 10.90 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) हो जाएगी।
  • 2,00,000 DWT तक के विशाल जहाजों और VLGC के संचालन में मिलेगी मदद।
  • पुरानी 50 साल की संरचनाओं को आधुनिक समुद्री बुनियादी ढांचे से बदला जाएगा।
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मैंगलोर | भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को विश्व स्तरीय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने न्यू मैंगलोर पोर्ट अथॉरिटी (NMPA) के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य

यह प्रस्ताव न्यू मैंगलोर पोर्ट पर स्थित बर्थ संख्या 9 के व्यापक पुनर्विकास से संबंधित है। इस परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के आधार पर डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल के तहत क्रियान्वित किया जाएगा। इस परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य बंदरगाह की तरल थोक माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाना और समुद्री रसद दक्षता में सुधार करना है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक सुगमता को बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन

परियोजना के तहत लगभग 50 वर्ष पुरानी हो चुकी जर्जर संरचनाओं को हटाकर अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा। नई संरचना को अगले 50 वर्षों के जीवनकाल के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित करेगी। बर्थ की गहराई को वर्तमान 10.5 मीटर से बढ़ाकर सीधे 14 मीटर किया जाएगा। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, इसे 19.8 मीटर तक गहरा करने का प्रावधान भी डिजाइन में शामिल किया गया है।

विशाल जहाजों का संचालन

इस आधुनिकीकरण के बाद, बंदरगाह 2,00,000 डेडवेट टन (DWT) तक के विशाल जहाजों को संभालने में सक्षम हो जाएगा। इसमें वेरी लार्ज गैस कैरियर (VLGC) जैसे बड़े समुद्री पोत भी शामिल हैं, जो वर्तमान में यहां नहीं आ सकते। मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व का परिणाम है। उनके मार्गदर्शन में भारत का समुद्री क्षेत्र अभूतपूर्व गति से आधुनिक हो रहा है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है।

वित्तीय निवेश और क्षमता

इस पुनर्विकास कार्य की कुल अनुमानित लागत 438.29 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस पूरी राशि का निवेश एक निजी रियायतकर्ता द्वारा किया जाएगा, जिसका चयन खुली प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से होगा। परियोजना के पूरा होने पर, बर्थ की कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़कर 10.90 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) हो जाएगी। यह क्षमता कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों (POL) और एलपीजी जैसे खतरनाक तरल पदार्थों के प्रबंधन के लिए समर्पित होगी।

परिचालन सुरक्षा और दक्षता

आधुनिक मशीनीकरण के तहत, बंदरगाह पर उच्च क्षमता वाले समुद्री अनलोडिंग आर्म्स (MULA) और स्वचालित मूरिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इससे परिचालन की गति बढ़ेगी और जहाजों के टर्नअराउंड समय में कमी आएगी। सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए यहां आधुनिक अग्निशमन बुनियादी ढांचा और नाइट्रोजन उत्पादन स्किड स्थापित किए जाएंगे। एकीकृत नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से खतरनाक तरल पदार्थों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।

आर्थिक और रणनीतिक लाभ

यह परियोजना कर्नाटक और केरल के भीतरी इलाकों के लिए एक प्रमुख समुद्री प्रवेश द्वार के रूप में न्यू मैंगलोर पोर्ट की स्थिति को मजबूत करेगी। इससे क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे। बड़े जहाजों के संचालन से 'स्केल ऑफ इकोनॉमी' का लाभ मिलेगा, जिससे रसद लागत (Logistics Cost) में कमी आएगी। यह अंततः उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा उत्पादों की कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।

राजस्व और समय सीमा

परियोजना की निर्माण अवधि 2 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि कुल रियायत अवधि 30 वर्ष की होगी। निजी रियायतकर्ता परिचालन के पांचवें वर्ष तक न्यूनतम गारंटीकृत कार्गो (MGC) के लिए प्रतिबद्ध होगा। पोर्ट अथॉरिटी के लिए यह परियोजना एक स्थिर राजस्व स्रोत बनेगी। कार्गो की मात्रा से जुड़ी रॉयल्टी और निश्चित भुगतानों के माध्यम से बंदरगाह की वित्तीय स्थिति और अधिक मजबूत होगी। निष्कर्षतः, बर्थ संख्या 9 का पुनर्विकास भारत को एक 'ग्लोबल मैरीटाइम हब' बनाने के सपने को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह भविष्य की ऊर्जा मांगों को पूरा करने के लिए बंदरगाह को पूरी तरह तैयार कर देगा।

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