एडिनबर्ग | दुनिया में कई जांबाज सैनिक देखे होंगे, लेकिन क्या कभी किसी पेंगुइन को कर्नल के ऊंचे पद पर आसीन होते देखा है? एडिनबर्ग जू का 'सर निल्स ओलाव' कोई साधारण पक्षी नहीं है।
कर्नल पेंगुइन की अनोखी कहानी: पेंगुइन बना सेना का कर्नल, मिलती है शाही सलामी
एडिनबर्ग जू के पेंगुइन सर निल्स ओलाव को नॉर्वे की सेना में मिला कर्नल का पद।
HIGHLIGHTS
- एडिनबर्ग जू का किंग पेंगुइन 'सर निल्स ओलाव' नॉर्वे की सेना में कर्नल-इन-चीफ है।
- इसे साल 2008 में नॉर्वे के राजा द्वारा नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
- पेंगुइन और नॉर्वेजियन किंग्स गार्ड का यह खास रिश्ता 1970 के दशक से चला आ रहा है।
- जब भी सेना का दल जू पहुंचता है, पेंगुइन को गार्ड ऑफ ऑनर और शाही सलामी दी जाती है।
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पेंगुइन और सेना का अनूठा रिश्ता
सर निल्स ओलाव एक किंग पेंगुइन हैं जो स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग जू में रहते हैं। उनका नॉर्वे की किंग्स गार्ड से रिश्ता 1970 के दशक में शुरू हुआ था।
उस समय नॉर्वे की सेना का एक दल स्कॉटलैंड के दौरे पर गया था। सैनिकों ने इस पेंगुइन की मासूमियत और अनुशासन को देखते हुए उसे गोद लिया और अपना शुभंकर बनाया।
इसका नाम नॉर्वे के राजा और एक सेना अधिकारी के नाम पर 'निल्स ओलाव' रखा गया था। तब से जब भी नॉर्वेजियन किंग्स गार्ड स्कॉटलैंड आता है, वह अपने साथी से जरूर मिलता है।
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प्रमोशन से लेकर नाइटहुड तक का सफर
सर निल्स का सफर सिर्फ शुभंकर तक ही सीमित नहीं रहा। समय के साथ उन्हें सेना में बाकायदा प्रमोशन भी मिलता गया। वे कॉर्पोरल से सार्जेंट और फिर ऊंचे रैंक तक पहुंचे।
साल 2008 में इस अनोखे पेंगुइन को नॉर्वे के राजा ने 'नाइट' की उपाधि से नवाजा। उन्हें औपचारिक तलवार से सम्मानित किया गया, जो आमतौर पर महान सेवाओं के लिए दी जाती है।
यह सम्मान पेंगुइन को सेना और जनता के बीच गहरी दोस्ती का प्रतीक बनने के लिए मिला। आज वह सेना में 'कर्नल-इन-चीफ' के सबसे प्रतिष्ठित पद पर तैनात हैं।
शाही परेड और फौजी सलामी
जब भी सेना का दल जू पहुंचता है, वहां एक शानदार परेड आयोजित की जाती है। पेंगुइन के सामने सैनिक कतार में खड़े होकर उसे पूरे सम्मान के साथ सलामी देते हैं।
"सर निल्स ओलाव सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और अटूट अंतरराष्ट्रीय दोस्ती का सबसे बड़ा और जीवित प्रतीक बन चुके हैं।"
यह नजारा देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक स्कॉटलैंड आते हैं। पेंगुइन भी पूरी गंभीरता के साथ सैनिकों का निरीक्षण करता है, जैसे वह सचमुच का कोई बड़ा सैन्य अधिकारी हो।
उनकी वर्दी पर लगे पदक और उनकी चाल-ढाल किसी भी अनुशासन प्रिय सैनिक से कम नहीं लगती। यह पेंगुइन अब सेना के इतिहास का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
दोस्ती और परंपरा का वैश्विक संदेश
सर निल्स ओलाव की यह अद्भुत कहानी हमें सिखाती है कि सम्मान और रिश्तों के लिए इंसान होना ही जरूरी नहीं है। वफादारी और परंपरा किसी भी जीव को महान बना सकती है।
आज यह पेंगुइन न केवल नॉर्वे और स्कॉटलैंड के बीच के कूटनीतिक रिश्तों को मजबूत कर रहा है, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा और खुशी का स्रोत भी बना हुआ है।
बिना हथियार उठाए और बिना युद्ध लड़े, इस पेंगुइन ने जो सम्मान हासिल किया है, वह दुनिया के सैन्य इतिहास में शायद ही किसी और को मिला होगा।
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