कोलकाता | पश्चिम बंगाल में दो चरणों के मतदान को लेकर चुनाव प्रचार अब अपने चरम पर पहुंच गया है। सभी राजनीतिक दल महिला वोटरों को लुभाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
प्रदेश की सत्ता तक पहुंचने के लिए महिलाएं सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। यही कारण है कि बीजेपी और टीएमसी दोनों ने ही अपनी कल्याणकारी योजनाओं का पिटारा खोल दिया है।
बंगाल चुनाव: महिला वोटरों की जंग: पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता के 'लक्ष्मी भंडार' के सामने बीजेपी की 'मातृ शक्ति वंदन', महिला वोटरों को लुभाने की बड़ी जंग
पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार चरम पर है, जहां बीजेपी और टीएमसी महिला वोटरों को लुभाने के लिए बड़ी घोषणाएं कर रही हैं। पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है।
HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण रोकने का आरोप लगाया।
- बीजेपी ने 'मातृ शक्ति वंदन' योजना के तहत महिलाओं को 3000 रुपये देने का वादा किया।
- टीएमसी की 'लक्ष्मी भंडार' योजना बंगाल की महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय है।
- टीएमसी ने 52 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी ने केवल 33 को उतारा।
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पीएम मोदी का विपक्ष पर तीखा हमला
पीएम नरेंद्र मोदी ने हालिया रैली में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने ममता बनर्जी को महिला विरोधी बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीएम ने कहा कि टीएमसी नहीं चाहती थी कि बंगाल की बेटियां विधायक और सांसद बनें। उनके अनुसार, टीएमसी और कांग्रेस ने मिलकर महिलाओं के 33% आरक्षण को रोकने की साजिश रची।
बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में गरीब महिलाओं के लिए कई बड़े वादे किए हैं। पार्टी का लक्ष्य महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाकर उन्हें अपने पाले में लाना है।
बीजेपी के सामने बड़ी चुनौतियां
बीजेपी के लिए महिला वोटरों को साधना आसान नहीं है। ममता बनर्जी की 'लक्ष्मी भंडार' योजना ने 2021 के चुनाव में टीएमसी की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी।
इसके मुकाबले बीजेपी ने 'मातृ शक्ति वंदन' योजना के तहत 3000 रुपये देने का वादा किया है। हालांकि, ममता की 'बंगाल की बेटी' वाली छवि को तोड़ना बीजेपी के लिए कठिन चुनौती है।
पार्टी के पास फिलहाल ममता बनर्जी जैसा कोई स्थानीय चेहरा नहीं है। बंगाली अस्मिता और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनकर ममता ने महिलाओं के बीच अपनी गहरी पैठ बनाई है।
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मुस्लिम वोटर और महिला उम्मीदवार
बंगाल में मुस्लिम महिला वोटरों पर बीजेपी की पकड़ फिलहाल कम मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम महिलाओं का समर्थन टीएमसी की जीत का बड़ा आधार रहा है।
चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या भी एक बड़ा मुद्दा है। टीएमसी ने 52 महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया है, जबकि बीजेपी ने केवल 33 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है।
योजनाओं से बदलता चुनावी गणित
मध्य प्रदेश में 'लाड़ली बहना' और महाराष्ट्र में 'लाड़की बहिन' जैसी योजनाओं ने चुनाव परिणामों को बदला है। बीजेपी बंगाल में भी इसी रणनीति पर काम कर रही है।
हालांकि, टीएमसी पर महिलाओं की सुरक्षा न कर पाने के आरोप लग रहे हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले को लेकर बीजेपी ममता सरकार को घेरकर महिला सुरक्षा का मुद्दा उठा रही है।
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