जयपुर | जयपुर नगर निगम 2026 के लंबित चल रहे चार वार्डों के पुनर्मतदान के नतीजे घोषित होते ही गुलाबी नगरी की राजनीति में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। री-पोलिंग के बाद गुरुवार को आए नतीजों में चारों की चारों सीटें कांग्रेस के खाते में चली गईं।
जयपुर मेयर चुनाव में बड़ा ट्विस्ट: नगर निगम री-पोलिंग में कांग्रेस का क्लीन स्वीप, भाजपा की बढ़ी टेंशन
जयपुर नगर निगम की 4 सीटों पर हुए पुनर्मतदान में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप किया है। इस जीत से भाजपा का गणित गड़बड़ा गया है और मेयर पद के लिए लॉबिंग तेज हो गई है।
HIGHLIGHTS
- कांग्रेस ने जयपुर नगर निगम की चारों पुनर्मतदान वाली सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया।
- भाजपा के पास 78 सीटें हैं, जो बहुमत के आंकड़े 76 से केवल दो अधिक हैं।
- मेयर पद के लिए भाजपा में संघ और केंद्रीय मंत्रियों की एंट्री से मुकाबला दिलचस्प हुआ।
- के 'विष्णु लाटा कांड' के डर से भाजपा पार्षदों की बाड़ाबंदी और क्रॉस वोटिंग का खतरा।
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पुनर्मतदान के नतीजे: कांग्रेस का क्लीन स्वीप
ईवीएम में आई तकनीकी खराबी के बाद वार्ड 9, 18, 25 और 34 के पांच बूथों पर दोबारा मतदान कराया गया था। गुरुवार को श्री भवानी निकेतन में हुई मतगणना में कांग्रेस ने चारों सीटों पर जीत हासिल की।
वार्डवार चुनावी परिणाम
वार्ड 9 में कांग्रेस की कैलाश देवी ने 4,610 वोट हासिल किए। उन्होंने भाजपा की मंजू अग्रवाल को 764 वोटों के बड़े अंतर से हराया।
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वार्ड 18 में कांग्रेस की वंदिता शर्मा को 4,962 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के नीरज कुमावत को 181 वोटों से मात दी।
वार्ड 25 में कांग्रेस की रेखा देवी सैनी 5,533 वोट पाकर विजयी रहीं। उन्होंने भाजपा समर्थित चंचल कंवर को 397 वोटों से पीछे छोड़ा।
वार्ड 34 में कांग्रेस के सुरेश यादव को 4,405 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के पीयूष किराड़ को 149 वोटों से हराया।
नगर निगम का नया संख्या बल और बहुमत का गणित
इस क्लीन स्वीप के साथ ही कांग्रेस का आंकड़ा 53 से बढ़कर 57 हो गया है। भाजपा वर्तमान में 78 सीटों पर टिकी हुई है और 15 निर्दलीय जीतकर आए हैं।
150 सदस्यों वाले बोर्ड में भाजपा बहुमत के 76 के आंकड़े से महज 2 सीट आगे है। कांग्रेस और निर्दलीयों का संयुक्त संख्या बल 72 पहुंच गया है।
मेयर पद के लिए भाजपा में मची रार
78 सीटों के साथ बहुमत में होने के बावजूद भाजपा के भीतर मेयर प्रत्याशी के चयन को लेकर भारी असमंजस है। सुनील कोठारी और पुनीत कर्णावट के नाम पहले से चर्चा में थे।
अब अनुराधा माहेश्वरी और विजय अग्रवाल के नाम भी तेजी से आगे आए हैं। शैलेंद्र भार्गव, सुभाष सिंघी, विमल अग्रवाल और भवानी सिंह राजावत भी रेस में हैं।
संघ और केंद्रीय नेतृत्व की एंट्री
मेयर पद के दावेदारों को लेकर भाजपा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों की सीधी एंट्री हो चुकी है। राजस्थान के एक केंद्रीय मंत्री सहित दो बड़े केंद्रीय नेता सक्रिय हैं।
सूत्रों के अनुसार, एक नए और निष्पक्ष चेहरे को आगे बढ़ाने के लिए लॉबિંગ तेज हो गई है। एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल से जुड़े गैर-पार्षद व्यक्ति का नाम भी चर्चा में है।
जातीय समीकरण और सामाजिक लॉबिंग
मेयर पद के लिए जातीय समीकरण पूरी तरह हावी हो चुके हैं। वैश्य समाज के दावे के बाद अब ब्राह्मण समाज ने भी अपनी मांग रखी है।
अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा और विप्र फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की है। उन्होंने ब्राह्मण चेहरे को मेयर बनाने की मांग की है।
श्री अग्रवाल समाज समिति और राजपूत सभा जयपुर के प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने बिरादरी के प्रत्याशी के लिए ज्ञापन सौंपे हैं।
2019 का 'विष्णु लाटा कांड' और क्रॉस वोटिंग का डर
भाजपा नेतृत्व को 2019 का वह उपचुनाव याद आ रहा है जब बहुमत के बावजूद पार्टी हार गई थी। तब बागी नेता विष्णु लाटा ने कांग्रेस और निर्दलीयों के दम पर जीत दर्ज की थी।
नगर निगम में दलबदल कानून लागू नहीं होने के कारण इस बार भी क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है। भाजपा अपनी सरकार सुरक्षित करने के लिए निर्दलीयों को साध रही है।
वार्ड 80 की निर्दलीय पार्षद रेणु चौधरी ने भाजपा की सदस्यता ले ली है। भाजपा का दावा है कि 50% से अधिक निर्दलीय उनके संपर्क में हैं।
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