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राजनीति

जून में बने थे सांसद और मार्च में भेजा सांसद के नाम का लैटर

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 94

HIGHLIGHTS

  1. 1 जून में बने थे सांसद और मार्च में भेजा सांसद के नाम का लैटर
  2. 2 सांसद बनने से तीन माह पहले कैसे कर दी आबूराज की पैरवी
  3. 3 माउंट आबू का नाम बदलने पर वाहवाही लूटने की मची होड़
aburaj name lumbaram choudhary letter

सिरोही. माउंट आबू को आबूराज के नाम से जाना व पहचाना जाएगा। विधानसभा में मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद स्थानीय नेताओं में वाहवाही लूटने की होड़ मची हुई है। ऐसे में सांसद लुम्बाराम चौधरी भी कहां पीछे रहने वाले हैं। उन्होंने भी अपना एक पत्र वायरल कर दिया।

पत्र के लिहाज से बताया गया कि वर्ष-2024 के मार्च महीने में ही वे मुख्यमंत्री को इस बारे में पत्र लिख चुके थे। सांसद के पीआर ने प्रशंसकों तक यह पत्र पहुंचाया और आबूराज की घोषणा, सांसद का आभार जताते हुए इस पत्र के साथ वायरल होने लगी। अच्छा है पर यहां एक चूक हो गई। उनके पीआर का काम देखने वाले यह भूल गए कि वे जून माह में सांसद बने थे, मार्च में तो प्रत्याशी के तौर पर फील्ड में थे। अब सांसद बनने से तीन माह पहले वे सांसद के नाम से मुख्यमंत्री को किस तरह लैटर भेज पाए यह वे ही बता सकते हैं।

ट्रोल हुए तो दूसरा पत्र वायरल किया
सांसद की ओर से लिखे गए पत्र पर 11 मार्च, 2024 की दिनांक लिखी हुई है। सोशल मीडिया पर यह पत्र खूब वायरल किया गया। फिर किसी नजर पड़ी तो तिथि को लेकर ट्रोल हो गए। इसके बाद गलती दुरुस्त करते हुए एक दूसरा पत्र वापस वायरल होने लगा। इसमें वर्ष-2025 लिखा हुआ है। वैसे दोनों ही पत्र पर क्रमांक वहीं है। तिथि बदलाव की चूक कहां हुई कह नहीं सकते।

सभी अपने लिखे पत्र वायरल कर रहे
नाम बदलाव को लेकर वाहवाही लूटने में कोई पीछे नहीं है। फिर चाहे सांसद हो या राज्यमंत्री अथवा विधायक या संगठन से जुड़े पदाधिकारी। ये सभी अपने पुराने पत्रों को वायरल करते हुए इस घोषणा का श्रेय लेना चाह रहे हैं। लब्बोलुआब यह कि वे आबूराज नामकरण के पीछे अपना खास प्रयास होना दर्शाना चाह रहे हैं।

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