जयपुर | राजस्थान में मौसम एक बार फिर अपनी चाल बदलने के लिए तैयार है। चिलचिलाती धूप के बीच अब बादलों की आवाजाही ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से आने वाले दो दिन काफी उथल-पुथल भरे हो सकते हैं। वर्तमान में एक चक्रवाती परिसंचरण मध्य पाकिस्तान और उससे सटे पंजाब क्षेत्र के ऊपर बना हुआ है। यह धीरे-धीरे राजस्थान की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में उप-उष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम भी काफी सक्रिय है। यह हवाएं मध्य और पूर्वी भारत के ऊपर तेज गति से बह रही हैं। इन दोनों प्रणालियों के मिलन से राजस्थान के मौसम में भारी अस्थिरता पैदा होने की संभावना है। विभाग ने इसके लिए बकायदा येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। आज यानी 5 अप्रैल को जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में हल्की हलचल देखी जा सकती है। यहां कहीं-कहीं मेघगर्जन के साथ हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि, राज्य के बाकी हिस्सों में शुक्रवार को मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा। लेकिन यह शांति आने वाले बड़े तूफान का संकेत मात्र है। शनिवार, 6 अप्रैल से मौसम का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। एक नया और अधिक प्रभावी पश्चिमी विक्षोभ प्रदेश की सीमा में प्रवेश करेगा। इस सिस्टम का सबसे ज्यादा असर जोधपुर, बीकानेर और अजमेर संभाग में दिखाई देगा। इन क्षेत्रों में दोपहर के बाद अचानक अंधेरा छा सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलेगी। यह आंधी काफी विनाशकारी हो सकती है। आंधी के साथ-साथ तेज बारिश और बिजली चमकने की भी प्रबल संभावना है। कुछ संवेदनशील इलाकों में ओलावृष्टि यानी ओले गिरने की भी चेतावनी दी गई है। शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों में भी मौसम का मिजाज बिगड़ेगा। यहां भी तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जिलों में भी धूल के गुबार उठ सकते हैं। इससे दृश्यता (विजिबिलिटी) कम होने का खतरा बना रहेगा। किसानों के लिए यह समय काफी नाजुक है। रबी की फसलों की कटाई और थ्रेसिंग का काम जोरों पर है। ऐसे में ओलावृष्टि फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसान कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें। खुले आसमान में रखी उपज भीगने से खराब हो सकती है। तापमान के मोर्चे पर, इस मौसमी बदलाव से गर्मी से थोड़ी राहत मिलेगी। अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की उम्मीद है। लेकिन हवा में नमी बढ़ने से उमस का अहसास ज्यादा होगा। यह विक्षोभ 7 अप्रैल को भी प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में अपना प्रभाव बनाए रखेगा। जयपुर शहर में भी शनिवार रात और रविवार सुबह हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। ठंडी हवाओं के चलने से सुबह-शाम का मौसम खुशनुमा हो जाएगा। आम जनता को सलाह दी गई है कि वे आंधी के समय बिजली के उपकरणों का प्रयोग सावधानी से करें। पेड़ों और जर्जर इमारतों से दूर रहना ही सुरक्षित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में कम दबाव के क्षेत्र बनने से ऐसे विक्षोभ बार-बार आ रहे हैं। राजस्थान के आपदा प्रबंधन विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की हिदायत दी गई है। कुल मिलाकर, 6 और 7 अप्रैल को राजस्थान के निवासियों को प्रकृति के इस बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए। सुरक्षित रहें और मौसम की खबरों पर नजर रखें। राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ का यह दौर सोमवार तक शांत होने की उम्मीद है। उसके बाद फिर से तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी और गर्मी बढ़ेगी।