राहुल गांधी आज वागड़ में थे और आदिवासी वोट बैंक को साधन के लिहाज से रैली को सम्बोधित कर रहे थे। आज बात करेंगे कि क्या मिलेगा राहुल गांधी की इस रैली से कांग्रेस को। यह इलाका जहां कभी सिर्फ कांग्रेस का वोट बैंक हुआ करता था अब बीजेपी के साथ बीटीपी और समाजवाद—साम्यवाद की असर भी प्रभावी होने लगी है।
युवा विधायक राजकुमार रोत, गणेश घोघरा जैसे युवा और रमिला खड़िया जैसे बागी विधायकों की धमक राजस्थान विधानसभा में बीते पांच साल में ऐसी सुनी कि लगता है कि यहां का वोटर अब किसी भुलावे में पूरा का पूरा नहीं आएगा।
इसी बीच राजस्थान में किरोड़ीलाल मीणा भी आदिवासी दिवस पर मीणा हाईकोर्ट में थे और एक बड़ा आयोजन किया। दौसा के समीप हुए इस आयोजन में भी राजनीतिक अंदाज ऐसा रहा कि चुनाव प्रभावित करेगा।
राजस्थान में कुल 25 सीटें एसटी के लिए रिजर्व हैं और यह 11 जिलों में स्थित है। जिलों का हिसाब हम पुराना यानि कि 2018 वाला ही लगा रहे हैं। इस बार 33 विधायक एसटी के हैं राजस्थान विधानसभा में। 25 रिजर्व सीटों पर है और आठ अनरिजर्वड यानि कि अनारक्षित पर है।
राहुल गांधी जिस इलाके में सभा कर गए हैं, वहां 16 सीटें हैं। उदयपुर जिले की गोगुंदा, झाड़ोल, खैरवाड़ा, उदयपुर ग्रामीण और सलूम्बर। इसमें से कांग्रेस के पास सिर्फ एक है। बीजेपी के पास चार। बांसवाड़ा जिले की पांच जिसमें बांसवाड़ा और बागीदौरा में कांग्रेस, गढ़ी और घाटोल में बीजेपी है। एक सीट कुशलगढ़ पर निर्दलीय है। प्रतापगढ़ की दो सीट हैं धरियावद जहां से बीजेपी ओर प्रतापगढ़ से कांग्रेस है। इसी तरह डूंगरपुर की चार में से एक डूंगरपुर ही कांग्रेस के पास है।
चौरासी और सागवाड़ा बीटीपी तथा आसपुर बीजेपी के पास है। इस लिहाज से सोलह में से आधी यानि कि पचास प्रतिशत सीटों पर भाजपा है। दो पर बीटीपी, एक पर निर्दलीय और शेष पांच पर कांग्रेस हैं। मतलब यहां सत्ता में होने के बावजूद कांग्रेस कमजोर है। लोकसभा चुनाव में ही कांग्रेस को आदिवासियों ने वोट नहीं किया और सभी लोकसभा क्षेत्रों में यहां बीजेपी जीती।
अब यदि आते हैं मीणा हाईकोर्ट वाले आदिवासी दिवस पर जिसे अपने आप में सशक्त विपक्ष बने हुए बाबा किरोड़ीलाल मीणा कर रहे हैं। इस इलाके में आठ सीटें मोटे तौर पर मान सकते हैं। यदि सिरोही की पिण्डवाड़ा सीट पर इन दोनों कार्यक्रमों का प्रभाव नहीं मानें तो यहां आठ सीटें सीधे तौर पर प्रभावित होती है और यहां एक भी बीजेपी का विधायक नहीं है। जयपुर जिले की बस्सी सीट पर निर्दलीय है लगातार दूसरी बार।
जयपुर जिले की जमवारामगढ़, अलवर की राजगढ़—लक्ष्मणगढ़, करौली की टोडाभीम और सपोटरा, दौसा की लालसोट, सवाई माधोपुर की बामनवास और बारां जिले की किशनगंज में कांग्रेस है। ऐसे में राहुल गांधी का कार्यक्रम स्वाभाविक तौर पर वहां बनाया गया, जहां आदिवासी सीटों की संख्या करीब दो तिहाई है और कांग्रेस जहां कमजोर है। वहीं किरोड़ी मीणा ने अपनी एक तिहाई सीटों पर फोकस किया है।
जिन अनारक्षित सीटों पर एसटी के विधायक हैं। वे यही बाबा किरोड़ी के मोहल्ले की है। वे सीटें हैं अलवर की थानागाजी, करौली की करौली और महुवा, दौसा, सवाई माधोपुर की गंगापुर, टोंक की देवली उनियारा, भीलवाड़ा की जहाजपुर और कोटा की पिपल्दा।
इन आठ में बीजेपी और बसपा का एक ही विधायक है। दो कांग्रेस और तीन निर्दलीय हैं। ऐसे में बीजेपी का यह पार्ट जरा कमजोर है। आठ आरक्षित और आठ अनारक्षित एसटी परिणाम वाली सीटों पर बीजेपी का महज एक ही विधायक है। शेष सभी कांग्रेस के खाते में है।
ऐसे में बीजेपी किरोड़लाल मीणा से चमत्कार की उम्मीद कर रही है। उम्रदराजी के बावजूद किरोड़ीलाल मीणा जोश—खरोश से बीजेपी को यहां चमकाने की उम्मीद में आयोजन कर रहे हैं। 2023 में जीत के हिसाब से सीटों पर हुई कोशिशें कितना रंग लाएगी। यह वक्त बताएगा। परन्तु दोनों ही पार्टियां आदिवासियों को सेट करने की कोशिशों में जुटी है।
राजस्थान में 2018 विधानसभा चुनाव में जीते अनुसूचित जनजाति के विधायक