सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक सरपंच पर करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जा करने और फिर उसे अपने ही परिवार वालों को बांटने का गंभीर आरोप लगा है। ये वही सरपंच हैं जो इसी जमीन के फर्जीवाड़े में 29 दिन जेल में भी रह चुके हैं।
सरपंच का 'पट्टा' घोटाला: जेल से आकर सरपंच ने परिवार को बांटी सरकारी जमीन
सिरोही में सरपंच पर करोड़ों की सरकारी जमीन हड़पने का आरोप। जेल से छूटने के बाद परिवार में ही बांट दिए फर्जी पट्टे।
HIGHLIGHTS
- सरपंच पर 6840 स्क्वायर फीट सरकारी जमीन हड़पने का आरोप।
- फर्जी पट्टा मामले में 29 दिन जेल में बिताए।
- जेल से लौटकर विवादित जमीन परिवार के नाम कर दी।
- नियमों के खिलाफ जाकर अपने ही रिश्तेदारों को पट्टे जारी किए।
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क्या है पूरा 'फर्जी पट्टा' घोटाला?
मामला सिरोही जिले की रोहिड़ा ग्राम पंचायत का है। यहां के ग्रामीणों ने वर्तमान सरपंच पवन राठौड़ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिकायतकर्ता रतन लाल रावल और अन्य लोगों का आरोप है कि सरपंच ने अपने पद और राजनीतिक रसूख का गलत इस्तेमाल किया है।
आरोप है कि सरपंच पवन राठौड़ ने वासा रोड पर स्थित 6840 स्क्वायर फीट की कीमती सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया।
जब ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से की, तो एक जांच कमेटी बनाई गई। विकास अधिकारी (BDO) ने तीन सदस्यों की कमेटी गठित की, जिसने अपनी जांच में अतिक्रमण को सही पाया।
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जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया कि 6840 स्क्वायर फीट जमीन पर सरपंच ने अवैध कब्जा किया है। इसके बाद राज्य सरकार को सरपंच को निलंबित करने के लिए एक पत्र भी लिखा गया था।
फर्जीवाड़े में खानी पड़ी जेल की हवा
कहानी में असली मोड़ तब आया जब सरपंच ने इस अवैध कब्जे वाली जमीन पर बिजली का कनेक्शन लेने की कोशिश की।
इसके लिए उन्होंने बिजली विभाग में साल 1986 का एक फर्जी पट्टा जमा करा दिया। जब पट्टे की जांच हुई तो पूरा फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ गया।
जिस व्यक्ति के नाम का यह पट्टा था, उसके बेटे ने पुलिस में सरपंच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने जांच की और सरपंच पवन राठौड़ और उनके पिता को दोषी पाया।
गिरफ्तारी के डर से सरपंच एक शोक सभा में जाने का बहाना बनाकर गुजरात के सोमनाथ भाग गए। लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं। रोहिड़ा पुलिस ने सोमनाथ पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस धोखाधड़ी के जुर्म में सरपंच को 29 दिन जेल की सलाखों के पीछे बिताने पड़े।
जेल से लौटकर, नियमों को रखा ताक पर
ग्रामीणों का आरोप है कि जेल से बाहर आने के बाद सरपंच ने अपनी सत्ता का और भी ज्यादा दुरुपयोग किया।
उन्होंने उसी 6840 स्क्वायर फीट की विवादित जमीन का बंटवारा कर दिया। ये बंटवारा किसी और में नहीं, बल्कि अपने ही परिवार के सदस्यों के बीच किया गया।
सरपंच ने अपनी मां अंबा देवी, पिता चौपाराम, भाई भरत और चाचा के परिवार के लोगों के नाम पर पुश्तैनी पट्टे जारी कर दिए। यह सब धारा 157 के तहत किया गया, जो कि पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
कानून की खुली अवहेलना
नियम साफ कहते हैं कि पुश्तैनी पट्टा जारी करने के लिए जमीन पर कम से कम 50 साल पुराना कब्जा होना जरूरी है।
लेकिन इस जमीन के लिए तो खुद ग्रामीणों ने 1989-91 में आंदोलन किया था, तो 50 साल का कब्जा कैसे हो सकता है?
सबसे बड़ी बात, पंचायती राज का नियम यह भी कहता है कि कोई भी सरपंच अपने परिवार के सदस्यों को पट्टे जारी नहीं कर सकता। सरपंच ने इस नियम की भी धज्जियां उड़ा दीं।
RTI फेल, अमीरों पर मेहरबानी
रोहिड़ा पंचायत में भ्रष्टाचार यहीं नहीं रुकता। यहां सूचना का अधिकार कानून (RTI) भी बेअसर है।
जब कोई ग्रामीण पट्टों की नकल मांगता है, तो पंचायत सचिव का एक ही जवाब होता है।
जब सरपंच साहब का आदेश होगा, तभी जानकारी दी जाएगी।
आरोप यह भी है कि पंचायत में करोड़ों की सरकारी जमीन अपने चहेतों को मुफ्त में बांटी जा रही है। जिन लोगों के पास कार, फार्म हाउस और कुएं हैं, और जो इनकम टैक्स भरते हैं, उन्हें गरीब बताकर BPL पट्टे दिए जा रहे हैं।
अब गांव के लोगों ने जिला प्रशासन से इस पूरे घोटाले में दखल देने की मांग की है। वे चाहते हैं कि करोड़ों की सरकारी जमीन को बचाया जाए और भ्रष्ट सरपंच के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो।
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