जयपुर | राजस्थान में कुदरत का दोहरा रूप देखने को मिल रहा है। एक तरफ गर्मी दस्तक दे रही थी, तो दूसरी तरफ एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। सोमवार रात को शेखावाटी, नागौर और कोटा के इलाकों में अचानक हुई ओलावृष्टि ने तबाही मचा दी। इस बेमौसम मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है और भारी नुकसान पहुंचाया है।
राजस्थान में ओले और बारिश का कहर: राजस्थान में मौसम का तांडव: ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान, 6 डिग्री गिरा पारा, जानें अप्रैल का पूरा हाल
राजस्थान में एक्टिव वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से नागौर और कोटा समेत कई जिलों में ओले गिरे हैं। इससे तापमान में भारी गिरावट आई है और किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
HIGHLIGHTS
- नागौर, डीडवाना और कोटा में भारी ओलावृष्टि से रबी की फसलों को हुआ भारी नुकसान।
- राजस्थान के कई शहरों में अधिकतम तापमान में 2 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट।
- कोटा में सबसे अधिक 20MM बारिश दर्ज की गई, जबकि अलवर में भी हुई बूंदाबांदी।
- मौसम विभाग ने अप्रैल के पहले सप्ताह में भी बारिश और आंधी का यलो अलर्ट जारी किया।
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फसलों पर ओलावृष्टि की मार
नागौर जिले के डेगाना, सांजू, ढेहरू और चुई जैसे गांवों में देर रात जमकर ओले बरसे। यहां रबी की फसलें, विशेषकर ईसबगोल और गेहूं, कटने के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी थीं। स्थानीय किसानों के अनुसार, अचानक हुई इस ओलावृष्टि से फसलें खेतों में ही बिछ गई हैं। ओलों का आकार इतना बड़ा था कि खड़ी फसलों के दाने झड़ गए। प्रशासन अब नुकसान के आकलन में जुट गया है। डीडवाना-कुचामन जिले के मकराना, मनाना और गच्छीपुरा क्षेत्रों में भी यही हाल रहा। यहां खेतों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई, जिससे किसानों को इस साल भारी आर्थिक चपत लगने की आशंका है।
तापमान में आई भारी गिरावट
मौसम में आए इस बड़े बदलाव का असर तापमान पर भी साफ देखा गया। जयपुर, सीकर, चूरू, पिलानी और अलवर जैसे शहरों में पारा 2 से 6 डिग्री सेल्सियस तक नीचे लुढ़क गया है। भीषण गर्मी की मार झेल रहे लोगों को इस ठंडी हवा और बारिश से फिलहाल राहत मिली है। कोटा और चित्तौड़गढ़ में अधिकतम तापमान 37 डिग्री दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी कम है।
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कोटा में रिकॉर्ड तोड़ बारिश
पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर गौर करें तो कोटा में सबसे अधिक 20 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। अचानक हुई तेज बारिश से शहर की निचली बस्तियों में पानी भर गया और जनजीवन प्रभावित हुआ। वहीं, अलवर के कोटकासिम में 5MM और टपूकड़ा में 3MM बारिश रिकॉर्ड की गई। झुंझुनूं और पिलानी में भी ठंडी हवाओं के साथ हल्की बूंदाबांदी का दौर जारी रहा, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई है।
अप्रैल में कैसा रहेगा मौसम?
मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, राजस्थान में एक्टिव वेदर सिस्टम का असर अप्रैल में भी बना रहेगा। मंगलवार को सीकर और झुंझुनूं सहित 7 जिलों में बारिश और आंधी का यलो अलर्ट जारी किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में भी रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। हालांकि, दो-तीन दिनों के बाद इस सिस्टम का असर धीरे-धीरे कम होने लगेगा और फिर गर्मी बढ़ेगी।
गर्मी की होगी वापसी
जैसे ही यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का असर खत्म होगा, राजस्थान में एक बार फिर सूरज के तेवर तल्ख होंगे। मौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते से लू का प्रकोप शुरू हो सकता है। फिलहाल, किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें। मौसम विभाग की पल-पल की अपडेट पर नजर बनाए रखना किसानों के लिए बेहद जरूरी है।
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