जयपुर | राजस्थान में विपक्षी दल कांग्रेस अब पूरी तरह से 'एक्शन मोड' में नजर आ रही है। निकाय चुनावों से पहले पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सांगठनिक मशीनरी को धार देना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक: राजस्थान कांग्रेस में बड़ा फेरबदल, 4 जिलों में नई नियुक्तियां
गोविंद सिंह डोटासरा ने जोधपुर, डूंगरपुर, बारां और सलूम्बर में नई जिला कमेटियों का ऐलान किया है।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान कांग्रेस ने जोधपुर, डूंगरपुर, बारां और सलूम्बर के लिए नई जिला कमेटियों की घोषणा की है।
- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर शहर की कमान ओंकार वर्मा को सौंपी गई है।
- आदिवासी अंचल डूंगरपुर में गणेश घोघरा पर पार्टी ने दोबारा भरोसा जताते हुए अध्यक्ष बनाया है।
- संगठन में उपाध्यक्ष, महासचिव और सोशल मीडिया प्रभारियों सहित पूरी कार्यसमिति का गठन किया गया है।
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पार्टी ने गुरुवार को जोधपुर शहर, डूंगरपुर, बारां और सलूम्बर की जिला कांग्रेस कमेटियों की घोषणा की है। इन नियुक्तियों ने पार्टी में नई ऊर्जा भरी है और प्रदेश में चुनावी हलचल को काफी तेज कर दिया है।
4 जिला कमेटियों में बड़ा फेरबदल
डोटासरा के अनुमोदन के बाद जारी सूची में अनुभवी और युवा चेहरों का संतुलन दिख रहा है। प्रमुख नियुक्तियों में जोधपुर शहर की कमान अब ओंकार वर्मा को सौंपी गई है जो एक अनुभवी नेता हैं।
जोधपुर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है। यहां संगठन को एकजुट रखना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना वर्मा के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। पार्टी आलाकमान की नजरें अब इसी क्षेत्र पर टिकी हैं।
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डूंगरपुर जिले में गणेश घोघरा पर पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताया है। आदिवासी अंचल में कांग्रेस की पैठ बनाए रखने के लिए घोघरा की आक्रामक कार्यशैली को संगठन के लिए काफी महत्वपूर्ण माना गया है।
बारां में हंसराज मीणा को जिला अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं नवगठित जिले सलूम्बर में संगठन की नींव रखने की जिम्मेदारी परमानंद मेहरा को दी गई है। ये नियुक्तियां क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर की गई हैं।
पूरी कार्यसमिति का विस्तृत ढांचा तैयार
इस बार की घोषणा में खास बात यह है कि केवल जिला अध्यक्षों के नाम ही तय नहीं हुए हैं। बल्कि पूरी कार्यसमिति का एक मजबूत ढांचा तैयार किया गया है जिसमें जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह दी गई है।
सूची में उपाध्यक्ष, सचिव, महासचिव और कोषाध्यक्ष के पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। इससे जिला स्तर पर पार्टी का कामकाज सुचारू होगा। संगठन को मजबूत करने के लिए डोटासरा ने खुद फीडबैक लिया है।
आधुनिक चुनाव प्रबंधन को देखते हुए डिजिटल विंग पर विशेष ध्यान दिया गया है। सोशल मीडिया प्रभारियों की तैनाती की गई है ताकि सरकारी नीतियों का मुकाबला प्रभावी ढंग से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया जा सके।
निकाय और पंचायत चुनाव पर पैनी नजर
बारां और सलूम्बर की नियुक्तियां दर्शाती हैं कि कांग्रेस मेवाड़ और हाड़ौती में अपनी जमीन वापस चाहती है। पार्टी रणनीतिक रूप से इन क्षेत्रों में अपने पुराने गौरव को प्राप्त करने का प्रयास कर रही है।
डूंगरपुर में गणेश घोघरा की नियुक्ति 'भारत आदिवासी पार्टी' (BAP) के प्रभाव को रोकने की कोशिश है। आदिवासी वोट बैंक को साधना कांग्रेस की प्राथमिकता है क्योंकि यहां मुकाबला त्रिकोणीय होता जा रहा है।
हाड़ौती में हंसराज मीणा के जरिए कांग्रेस मीणा वोट बैंक और स्थानीय मुद्दों को भुनाने की तैयारी में है। पार्टी चाहती है कि आगामी चुनावों में भाजपा के 'विजय रथ' को मजबूती से रोका जाए।
"संगठन में ये नियुक्तियां कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगी। हम आगामी चुनावों के लिए तैयार हैं और जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरेंगे।"
क्या भाजपा को रोक पाएगी कांग्रेस?
बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल पदाधिकारियों की फौज खड़ी करने से कांग्रेस का काम बन जाएगा? भाजपा इस समय सत्ता में है और उसकी सांगठनिक पकड़ काफी गहरी और मजबूत मानी जाती है।
डोटासरा ने जिन चेहरों को चुना है, उनके सामने कार्यकर्ताओं की निराशा दूर करना मुख्य कार्य है। उन्हें सड़कों पर संघर्ष के लिए तैयार करना होगा ताकि वे जनता के बीच विश्वास पैदा कर सकें।
इन नियुक्तियों का असर आने वाले चुनावों के परिणामों में दिखाई देगा। राजस्थान की राजनीति में यह सांगठनिक बदलाव कांग्रेस के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। अब सारा दारोमदार नई टीम पर है।
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