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राजस्थान

सलूंबर में रहस्यमयी बीमारी का कहर: राजस्थान के सलूंबर में रहस्यमयी बीमारी का तांडव: 5 बच्चों की मौत से मचा हड़कंप, सीएम भजनलाल शर्मा ने दिए जांच के सख्त आदेश

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राजस्थान के सलूंबर जिले में एक अज्ञात बीमारी ने कोहराम मचा रखा है, जहां महज एक हफ्ते के भीतर पांच मासूम बच्चों की जान चली गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं और स्वास्थ्य विभाग ने 52 हजार घरों का सर्वेक्षण शुरू किया है।

HIGHLIGHTS

  • सलूंबर जिले के लसाड़िया उपखंड में रहस्यमयी बीमारी से 5 मासूमों की मौत हो गई है।
  • मृतकों में 2 से 4 साल के बच्चे शामिल हैं, जिनमें दो सगे भाई-बहन भी हैं।
  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विशेषज्ञों की टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं।
  • स्वास्थ्य विभाग की 3,690 टीमों ने 52 हजार घरों का सर्वे कर 275 संदिग्ध मरीज ढूंढे हैं।
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सलूंबर | राजस्थान के नवगठित सलूंबर जिले से एक बेहद हृदयविदारक और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। यहां बीते कुछ दिनों से एक अज्ञात और रहस्यमयी बीमारी का साया मंडरा रहा है, जिसने देखते ही देखते पांच मासूमों की जान ले ली है। इस घटना के बाद से पूरे लसाड़िया उपखंड में डर और मातम का माहौल बना हुआ है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, यह बीमारी इतनी घातक है कि बच्चों को संभलने का मौका भी नहीं मिल रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खुद इस पर संज्ञान लिया और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी घटना सलूंबर जिले के लसाड़िया उपखंड के अंतर्गत आने वाले लालपुरा और घाटा गांव की है। यहां पिछले 5 से 7 दिनों के भीतर अचानक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, बच्चों में तेज बुखार और लगातार उल्टी जैसे लक्षण देखे गए थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लक्षण दिखने के महज 24 घंटे के भीतर ही बच्चों की मृत्यु हो गई। इस रहस्यमयी बीमारी ने अब तक पांच परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं। मृतकों में 2 साल से लेकर 4 साल तक के मासूम बच्चे शामिल हैं, जो इस घातक संक्रमण का शिकार बने।

मृतक बच्चों की पहचान

लालपुरा गांव में इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। यहां एक ही परिवार के दो मासूमों की मौत से कोहराम मच गया है। मृतकों की पहचान लालपुरा गांव के 4 वर्षीय दीपक और उसके 3 वर्षीय छोटे भाई लक्ष्मण के रूप में हुई है। इन दोनों सगे भाइयों की मौत ने गांव को झकझोर दिया है। इसके अलावा लालपुरा की ही 4 साल की बच्ची सीमा ने भी इस अज्ञात बीमारी के कारण दम तोड़ दिया। घाटा गांव में भी स्थिति उतनी ही गंभीर बनी हुई है। घाटा गांव के 4 वर्षीय राहुल और 2 वर्षीय मासूम काजल की भी इसी तरह के लक्षणों के बाद मौत हो गई। इन मौतों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री का कड़ा रुख

सलूंबर में बच्चों की मौत के मामले की गूंज अब राजधानी जयपुर तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को तुरंत हरकत में आने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित कर मौके पर भेजने को कहा है। सीएम के निर्देश पर अब यह टीम बीमारी के कारणों का पता लगाने में जुटी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग का महा-सर्वेक्षण

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि विभाग ने उदयपुर संभाग में बड़े पैमाने पर सर्वे शुरू किया है। जानकारी के अनुसार, करीब 3,690 स्वास्थ्य टीमों को मैदान में उतारा गया है। इन टीमों ने अब तक 52 हजार से अधिक घरों का सघन सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। इस विस्तृत सर्वे के दौरान विभाग को इस रहस्यमयी बीमारी के लक्षणों वाले करीब 275 मरीज मिले हैं। इन मरीजों की निगरानी की जा रही है और उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं। सर्वे में मिले मरीजों में से 25 की हालत गंभीर बताई जा रही है। इन 25 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया गया है।

