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भारत

EPFO का नया नियम: EPFO का बड़ा बदलाव: अब पीएफ में ₹1800 से ज्यादा स्वैच्छिक

बलजीत सिंह शेखावत

EPFO का नया नियम: अब ₹1800 से ज्यादा पीएफ योगदान स्वैच्छिक, निकासी भी हुई आसान। जानें 8 करोड़ लोगों पर असर।

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HIGHLIGHTS

  • ₹15,000 की वैधानिक वेतन सीमा तक 12% पीएफ योगदान अनिवार्य रहेगा।
  • ₹1800 प्रति माह से अधिक का पीएफ योगदान अब पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा।
  • पीएफ से एडवांस निकासी के नियम सरल किए गए, 13 की जगह अब केवल 3 श्रेणियां।
  • कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के पीएफ की अंतिम जिम्मेदारी मुख्य नियोक्ता की होगी।
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नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिसका सीधा असर देश के करीब 8 करोड़ कर्मचारियों पर पड़ेगा। इस नए नियम के तहत, कर्मचारियों को अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स को लेकर पहले से कहीं ज्यादा आजादी मिलेगी।

क्या हैं पीएफ योगदान के नए नियम?

नई EPF स्कीम 2026 के अनुसार, अब पीएफ में ₹1800 प्रति माह से अधिक का योगदान पूरी तरह से स्वैच्छिक कर दिया गया है। इसका मतलब है कि कंपनियां अब कर्मचारी की सहमति के बिना उसकी सैलरी से अतिरिक्त पैसा नहीं काट सकेंगी।

हालांकि, ₹15,000 की वैधानिक वेतन सीमा तक 12% पीएफ का योगदान देना सभी के लिए अनिवार्य बना रहेगा। यह राशि ₹1800 प्रति माह होती है।

उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन ₹1 लाख है, तो भी उसका अनिवार्य पीएफ योगदान ₹15,000 की सीमा पर ही कटेगा, जो कि ₹1800 होगा। कंपनी भी इतनी ही राशि का योगदान करेगी।

स्वैच्छिक योगदान का विकल्प

कर्मचारी अगर चाहें तो अपनी इच्छा से ₹1800 से अधिक की राशि भी अपने पीएफ खाते में जमा करा सकते हैं। इसे स्वैच्छिक भविष्य निधि (VPF) माना जाएगा।

इस अतिरिक्त योगदान पर कंपनी के लिए अपनी तरफ से पैसा जमा करना अनिवार्य नहीं होगा, हालांकि वे चाहें तो ऐसा कर सकती हैं। कर्मचारी और कंपनी दोनों किसी भी समय इस अतिरिक्त योगदान को संशोधित या बंद कर सकते हैं।

सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट सेविंग्स में ज्यादा आजादी देना और पीएफ सिस्टम को पहले से ज्यादा आसान बनाना है।

निकासी हुई पहले से ज्यादा आसान

EPFO ने पीएफ से पैसा निकालने की प्रक्रिया को भी काफी सरल बना दिया है। पहले एडवांस निकासी के लिए 13 अलग-अलग श्रेणियां थीं, जिन्हें अब घटाकर सिर्फ तीन कर दिया गया है।

इनमें पहली श्रेणी बीमारी, शिक्षा और विवाह जैसी जरूरी जरूरतों के लिए है। दूसरी श्रेणी आवास संबंधी जरूरतों के लिए और तीसरी विशेष परिस्थितियों के लिए है।

अब सदस्य अपने पात्र पीएफ बैलेंस का 100% तक एडवांस निकाल सकेंगे। लेकिन, खाते में कुल योगदान का कम से कम 25% हिस्सा बनाए रखना अनिवार्य होगा।

कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों और कंपनियों के लिए निर्देश

नए नियमों में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। यदि ठेकेदार EPFO में पंजीकृत नहीं है, तो मुख्य नियोक्ता की पूरी जिम्मेदारी होगी कि वह कर्मचारियों का पीएफ जमा कराए।

सभी कंपनियों को योजना लागू होने के 15 दिनों के भीतर 'फॉर्म V' के जरिए अपने सभी कर्मचारियों का विवरण EPFO को देना होगा, जिसमें आधार, पैन और UAN जैसी जानकारियां शामिल होंगी।

इन बदलावों से कर्मचारियों के हाथ में अधिक नकदी आने की उम्मीद है, जिससे उन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, कंपनियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है।

*Edit with Google AI Studio

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