सोमवार को पीड़ित परिवार का धैर्य जवाब दे गया था। मृतक गणपतसिंह की पत्नी भारती कंवर अपनी मासूम बच्चों, सास और जेठानी के साथ जालोर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गईं थीं। उनका यह कदम प्रशासन और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए है, ताकि मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई हो सके।
पुलिस पर लापरवाही के गंभीर आरोप
भारती कंवर का आरोप है कि घटना को डेढ़ साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जालोर पुलिस हत्यारों को पकड़ने और हत्याकांड का पर्दाफाश करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने कई बार पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिले।
परिवार का कहना है कि पुलिस ने जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की है। तफ्तीश में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है, जिसके कारण उन्हें अब न्याय मिलने की उम्मीद भी धूमिल होती जा रही है। इस निराशा और हताशा ने उन्हें यह कड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। भारती कंवर ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पति की हत्या के बाद से उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
भूख हड़ताल पर बैठे परिवार ने जालोर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मुख्य मांग है कि गणपतसिंह हत्याकांड का जल्द से जल्द खुलासा किया जाए और दोषियों को गिरफ्तार कर कठोरतम सजा दी जाए। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे। स्थानीय सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने भी पीड़ित परिवार का समर्थन किया है।
जालोर में इस घटना को लेकर तनाव का माहौल है। लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। यह मामला अब केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज में न्याय की उम्मीद का प्रतीक बन गया है। पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, माना जा रहा है कि इस भूख हड़ताल के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा और जांच में तेजी लाई जा सकती है।
यह घटना एक बार फिर पुलिस की जांच प्रणाली और जनता के प्रति उसकी जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। पीड़ित परिवार की यह भूख हड़ताल न्याय की लंबी लड़ाई का एक और दुखद उदाहरण है, जहां एक परिवार को अपने प्रियजन के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए इस हद तक जाना पड़ रहा है।