अस्पतालों में भर्ती अन्य बच्चे

केवल पांच मौतों तक ही यह मामला सीमित नहीं है। सलूंबर और उदयपुर के विभिन्न अस्पतालों में 8 अन्य बच्चों का इलाज अभी भी जारी है। डॉक्टरों की टीम इन बच्चों को बचाने के लिए दिन-रात एक कर रही है। इन बच्चों में भी वही लक्षण पाए गए हैं जो मृतक बच्चों में देखे गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक लैब रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक बीमारी के सटीक नाम के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

नमूनों की जांच और मेडिकल कॉलेज की भूमिका

बीमारी की पहचान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों के रक्त के नमूने और अन्य जरूरी सैंपल लिए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ अब इन सैंपल्स की सूक्ष्मता से जांच कर रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा कि यह कोई वायरल इंफेक्शन है या कोई नया बैक्टीरिया। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि अगले 24 से 48 घंटों में रिपोर्ट आ जाएगी। इसके बाद ही इलाज के प्रोटोकॉल में जरूरी बदलाव किए जा सकेंगे।

ग्रामीणों में फैला भारी आक्रोश

बच्चों की मौत के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों के समय अगर सही इलाज मिलता तो बच्चों को बचाया जा सकता था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है। उपखंड स्तर के अस्पतालों में विशेषज्ञों और जरूरी उपकरणों का अभाव हमेशा बना रहता है। हालांकि, प्रशासन अब ग्रामीणों को शांत करने और उन्हें जागरूक करने की कोशिश कर रहा है। गांवों में मुनादी करवाकर लोगों को अलर्ट रहने को कहा जा रहा है।

प्रशासन की जनता से अपील

सलूंबर जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं बल्कि सतर्क रहें। अगर किसी भी बच्चे को बुखार, उल्टी या दस्त की शिकायत हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। प्रशासन ने कहा है कि लोग घरेलू उपचार या नीम-हकीमों के चक्कर में समय बर्बाद न करें। समय पर अस्पताल पहुंचने से जान बचाई जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब घर-घर जाकर क्लोरीन की गोलियां बांट रही हैं और पानी के स्रोतों की भी जांच की जा रही है ताकि जलजनित रोगों की संभावना को कम किया जा सके।

क्षेत्र में सफाई अभियान और फॉगिंग

बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए लसाड़िया उपखंड के गांवों में व्यापक सफाई अभियान चलाया जा रहा है। नालियों में कीटनाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। प्रशासन ने नगर परिषद और स्थानीय पंचायतों को निर्देश दिए हैं कि वे जलभराव वाले स्थानों को तुरंत खाली करवाएं। मच्छरों के पनपने से रोकने के लिए फॉगिंग भी करवाई जा रही है। विशेषज्ञों की एक टीम पानी के सैंपल्स की भी जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कहीं यह दूषित पानी की वजह से तो नहीं हो रहा है।

क्या यह मौसमी बीमारी है?

राजस्थान में मानसून के बाद अक्सर मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। डेंगू, मलेरिया और स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियां इस मौसम में आम होती हैं। लेकिन सलूंबर का यह मामला इसलिए अलग है क्योंकि इसमें मृत्यु दर बहुत अधिक और तेज है। मात्र 24 घंटे में मौत होना किसी गंभीर संक्रमण की ओर इशारा करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का एक दल इस बात की भी जांच कर रहा है कि कहीं यह दिमागी बुखार या 'चांदीपुरा वायरस' जैसा कुछ तो नहीं है।

आगे की रणनीति और सतर्कता

आने वाले कुछ दिन सलूंबर और आसपास के जिलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे संभाग में अलर्ट जारी कर दिया है। आसपास के जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में संदिग्ध मरीजों पर कड़ी नजर रखें। विशेषज्ञों की टीम अब स्थानीय वातावरण और खान-पान की आदतों का भी अध्ययन कर रही है। ताकि इस रहस्यमयी बीमारी की जड़ तक पहुंचा जा सके।

निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति

फिलहाल सलूंबर के उन गांवों में सन्नाटा पसरा है जहां बच्चों की मौत हुई है। लोग अपने बच्चों को घरों से बाहर निकालने में भी डर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और नई मौतों की कोई खबर नहीं है। लेकिन अस्पताल में भर्ती बच्चों की सलामती के लिए हर कोई दुआ कर रहा है। यह घटना एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी त्रासदी को समय रहते रोका जा सके। सरकार और प्रशासन अब रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं ताकि इस 'मिस्ट्री डिजीज' का पर्दाफाश हो सके और उचित कदम उठाए जा सकें।

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