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राजनीति

मंत्री जी की 99 लाख की सब्सिडी!: केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी पर 99 लाख की सब्सिडी का आरोप

बलजीत सिंह शेखावत

अपने ही मंत्रालय के बोर्ड से कृषि सब्सिडी लेने पर उठे सवाल, विपक्ष ने इसे हितों के टकराव का मामला बताया।

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HIGHLIGHTS

  • केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी पर 99 लाख की सब्सिडी लेने का आरोप।
  • सब्सिडी उनके ही मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) से मंजूर हुई।
  • विपक्ष ने इसे हितों के टकराव का मामला बताते हुए मंत्री पर निशाना साधा है।
  • मंत्री ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे नियमानुसार लिया गया लाभ बताया है।
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अजमेर | राजस्थान के अजमेर से सांसद और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी एक बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गए हैं। उन पर अपने ही मंत्रालय के अधीन आने वाले एक बोर्ड से 99 लाख रुपये से अधिक की कृषि सब्सिडी लेने का आरोप लगा है, जिसे विपक्ष ने 'हितों का टकराव' बताया है।

क्या है 99 लाख की सब्सिडी का पूरा विवाद?

यह पूरा मामला मंत्री भागीरथ चौधरी द्वारा अपने निजी फार्महाउस पर एक हाई-टेक कृषि प्रोजेक्ट के लिए सरकारी सब्सिडी लेने से जुड़ा है। इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) से मंजूरी मिली थी।

विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड सीधे केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आता है। भागीरथ चौधरी स्वयं इस मंत्रालय में राज्य मंत्री होने के नाते बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष की श्रेणी में आते हैं।

विपक्ष ने उठाए नैतिकता पर सवाल

विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि जिस विभाग के मंत्री खुद मुखिया हैं, उसी विभाग से उनके निजी व्यावसायिक प्रोजेक्ट को इतनी बड़ी सरकारी राशि का आवंटन मिलना नैतिक और कानूनी रूप से गलत है।

प्रोजेक्ट की लागत और फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा प्रोजेक्ट डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में खीरा उत्पादन के लिए लगाया गया है। इस पॉलीहाउस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 1.99 करोड़ रुपये बताई गई है।

इसमें से मंत्री ने 49.8 लाख रुपये का निवेश अपनी ओर से किया, जबकि 1.49 करोड़ रुपये का लोन एचडीएफसी बैंक से लिया गया। सरकार द्वारा स्वीकृत 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी सीधे उनके बैंक लोन खाते में जमा की गई।

रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस प्रोजेक्ट की सैद्धांतिक मंजूरी के आवेदन को प्रशासनिक स्तर पर मात्र 14 दिनों के भीतर ही क्लियर कर दिया गया था, जो प्रक्रिया की तेजी पर सवाल खड़े करता है।

मंत्री भागीरथ चौधरी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से नियमानुसार लिया गया लाभ बताया है और किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।

इस मामले ने एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। जहां मंत्री और सरकार इसे नियमों के तहत बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण मानकर जांच की मांग कर रहा है। यह प्रकरण सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए नैतिक आचरण के मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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