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भारत

चुनाव आयोग हर दिन कानूनी और साइबर जंग लड़ता है: CEC ज्ञानेश

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

पहले अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन में CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग हर दिन कानूनी, संस्थागत और साइबर मोर्चों पर लड़ता है, और पिछले एक साल में 786 में से 785 कोर्ट केस जीते हैं।

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HIGHLIGHTS

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग हर दिन कानूनी, संस्थागत और साइबर मोर्चों पर लड़ता है।
  • आयोग ने पिछले एक साल में 786 कानूनी मामलों का सामना किया, जिनमें से 785 में उसे जीत मिली।
  • 95 करोड़ मतदाताओं वाली भारत की मतदाता सूची एक 'जीवंत दस्तावेज' है, जिसे लगातार अपडेट किया जाता है।
  • CEC ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऑनलाइन मतदान का कोई प्रस्ताव नहीं है क्योंकि संविधान में इसकी व्यवस्था नहीं है।
cec gyanesh kumar says election commission fights legal cyber battles daily

दिल्ली |

'थोड़ा दिल चाहिए… थोड़ा जिगर भी चाहिए।' मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने जैसे ही दिल्ली में आयोजित पहले अखिल भारतीय मीडिया सम्मेलन में यह वाक्य कहा, सभागार में मौजूद पत्रकारों की निगाहें उन्हीं पर टिक गईं।

यह कोई भावुक टिप्पणी नहीं थी, बल्कि चुनाव आयोग के सामने खड़ी रोजमर्रा की चुनौतियों और पिछले एक साल में हुए चुनाव सुधारों का निचोड़ थी।

उन्होंने साफ कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव कराना केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर दिन कई मोर्चों पर लड़ी जाने वाली लड़ाई है।

'चुनावों में मीडिया की भूमिका' पर पहला राष्ट्रीय सम्मेलन

'चुनावों में मीडिया की भूमिका' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 380 से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने शिरकत की।

यह भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) का इस तरह का पहला राष्ट्रीय स्तर का आयोजन था।

इसका मकसद चुनावी प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और उसमें मीडिया की भूमिका को लेकर पत्रकारों के बीच बेहतर समझ बनाना बताया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत संविधान, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 व 1951 और आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत चुनाव प्रक्रिया की समझ के साथ हुई।

सम्मेलन में पत्रकारों को मतदाता सूची तैयार होने, मतदान और मतगणना जैसी प्रक्रियाओं का लाइव प्रदर्शन भी दिखाया गया।

इसका उद्देश्य उन्हें इन प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले सांविधिक फॉर्म और तरीकों को करीब से समझाना था। कार्यक्रम का समापन पत्रकारों और सीईसी के बीच सवाल-जवाब सत्र से हुआ।

'हम पर व्यक्तिगत हमले होते हैं, साइबर अटैक भी'

अपने संबोधन में ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत में चुनाव संविधान, जनप्रतिनिधित्व कानून और आयोग के निर्देशों के अनुरूप कराए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि पूरी चुनावी प्रक्रिया समानांतर निगरानी और ऑडिट से गुजरती है, इसलिए इसकी पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की गुंजाइश नहीं बचती।

उन्होंने आयोग की भूमिका को केवल चुनाव कराने तक सीमित मानने से इनकार करते हुए कहा, 'हम पर व्यक्तिगत हमले होते हैं, संस्थागत हमले होते हैं और साइबर अटैक भी होते हैं… आंधी आए या तूफान… हम संविधान के दायरे में रहकर अपना काम करते रहते हैं।'

चर्चा के दौरान सीईसी का संदेश स्पष्ट था कि चुनाव आयोग आलोचनाओं, कानूनी चुनौतियों और हमलों के बीच भी संविधान के प्रति अपनी जवाबदेही निभाते हुए निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

एक साल में 786 कोर्ट केस, 785 में आयोग की जीत

सीईसी ने आयोग के सामने आने वाली कानूनी चुनौतियों के आंकड़े भी साझा किए।

उन्होंने बताया कि बीते एक वर्ष में आयोग को 786 कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा, जिसमें से 785 मामलों में अदालतों ने आयोग के पक्ष में फैसला सुनाया।

उन्होंने इसे भी एक तरह की 'लीगल बैटल' करार दिया, जिसे आयोग हर दिन अदालतों में लड़ता है।

