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जालोर

सूर्य का आना तो तय है पर इनका आना तय नहीं हुआ!

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली 27

यह दिलचस्प रहा कि इतने दिनों से जिस तरह इन्होंने अपने नाम के साथ लोकसभा क्षेत्र का टैंग लगा रखा था उसे इस महीने के प्रथम सप्ताह में हटा दिया। संसदीय क्षेत्र के लिए भाजपा की ओर से टिकट की घोषणा होते हुए इन्होंने अपनी दावेदारी समेट ली। यहां तक तो ठीक था

HIGHLIGHTS

  1. 1 जालोर संसदीय क्षेत्र की, जहां टिकट प्राप्त करने की दौड़ में यूं तो कई लोग प्रयासरत थे, लेकिन कुछ लोग जी जान से लगे हुए थे। अब टिकट के लिए केंद्रीय समिति तक उनकी पहुंच कितनी थी या उच्चस्तरीय समिति के समक्ष उनकी पैरवी कितनी मजबूती से हुई यह तो पता नहीं, लेकिन स्थानीय स्तर पर वे अपना टिकट तय मान रहे थे
changes in social media posts as soon as tickets are announced
Prem Singh Rao

सिरोही/जालोर | लोकसभा चुनाव को देखते हुए टिकट पाने की चाह थी, लेकिन इसके लिए दिखावा ही चल रहा था। इसलिए कि टिकट की घोषणा होते ही केंद्रीय योजनाओं का प्रचार और अपने नाम के साथ लोकसभा क्षेत्र का टैग भी गायब हो गया। हम बात कर रहे हैं

जालोर संसदीय क्षेत्र की, जहां टिकट प्राप्त करने की दौड़ में यूं तो कई लोग प्रयासरत थे, लेकिन कुछ लोग जी जान से लगे हुए थे। अब टिकट के लिए केंद्रीय समिति तक उनकी पहुंच कितनी थी या उच्चस्तरीय समिति के समक्ष उनकी पैरवी कितनी मजबूती से हुई यह तो पता नहीं, लेकिन स्थानीय स्तर पर वे अपना टिकट तय मान रहे थे।

संभवतया यही कारण था कि सोशल मीडिया पर वे यह पोस्ट भी डाल चुके थे कि जिस तरह से सूर्य का आना तय है उसी तरह उनका आना भी तय है।

नाम चमकाने की खातिर लाखों के इवेंट्स
अब बात कहां अटकी यह वे ही जाने पर जिस तरह से अपना नाम चमकाने की खातिर लाखों-करोड़ों खर्च करते हुए इवेंट्स किए गए, उस लिहाज से संगठन के प्रति भी दायित्व रखना चाहिए। टिकट चाहे किसी को मिले पर उसे जिताने की खातिर उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहिए।

देखना है कि दिखावा था या सहयोग करते हैं
यह दिलचस्प रहा कि इतने दिनों से जिस तरह इन्होंने अपने नाम के साथ लोकसभा क्षेत्र का टैंग लगा रखा था उसे इस महीने के प्रथम सप्ताह में हटा दिया। संसदीय क्षेत्र के लिए भाजपा की ओर से टिकट की घोषणा होते हुए इन्होंने अपनी दावेदारी समेट ली। यहां तक तो ठीक था

लेकिन जब लोकसभा क्षेत्र के लिए दावेदारी जता रहे हैं तो संगठन के साथ रहना ही चाहिए। टिकट चाहे जिसे मिला हो पर उसका सहयोग तो बनता है। अब देखना है टिकट के ये दावेदार पार्टी की ओर से घोषित प्रत्याशी का सहयोग करते हैं या केवल दिखावे के लिए ही भाजपा से दावेदारी कर रहे थे।

इवेंट्स के जरिए प्रबल तरीके से दिखाई दावेदारी
देखा जाए तो इन्होंने विधानसभा चुनाव के बाद से ही अपनी दावेदारी को लेकर चर्चा छेड़ दी थी। इसके तहत लगभग हर जगह होर्डिंग-बैनर आदि लगाए गए। इन पर अपना फोटो व नाम के साथ लोकसभा क्षेत्र का टैग भी लगाया गया। वैसे इस तरह की प्रचार सामग्री लगाने वाले कुछ अन्य लोग भी थे, लेकिन इवेंट्स के जरिए ये अपनी दावेदारी कुछ प्रबल तरीके से दिखाते रहे।

दोनों जिलों में दावेदारी दिखाने की खातिर
उल्लेखनीय है कि जालोर में भीनमाल निवासी ये दावेदार सिरोही में स्वामी विवेकानंद जयंती पर युवा शक्ति सम्मेलन के जरिए लांच हुए थे। इसके बाद भीनमाल में कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें कुमार विश्वास और बागेश्वरधाम सरकार को भी आमंत्रित किया गया। इनको सिरोही हवाई पट्टी से सडक़ मार्ग से भीनमाल ले जाया गया। यह भी शायद इसलिए कि दोनों जिलों में अपनी दावेदारी दिखाई जा सके।

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