नागौर | आजकल डिजिटल दुनिया में जितनी सुविधाएं बढ़ी हैं, उतनी ही तेजी से ठगी के नए-नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। अगर आपके पास भी वॉट्सएप या टेलीग्राम पर घर बैठे रेटिंग करने या वीडियो लाइक करके हजारों रुपये कमाने का कोई मैसेज आया है, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी चेतावनी है।
राजस्थान के नागौर जिले में पुलिस ने एक ऐसे ही शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो 'टास्क फ्रॉड' के जरिए मासूम लोगों की मेहनत की कमाई डकार रहा था। मेड़ता सिटी पुलिस और जिला स्पेशल टीम (DST) की इस संयुक्त कार्रवाई ने ठगी के एक ऐसे नेटवर्क को ध्वस्त किया है, जिसके तार काफी गहरे जुड़े हुए हैं।
रेटिंग से कमाई का झांसा, करोड़ों की ठगी: राजस्थान में 'टास्क फ्रॉड' का भंडाफोड़: रेटिंग और लाइक के नाम पर टेलीग्राम से करोड़ों की ठगी, 4 गिरफ्तार
नागौर पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो टेलीग्राम के जरिए 'टास्क फ्रॉड' कर करोड़ों रुपये डकार चुका है। ये ठग होटल रेटिंग और वीडियो लाइक करने के नाम पर लोगों को फंसाते थे।
HIGHLIGHTS
- नागौर की मेड़ता सिटी पुलिस और DST ने करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया।
- ठग टेलीग्राम पर होटल रेटिंग और वीडियो लाइक करने जैसे टास्क देकर लोगों को झांसा देते थे।
- पुलिस ने अब तक 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 5 अन्य की तलाश जारी है।
- आरोपी हर महीने नई वेबसाइट बनाते थे और विड्रॉल के नाम पर 'प्रोसेसिंग फीस' वसूलते थे।
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कैसे शुरू होता है ठगी का यह मायाजाल?
इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद प्रोफेशनल और सुनियोजित था। सबसे पहले ये ठग टेलीग्राम पर ग्रुप और चैनल बनाकर लोगों को 'वर्क फ्रॉम होम' और पार्ट-टाइम जॉब का लालच देते थे। इनका मुख्य निशाना वे लोग होते थे जो कम समय में ज्यादा पैसा कमाना चाहते थे।
शुरुआत में यूजर को बहुत आसान काम दिए जाते थे, जैसे किसी होटल को गूगल पर रेटिंग देना या किसी यूट्यूब वीडियो को लाइक करना। भरोसा जीतने के लिए ये लोग शुरू में कुछ सौ रुपये यूजर के खाते में ट्रांसफर भी कर देते थे। इससे यूजर को लगता था कि काम पूरी तरह असली है।
जब यूजर को विश्वास हो जाता था, तब असली खेल शुरू होता था। ठगों ने अपनी कई फर्जी वेबसाइटें बना रखी थीं, जहां यूजर को अपना अकाउंट बनाने के लिए कहा जाता था। यहां से ठगी का दूसरा चरण शुरू होता था जिसे 'इन्वेस्टमेंट टास्क' कहा जाता था।
दिखावटी मुनाफा और साइन अप बोनस
वेबसाइट पर रजिस्टर करते ही यूजर को 'साइन अप बोनस' के रूप में कुछ पैसे डिजिटल वॉलेट में दिखाई देते थे। इसके बाद उन्हें बड़े टास्क देने के नाम पर पैसे इन्वेस्ट करने को कहा जाता था। यूजर को अपनी ही स्क्रीन पर दिखता था कि उसका पैसा बढ़कर दोगुना या तिगुना हो गया है।
हकीकत में वह पैसा सिर्फ एक डिजिटल नंबर था, जिसे कभी निकाला नहीं जा सकता था। ठगों का मुख्य उद्देश्य यूजर को यह दिखाना था कि वह बहुत पैसा कमा रहा है, ताकि वह और अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित हो सके। यह एक तरह का मनोवैज्ञानिक जाल था।
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खुद ही बन जाते थे कस्टमर केयर अधिकारी
इस गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि इन्होंने बाकायदा फर्जी हेल्पलाइन नंबर जारी कर रखे थे। जब कोई पीड़ित अपना पैसा निकालने (विड्रॉल) की कोशिश करता और उसे तकनीकी दिक्कत आती, तो वह इन नंबरों पर मदद के लिए फोन करता था।
फोन उठाने वाला व्यक्ति खुद को कंपनी का 'कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव' बताता था। वह मदद करने के बजाय पीड़ित को एक नए झांसे में फंसा लेता था। ठग कहते थे कि आपकी कमाई की रकम बहुत ज्यादा हो गई है, इसलिए इसे बैंक खाते में भेजने के लिए आपको 'प्रोसेसिंग फीस' देनी होगी।
वे अक्सर कहते थे कि रकम ज्यादा होने के कारण 'सर्विस चार्ज' या 'टैक्स' के रूप में कुछ और पैसे जमा करने होंगे। अपने जमा किए हुए लाखों रुपये वापस पाने की उम्मीद में लोग हजारों रुपये और इन ठगों के खातों में ट्रांसफर कर देते थे। अंत में ठग वेबसाइट बंद कर देते थे।
एक महीने में शटर डाउन करने की रणनीति
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से अपनी पहचान छुपाता था। ये लोग एक फर्जी वेबसाइट को केवल एक महीने तक ही चलाते थे। जैसे ही उस वेबसाइट के जरिए करोड़ों रुपये इकट्ठा हो जाते, ये उसे तुरंत बंद कर देते थे।
इसके बाद ये नए नाम और नई डोमेन के साथ फिर से नया शिकार तलाशना शुरू कर देते थे। यह खतरनाक खेल पिछले डेढ़ साल से चल रहा था। पुलिस का मानना है कि इस दौरान इन्होंने देशभर के सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया और करोड़ों की संपत्ति जमा की।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब नागौर एसपी रोशन मीणा को एक संदिग्ध मोबाइल नंबर के बारे में गुप्त सूचना मिली। पुलिस ने जब उस नंबर की लोकेशन ट्रेस की, तो वह मेड़ता सिटी की राधानगर कॉलोनी की निकली। थानाधिकारी धर्मेश दायमा के नेतृत्व में टीम ने 2 अप्रैल को छापेमारी की।
वहां से पुलिस ने मुख्य आरोपी गोपाल सिखवाल को गिरफ्तार किया। गोपाल के फोन की जांच करने पर 'प्राइम ऑरबिट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' नाम का एक टेलीग्राम चैनल मिला। पुलिस ने अब तक गोपाल सहित अनिल ढाका, प्रमेश सांगवा और सुनील सांगवा को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें। अगर कोई आपको घर बैठे रेटिंग देने के बदले पैसे देने का वादा करता है, तो वह फ्रॉड हो सकता है। अपनी निजी जानकारी और बैंक डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें। सतर्क रहकर ही साइबर ठगी से बचा जा सकता है।
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