Rajasthan: जनगणना में जाति नहीं बताने पर सजा, ट्रांसफर पर सवा साल रोक
राजस्थान (Rajasthan) में 1 जनवरी 2026 से डिजिटल जनगणना (Digital Census) शुरू। जातिगत जानकारी न देने पर सजा, काम से मना करने पर जेल। 2 लाख+ कर्मचारी, तबादलों पर सवा साल रोक।
जयपुर: राजस्थान (Rajasthan) में 1 जनवरी 2026 से डिजिटल जनगणना (Digital Census) शुरू। जातिगत जानकारी न देने पर सजा, काम से मना करने पर जेल। 2 लाख+ कर्मचारी, तबादलों पर सवा साल रोक।
प्रदेश में नए साल यानी 1 जनवरी 2026 से जनगणना का महत्वपूर्ण कार्य शुरू होने जा रहा है। यह प्रक्रिया लगभग सवा साल तक चलेगी और 2027 में पूरी होगी। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास होगी, क्योंकि यह पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसमें जातिगत जनगणना भी शामिल की जाएगी।
जनगणना को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और अधिकारियों का दावा है कि डिजिटलाइज्ड प्रक्रिया से कर्मचारियों को काफी आसानी होगी। क्षेत्रीय जनगणना निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने बताया कि जनगणना की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
जनगणना की विस्तृत जानकारी: डिजिटल और जातिगत
यह पहली बार होगा जब देश और प्रदेश में डिजिटल जनगणना की जाएगी। जनगणना के काम में लगे कर्मचारियों को टैब दिए जाएंगे, जिसके जरिए वे मौके पर ही ऑनलाइन ब्योरा अपडेट कर सकेंगे।
इस बार जातिगत जनगणना भी होगी, जिसमें जाति के बारे में पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति अपनी जाति की जानकारी नहीं देता है, तो उसे सजा और जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
जनगणना के चरण और समय-सीमा
जनगणना दो मुख्य चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक मकानों की लिस्टिंग और उनकी गणना का काम होगा।
इसके बाद, दूसरे चरण में 9 से 20 फरवरी 2027 के बीच लोगों की गिनती की जाएगी। 28 फरवरी 2027 को बेघरों की गिनती का काम पूरा किया जाएगा।
कुल मिलाकर, जनगणना का काम 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक चलेगा। एक प्रगणक लगभग 150 घरों तक जाएगा और 700 से 850 की आबादी को कवर करेगा।
कर्मचारियों पर असर: ट्रांसफर पर रोक और कानूनी कार्रवाई
इस जनगणना कार्य में 2 लाख से अधिक कर्मचारी और अधिकारी लगाए जाएंगे। इनमें कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, शहरी निकायों के आयुक्त, शिक्षक, पटवारी और ग्राम सचिव जैसे पद शामिल होंगे।
काम से मना करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की सजा भी हो सकती है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनगणना का कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो।
लाखों कर्मचारियों के तबादलों पर सवा साल की रोक
1 जनवरी 2026 से प्रदेश में लाखों कर्मचारियों के तबादलों पर अगले करीब सवा साल तक रोक लग जाएगी। जनगणना का काम पूरा होने तक यह रोक प्रभावी रहेगी।
क्षेत्रीय जनगणना निदेशक बिष्णु चरण मल्लिक ने स्पष्ट किया कि जिस तरह चुनावों के दौरान पैटर्न रहता है, उसी तरह जनगणना का भी रहता है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में ट्रांसफर हो सकता है।
जनगणना के काम में करीब 1.60 लाख प्रगणक और 30 से 40 हजार सुपरवाइजर व अन्य अफसर लगेंगे। ज्यादातर शिक्षकों और स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को ही इस काम में लगाया जाएगा।
प्रशासनिक सीमाएं सील और ट्रेनिंग
1 जनवरी 2026 से प्रदेश भर में जनगणना के लिए प्रशासनिक यूनिट सील कर दी जाएंगी। गृह मंत्रालय जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगा।
इसका मतलब है कि 1 जनवरी से नए जिले, नए उपखंड, तहसील, नए गांव, नए वार्ड बनाने और उनकी सीमाओं के बदलाव पर रोक लग जाएगी। गांव या शहर के किसी वार्ड तक की सीमा में कोई फेरबदल नहीं किया जा सकेगा।
यह रोक 2027 में मई-जून तक जनगणना का काम पूरा होने तक रहेगी। रोक हटाने पर गृह मंत्रालय फिर से अधिसूचना जारी करेगा।
जनगणना अधिकारियों के पदनाम तय
जनगणना के लिए अधिकारियों के पदनाम भी तय किए गए हैं। शहरों में नगर निगम आयुक्त को प्रमुख जनगणना अधिकारी का पद दिया गया है।
नगर निगम या नगर परिषद के अतिरिक्त आयुक्त या आयुक्त को नगर जनगणना अधिकारी का पद मिला है। नगर निगम के जोन उपायुक्त और नगर पालिका के ईओ को चार्ज जनगणना अधिकारी का पद दिया गया है।
नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका के राजस्व अधिकारी को अतिरिक्त चार्ज जनगणना अधिकारी का पद दिया गया है। यह व्यवस्था जनगणना कार्य को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए की गई है।
जनगणना के लिए ट्रेनिंग की शुरुआत
फरवरी 2026 से जनगणना के काम में लगे अफसर-कर्मचारियों की ट्रेनिंग शुरू होगी। पहले संभागीय आयुक्त, कलेक्टर और एसडीएम स्तर के अफसरों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
जनगणना के प्रोसेस को आसान बनाने के लिए कर्मचारियों को तकनीकी ट्रेनिंग भी दी जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि डिजिटल प्रक्रिया को सही ढंग से संभाला जा सके।
गांवों-ढाणियों की सूची और हैंडबुक का काम
जनगणना के लिए अभी गांवों-ढाणियों और बसावटों की लिस्ट फाइनल करने का काम जारी है। जयपुर, बीकानेर और भरतपुर संभाग के गांवों की लिस्ट फाइनल हो चुकी है।
इसके बाद अब बचे हुए संभागों के गांवों की लिस्ट फाइनल होगी। इसमें जिले, तहसील, गांवों व अन्य बसावटों के हिंदी-अंग्रेजी में नामों की वर्तनी तक की जांच की जाएगी।
फिर इस लिस्ट पर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार से हस्ताक्षर करवाए जाएंगे। यह प्रक्रिया डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
हर जिले की जनगणना हैंडबुक की तैयारी
जनगणना के लिए हर जिले की सेंसस हैंडबुक (Census Handbook) भी बन रही है। इस हैंडबुक में जिले की पूरी फैक्ट फाइल (Fact File) होती है।
इस फैक्ट फाइल का भी परीक्षण चलेगा, जो 19 दिसंबर तक जारी रहेगा। परीक्षण के बाद, जिला जनगणना हैंडबुक को अंतिम रूप दिया जाएगा।