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राज्य

थिंक 360 की खबर का असर: महेश की मदद को बढ़े हाथ, प्रशासन ने दिखाई संवेदनशीलता

गणपत सिंह मांडोली

सिरोही में थिंक 360 की खबर के बाद प्रशासन, भामाशाह और डीएलएसए महेश की मदद के लिए आगे आए, जो अपनी विमंदित बेटी के साथ संघर्ष कर रहे हैं।

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HIGHLIGHTS

  • थिंक 360 पर खबर प्रसारित होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और संज्ञान लिया।
  • जिला कलेक्टर, भामाशाह और समाजसेवी महेश के परिवार की मदद के लिए आगे आए।
  • डीएलएसए ने महेश की बेटी के सुरक्षित भविष्य और महेश को नौकरी दिलाने की पहल की।
  • परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।


सिरोही। भाटकड़ा निवासी महेश की दर्दभरी कहानी सामने आने के बाद अब मदद के हाथ बढ़ने लगे हैं। थिंक 360 पर खबर प्रसारित होने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद भामाशाहों और समाजसेवियों ने भी महेश के परिवार की मदद के लिए आगे बढ़कर पहल की।

महेश की जिंदगी पिछले करीब दस वर्षों से संघर्षों से घिरी हुई है। बीमारी के कारण करीब दस साल पहले उसकी पत्नी की मौत हो गई। इसके बाद उसके दो बच्चों की भी मौत हो गई। अब 20 वर्षीय विमंदित बेटी ही महेश का एकमात्र सहारा है। बेटी को अकेला छोड़कर दूर जाकर मजदूरी करना उसके लिए संभव नहीं है। ऐसे में कभी-कभार मिलने वाली मजदूरी और इंदिरा रसोई के भोजन से दोनों का गुजारा चल रहा है। जर्जर कमरे में पिता-पुत्री मुश्किल हालात में जीवन गुजार रहे हैं।

डीएलएसए सचिव पहुंचीं महेश के घर

मामले की जानकारी मिलने के बाद विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सावित्री आनंद भी महेश के घर पहुंचीं। उन्होंने पीड़ित परिवार से बातचीत कर उनकी स्थिति जानी और संबंधित अधिकारियों को परिवार के दस्तावेजों में जो भी कमियां हैं, उन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही आवश्यक प्रमाण पत्र शीघ्र जारी करवाने की दिशा में कार्रवाई के लिए कहा।

बेटी के सुरक्षित भविष्य की भी पहल

डीएलएसए सचिव सावित्री आनंद ने महेश को उसकी 20 वर्षीय बेटी के भविष्य को लेकर भी भरोसा दिलाया। उन्होंने सुझाव दिया कि बेटी को संस्कार विशेष आवासीय विद्यालय मंडार में रखा जा सकता है, जहां उसकी देखभाल और अन्य बच्चों के साथ रहने की व्यवस्था होगी। इससे वह धीरे-धीरे वहां के माहौल में समायोजित हो सकेगी।

वहीं महेश को भी केंद्र में गार्ड की नौकरी दिलाने की पहल की जा रही है, ताकि वह अपनी बेटी के आसपास रह सके और उसकी देखभाल भी अपनी आंखों के सामने कर सके। इससे एक ओर बेटी को सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा, वहीं महेश के लिए रोजगार का भी रास्ता खुल सकता है।

सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की कवायद

समाज कल्याण विभाग की ओर से भी परिवार को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन की इस पहल से लंबे समय से संघर्ष कर रहे महेश और उसकी बेटी के जीवन में उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है।

थिंक 360 की खबर के बाद जिस तरह प्रशासन, विधिक सेवा प्राधिकरण, भामाशाह और समाजसेवी आगे आए हैं, उससे यह उम्मीद जगी है कि महेश और उसकी बेटी को अब अकेले संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।

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