जयपुर | राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम इतिहास रचा गया है।
राजस्थान में सौर ऊर्जा का महा-रिकॉर्ड: पीएम-कुसुम: राजस्थान में 4000 MW सौर ऊर्जा का नया कीर्तिमान
राजस्थान के 2.62 लाख किसानों को दिन में मिल रही बिजली, सौर ऊर्जा में रचा नया इतिहास।
HIGHLIGHTS
- राजस्थान में पीएम-कुसुम योजना के तहत कुल सौर ऊर्जा क्षमता 4,000 मेगावाट तक पहुंच गई है।
- राज्य में अब तक 1,808 संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे 2.62 लाख किसानों को लाभ मिल रहा है।
- कुसुम कम्पोनेंट-ए में राजस्थान पूरे देश में पहले स्थान पर और कम्पोनेंट-सी में तीसरे स्थान पर है।
- आखिरी 1,000 मेगावाट क्षमता हासिल करने में प्रदेश को मात्र ढाई महीने का रिकॉर्ड समय लगा है।
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प्रदेश में पीएम-कुसुम योजना के तहत स्थापित सौर संयंत्रों की क्षमता अब 4,000 मेगावाट के स्तर को छू गई है।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के मार्गदर्शन में पिछले ढाई वर्षों में राजस्थान ने इस योजना में शानदार सफलता अर्जित की है।
पूर्ववर्ती सरकार के समय जहाँ मात्र 122 मेगावाट के 92 प्लांट थे, अब प्रदेश के गांव-ढाणी में 1,808 संयंत्र लग चुके हैं।
किसानों के जीवन में आई नई सौर रोशनी
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कुसुम योजना के माध्यम से राजस्थान के करीब 2.62 लाख किसानों को कृषि के लिए दिन में बिजली मिल रही है।
खेतों के समीप अनुपजाऊ भूमि पर लग रहे ये 5 मेगावाट तक के संयंत्र कृषि आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं।
इससे न केवल किसानों को लाभ हो रहा है, बल्कि विद्युत वितरण निगमों को भी काफी सस्ती बिजली मिल रही है।
राजस्थान कुसुम कम्पोनेंट-ए में देशभर में सर्वोच्च स्थान पर है, जो प्रदेश की ऊर्जा नीति की सफलता का प्रमाण है।
वहीं कम्पोनेंट-सी में राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के बाद देश में तीसरे स्थान पर मजबूती से खड़ा है।
रिकॉर्ड समय में हासिल किया बड़ा लक्ष्य
प्रदेश में कुसुम योजना के क्रियान्वयन को पिछले कुछ महीनों में बहुत ही जबरदस्त और अभूतपूर्व गति मिली है।
पहले 1,000 मेगावाट क्षमता के स्तर तक पहुंचने में राजस्थान को लगभग 48 महीने का लंबा समय लगा था।
इसके बाद विकास की रफ्तार बढ़ी और अगले 1,000 मेगावाट हासिल करने में मात्र 5 महीने का समय लगा।
3,000 मेगावाट का आंकड़ा छूने में 4 महीने और 4,000 मेगावाट तक पहुँचने में मात्र ढाई महीने लगे हैं।
अकेले मार्च महीने में ही 543 मेगावाट के संयंत्र स्थापित हुए, जो योजना शुरू होने के बाद का मासिक रिकॉर्ड है।
"सौर ऊर्जा संयंत्रों से राज्य के विद्युत वितरण निगमों को सस्ती बिजली मिल रही है और सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है।"
भविष्य की योजनाएं और बड़े लक्ष्य
केंद्र सरकार ने राजस्थान को कुसुम योजना के तहत कुल 10.7 गीगावाट की सौर परियोजनाओं को स्वीकृति दी है।
इन सभी परियोजनाओं के लिए शत-प्रतिशत बिजली खरीद अनुबंध (PPA) पहले ही सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।
इन परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अनुमान है कि अब हर महीने 500 मेगावाट से एक गीगावाट तक की नई सौर परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।
राजस्थान डिस्कॉम्स ने अक्टूबर 2026 तक शेष 6,700 मेगावाट क्षमता सृजित करने का लक्ष्य तय किया है।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भर राजस्थान की ओर कदम
सौर ऊर्जा का यह बढ़ता दायरा राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।
यह विकास न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई और ठोस मजबूती दे रहा है।
किसानों की खुशहाली और सस्ती बिजली का यह संगम आने वाले समय में राजस्थान को देश का सिरमौर बनाएगा।
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