जयपुर | राजस्थान में भाजपा सरकार के कार्यकाल को करीब ढाई साल बीतने को हैं, लेकिन अब तक किसी भी मंत्री ने अपनी चल-अचल संपत्ति का वार्षिक ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। केंद्र सरकार ने 2010 में नियम बनाया था कि मंत्रियों को हर साल 31 अगस्त तक अपनी संपत्ति की जानकारी देनी होगी, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी हो रही है।
राजस्थान मंत्रियों की संपत्ति का खुलासा: राजस्थान: ढाई साल बाद भी मंत्रियों ने नहीं दी संपत्ति की जानकारी
केंद्र के 2010 के नियमों के बावजूद राजस्थान के मंत्रियों ने अभी तक अपनी संपत्ति सार्वजनिक नहीं की है।
HIGHLIGHTS
- केंद्र सरकार के 2010 के नियम के अनुसार मंत्रियों को हर साल 31 अगस्त तक संपत्ति की जानकारी देनी होती है।
- राजस्थान की वर्तमान भाजपा सरकार के किसी भी मंत्री ने अब तक वार्षिक संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है।
- एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित सरकार के सभी 25 मंत्री करोड़पति हैं।
- अधिकारियों के लिए नियम सख्त हैं; मुख्य सचिव और आईएएस-आईपीएस अधिकारियों ने अपनी संपत्ति घोषित कर दी है।
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नियमों की अनदेखी और मंत्रियों का पक्ष
प्रदेश में मंत्रियों द्वारा संपत्ति सार्वजनिक न करने के मामले में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि चुनाव के समय हमने शपथ पत्र में अपनी संपत्ति की जानकारी दे दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह हर साल संपत्ति घोषित करने के नियमों की समीक्षा करेंगे और देखेंगे कि वर्तमान में क्या प्रावधान लागू हैं।
"चुनावों में जाने से पहले हमको संपत्ति सार्वजनिक करनी होती है। हम 2023 में चुनाव के समय अपनी संपत्ति सार्वजनिक कर चुके हैं। हर साल के नियमों को मैं दिखवाता हूं।" - जोगाराम पटेल
अधिकारियों के लिए सख्त हैं नियम
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राज्य सरकार ने अधिकारियों के लिए संपत्ति घोषित करने के नियम काफी सख्त कर रखे हैं। 2021 में संशोधित नियमों के तहत राजपत्रित अधिकारियों को हर साल विवरण देना अनिवार्य है। यदि अधिकारी समय पर जानकारी नहीं देते हैं, तो उनकी वेतन वृद्धि और पदोन्नति रोक दी जाती है। हाल ही में मुख्य सचिव सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी संपत्ति घोषित की है।
सभी मंत्री हैं करोड़पति
एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित राजस्थान सरकार के सभी 25 मंत्री करोड़पति हैं। इन मंत्रियों की औसत संपत्ति लगभग 7 करोड़ रुपए आंकी गई है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर 29.07 करोड़ की संपत्ति के साथ सबसे अमीर हैं, जबकि बाबूलाल खराड़ी के पास सबसे कम 1.24 करोड़ की संपत्ति है।
पारदर्शिता पर उठते सवाल
गहलोत सरकार के 2008-2013 के कार्यकाल में मंत्रियों की संपत्ति वेबसाइट पर डाली जाती थी, लेकिन 2013 के बाद से यह सिलसिला थम गया है। लगातार तीन सरकारों के कार्यकाल में मंत्रियों ने अपनी वार्षिक संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है, जो शासन में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि जनता पारदर्शिता की उम्मीद करती है। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस दिशा में कदम उठाएगी और मंत्रियों की संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।
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