एसआइआर: 95 करोड़ मतदाताओं वाली 'जीवंत' सूची

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) का जिक्र करते हुए सीईसी ने कहा कि इसका मकसद सिर्फ मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है।

इस प्रक्रिया के तहत मृत, स्थानांतरित, दोहरे या अयोग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि लगभग 95 करोड़ मतदाताओं वाली भारत की मतदाता सूची एक 'जीवंत दस्तावेज' है, जो लगातार अद्यतन होती रहती है।

इसे तैयार करने में 12 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) और 15 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) समानांतर ऑडिटर के तौर पर काम करते हैं।

उन्होंने हाल की विधानसभा चुनावों में हुए रिकॉर्ड मतदान को भारतीय मतदाताओं के चुनावी तंत्र पर भरोसे का प्रमाण बताया।

विपक्ष के सवाल और आयोग का पक्ष

गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, लगातार सवाल उठाते रहे हैं।

बेंगलुरु की महादेवपुरा सीट को लेकर 'वोट चोरी' के आरोपों के बाद सीईसी ने अगस्त में विपक्ष को सात दिन के भीतर हलफनामे के साथ शिकायत दर्ज कराने की चुनौती दी थी।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईआर कराने के आयोग के अधिकार को बरकरार रखा है। इसी पृष्ठभूमि में मीडिया सम्मेलन में सीईसी की टिप्पणियां अहम मानी जा रही हैं।

ऑनलाइन वोटिंग और CCTV पर आयोग का रुख

ज्ञानेश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ऑनलाइन मतदान शुरू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, क्योंकि संविधान में इसकी व्यवस्था नहीं है।

वहीं मतदान कक्ष में सीसीटीवी लगाने की मांग पर उन्होंने कहा कि ऐसा करने से गुप्त मतदान की संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित होगी, इसलिए यह संभव नहीं है।

मीडिया की आलोचना पर CEC का तंज

मीडिया की तीखी आलोचना पर सीईसी ने तंज कसते हुए कहा कि जैसे सूरज हमेशा पूरब से ही उगता है, वैसे ही आयोग हमेशा संविधान के दायरे में रहकर ही काम करता है।

उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि कैसे मीडिया में सूरज को अलग-अलग दिशाओं से उगता दिखाया गया, और हर बार उन्हें समझाना पड़ा कि सूरज पूरब से ही उगता है।

इस पर सीईसी ने कहा कि बार-बार यही बात दोहराने से बेहतर यही समझा गया कि सूरज को अपना काम करने दिया जाए।

कौन हैं ज्ञानेश कुमार?

ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह फरवरी 2025 में देश के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने थे।

वह नए कानून 'सीईसी और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023' के तहत नियुक्त होने वाले पहले सीईसी हैं।

उनका कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक है। इससे पहले वे केंद्रीय गृह मंत्रालय में कश्मीर डिवीजन में संयुक्त सचिव रह चुके हैं और अनुच्छेद 370 हटाए जाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई थी।

विवादों से नाता और आयोग की सफाई

ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल शुरू से ही विवादों और सवालों के घेरे में रहा है, और हर बार उन्होंने या आयोग ने पलटवार करते हुए अपनी बात रखी है।

राहुल गांधी के 'वोट चोरी' आरोप

अगस्त 2025 में राहुल गांधी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र की सीटों का हवाला देते हुए 'वोट चोरी' का आरोप लगाया था।

इस पर सीईसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोपों को निराधार बताया और शिकायतकर्ता को हलफनामे के साथ आने को कहा।

एसआइआर और 'वोट चोरी की साजिश' का आरोप

बिहार में एसआइआर के दौरान विपक्ष ने इसे 'वोट चोरी की साजिश' बताया। सीईसी ने जवाब में कहा कि कुछ दल आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति कर रहे हैं।

पूर्व चुनाव आयुक्तों की आलोचना

पूर्व सीईसी एसवाई कुरैशी और ओपी रावत ने सीईसी के आक्रामक रवैये की आलोचना करते हुए कहा था कि आयोग का काम शंका दूर करना है, सवाल पूछना नहीं।

दिल्ली में मतदाता सूची से नाम हटाना

आम आदमी पार्टी ने ज्ञानेश कुमार पर दिल्ली में मतदाता सूची से नाम हटाने की शिकायतों पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था, जिसे आयोग ने खारिज कर दिया।

*Edit with Google AI Studio

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